जिला स्तरीय गंगा संवाद: गंगा के अस्तित्व, विस्थापन आजीविका, गाद को लेकर बने ठोस नीति

Published by :RAJKISHOR K
Published at :07 May 2026 6:43 PM (IST)
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जिला स्तरीय गंगा संवाद: गंगा के अस्तित्व, विस्थापन आजीविका, गाद को लेकर बने ठोस नीति

जिला स्तरीय गंगा संवाद: गंगा के अस्तित्व, विस्थापन आजीविका, गाद को लेकर बने ठोस नीति

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– विशेषज्ञों के अनुभव पर रोडमैप बनाने पर जोर कटिहार शहर के एक होटल में गंगा घाटी मंच एवं अभिलाषा परिवार स्वयंसेवी संस्था की ओर से गुरुवार को आयोजित गंगा संवाद में नदी-तटीय समुदायों के पर्यावरणीय न्याय, सामुदायिक जल अधिकारों और समावेशी नदी बेसिन शासन के मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई. कटिहार में इस प्रकार के गंगा संवाद का आयोजन पहली बार किया गया. कार्यक्रम में मछुआरों, नदी किनारे के किसानों, महिलाओं, प्रवासी समुदायों तथा नदी-कटाव और गाद जमाव से प्रभावित लोगों की आजीविका, अधिकारों और जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए. संवाद में यह रेखांकित किया गया कि गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना (जीबीएम) बेसिन के नदी-तटीय समुदायों के अनुभवों, आजीविका संबंधी चुनौतियों और स्थानीय आवश्यकताओं को नदी शासन और विकास नीतियों में अधिक समावेशी ढंग से शामिल किए जाने की आवश्यकता है. विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदायों ने अंतर्राष्ट्रीय जल कानून, समावेशी नदी शासन और सामुदायिक भागीदारी के आधार पर नदी-पारिस्थितिकी तंत्रों के संरक्षण, पुनर्वास नीतियों तथा प्रभावित समुदायों के लिए प्रभावी संस्थागत सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. यहां राष्ट्रीय, राज्यस्तरीय और स्थानीय मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई तथा उनके समाधान के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया. विशेष रूप से मछुआरा समुदाय से जुड़े नदी प्रदूषण, गाद भराव और मछलियों की घटती संख्या जैसी समस्याओं पर गंभीर विमर्श किया गया. इसके साथ ही दियारा क्षेत्र में रहने वाले लोगों और उनकी आजीविका से जुड़े मुद्दों पर भी गहन चर्चा हुई. जिसमें संवाद में भाग ले रहे प्रतिभागियों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए. डीआरडीए के निदेशक सह नोडल ऑफिसर जिला गंगा समिति कटिहार सुदामा प्रसाद सिंह ने दियारा क्षेत्र में रह रहे लोगों की समस्याओं पर चर्चा में भाग लिया. जिसमें यह निकल कर आया कि दियारा क्षेत्र में अभी लॉ एंड ऑर्डर को लेकर काफी बदलाव की आवश्यकता है. वहां रह रहे लोगों की आजीविका पर सोचने बचाने की आवश्यकता है और खास करके बाढ़ के रूप में जो आपदा आती है. उसके प्रबंधन की आवश्यकता है. संवाद कार्यक्रम में इनकी रही सक्रिय भागीदारी कार्यक्रम में डीआरडीए निदेशक सुदामा प्रसाद सिंह, दिल्ली से आये उच्च न्यायालय के पर्यावरण वकील शवाहिक सिद्दीकी तथा साभवी ठाकुर, अभिलाषा परिवार स्वयंसेवी संस्था कटिहार के सचिव राजेश कुमार सिंह, नदी घाटी मंच के भगवान जी पाठक,, पर्यावरणविद डॉ टीएन तारक, डीपीओ ब्रज मोहन प्रसाद, प्रो प्रभु नारायण लाल दास, किशोर कुमार मंडल, विनय भूषण, नवीन चौधरी जिला संयोजक गंगा समग्र, अधिवक्ता भास्कर, छाया तिवारी, डॉ ओम प्रकाश पांडेय, मनोज कुमार मंडल, अरुण कुमार चौबे, शिवानंद सिंह, नवीन कुमार, अमरेश कुमार सिंह, राजकुमार गुप्ता सहित दर्जनों सामाजिक कार्यकर्ता ने अपनी बातों को रखते हुए गंगा नदी के मौजूदा स्थिति को रेखांकित किया.

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