Dhanbad News: निरसा में आइआइटी आइएसएम के दूसरे कैंपस की जमीन अटकी, रैयती भूमि अदला-बदली का प्रस्ताव

<P>निरसा में प्रस्तावित आइआइटी-आइएसएम के दूसरे कैंपस का निर्माण जमीन से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय से अटका हुआ है. संस्थान की ओर से धनबाद उपायुक्त को भेजे गये
निरसा में प्रस्तावित आइआइटी-आइएसएम के दूसरे कैंपस का निर्माण जमीन से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय से अटका हुआ है. संस्थान की ओर से धनबाद उपायुक्त को भेजे गये पत्र में रैयती (निजी) जमीन को सरकारी जमीन से अदला-बदली करने और पार्ट-सी क्षेत्र के पुनः आवंटन का अनुरोध किया गया है. संस्थान का कहना है कि जब तक जमीन की स्थिति स्पष्ट और एकसमान नहीं होगी, तब तक कैंपस निर्माण और अन्य विकास कार्यों को आगे बढ़ाना संभव नहीं है.
पार्ट-बी और सी में रैयती जमीन से निर्माण कार्य बाधित
आइआइटी-आइएसएम के कुलसचिव प्रबोध पांडेय द्वारा भेजे गए पत्र के अनुसार, निरसा में आवंटित कुल 226.98 एकड़ जमीन को ए, बी और सी तीन हिस्सों में विभाजित किया गया है. इनमें से पार्ट-बी और पार्ट-सी के बड़े हिस्से में रैयती जमीन शामिल है. इन जमीनों पर स्थानीय लोगों के मकान बने हुए हैं और कई जगहों पर खेती भी की जा रही है. ऐसे में संस्थान को जमीन का सीधा उपयोग करने में परेशानी हो रही है. यह स्थिति विकास कार्यों के लिए सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आयी है.
226.98 एकड़ जमीन में बाउंड्री वॉल बनाना हुआ मुश्किल :
संस्थान ने स्पष्ट किया है कि जमीन के अलग-अलग हिस्सों में निजी स्वामित्व होने के कारण पूरे क्षेत्र की घेराबंदी (बाउंड्री वॉल) करना संभव नहीं हो पा रहा है. बाउंड्री वॉल के बिना न तो सुरक्षा सुनिश्चित हो पा रही है और न ही निर्माण कार्य की शुरुआत हो रही है. इसके चलते संस्थान के दूसरे कैंपस का काम वर्षों से लंबित है. जमीन की असंगत स्थिति के कारण इंजीनियरिंग प्लानिंग और लेआउट तैयार करने में भी दिक्कतें आ रही हैं.
सरकारी जमीन से अदला-बदली से खुलेगा कैंपस विस्तार का रास्ता
इन्हीं समस्याओं को देखते हुए संस्थान ने प्रस्ताव दिया है कि पार्ट-बी में आने वाली रैयती जमीन को आसपास उपलब्ध सरकारी जमीन से बदल दिया जाए. साथ ही पार्ट-सी के 48.86 एकड़ क्षेत्र को भी किसी निकटवर्ती सरकारी भूखंड से अदला-बदली करने की मांग की गई है. यदि यह प्रस्ताव स्वीकार होता है, तो संस्थान को एकसाथ और सटे हुए भूखंड मिल सकेंगे, जिससे कैंपस का समेकित विकास संभव होगा. इससे बाउंड्री वॉल निर्माण, शैक्षणिक भवन, छात्रावास, सड़क और अन्य आधारभूत संरचनाओं का कार्य तेजी से शुरू किया जा सकेगा. संस्थान ने जिला प्रशासन से इस प्रस्ताव पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है. अधिकारियों का मानना है कि यदि जमीन विवाद का समाधान हो जाता है, तो न केवल दूसरे कैंपस का निर्माण तेजी से आगे बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र के शैक्षणिक और आर्थिक विकास को भी नई गति मिलेगी.
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