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Dhanbad News: डीएमएफटी फंड से बनेंगी छह जलमीनार, जल संकट से मिलेगा निजात

Dhanbad News: जिले में बढ़ती आबादी को देखते हुए जिला प्रशासन ने उठाया कदम

Dhanbad News: शोभित रंजन, धनबाद :

धनबाद में लगातार बढ़ती आबादी और सीमित जल भंडारण क्षमता के कारण

Dhanbad News: जिले में बढ़ती आबादी को देखते हुए जिला प्रशासन ने उठाया कदम

Dhanbad News: शोभित रंजन, धनबाद :

धनबाद में लगातार बढ़ती आबादी और सीमित जल भंडारण क्षमता के कारण उत्पन्न पेयजल संकट को दूर करने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) फंड से जिला प्रशासन ने छह नयी जलमीनार का निर्माण करने का निर्णय लिया है. इसका उद्देश्य उन इलाकों में पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना है, जहां वर्तमान में एक या दो लाख लीटर क्षमता की पुरानी जलमीनारें जरूरत पूरा नहीं कर पा रही हैं. प्रशासन का मानना है कि नयी जलमीनारों के निर्माण से जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और लोगों को नियमित रूप से पानी मिलेगा.

चार 7.50 लाख और दो 5 लाख लीटर क्षमता की होंगी जलमीनार

चार जलमीनारों की क्षमता 7.50 लाख लीटर तथा दो जलमीनारों की क्षमता पांच लाख लीटर निर्धारित की गयी है. 7.50 लाख लीटर क्षमता वाली एक जलमीनार के निर्माण पर लगभग चार करोड़ रुपये खर्च होंगे, जबकि पांच लाख लीटर क्षमता की जलमीनार के लिए तीन करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है. प्रत्येक जलमीनार के निर्माण के लिए 20×20 मीटर भूमि की आवश्यकता होगी. डीएमएफटी के माध्यम से इस परियोजना पर करोड़ों रुपये खर्च कर जिले की जल भंडारण क्षमता बढ़ाने की तैयारी है.

चीरागोड़ा, धैया, सरायढेला, मटकुरिया, पांडरपाला व कुसुम विहार में स्थल चिह्नित

छह जलमीनारों के निर्माण के लिए चीरागोड़ा, धैया मंडल बस्ती, सरायढेला, मटकुरिया, पांडरपाला और कुसुम विहार में स्थल चिह्नित किया गया है. चीरागोड़ा में झारखंड मैदान स्थित मौजूदा पानी टंकी के बगल में 7.50 लाख लीटर क्षमता की जलमीनार बनेगी. मटकुरिया में पानी टंकी के पास और पांडरपाला में भारत चौक प्राथमिक विद्यालय के बगल में पांच लाख लीटर क्षमता की जलमीनार प्रस्तावित है, वहीं कुसुम विहार में बसंत विहार पानी टंकी के पास 7.50 लाख लीटर क्षमता की जलमीनार का निर्माण किया जाना है.

दो स्थानों के भूमि प्रतिवेदन का इंतजार

हालांकि छह में से दो धैया मंडल बस्ती (दुर्गा मंदिर के सामने या आंगनबाड़ी के बगल में) व सरायढेला (पुराना थाना कार्यालय के बगल में) के लिए अब तक भूमि उपलब्धता का प्रतिवेदन प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध में कुछ माह पहले डीडीसी द्वारा धनबाद अंचल कार्यालय से अनुपालन प्रतिवेदन मांगा गया है. भूमि उपलब्ध होते ही इन स्थानों पर भी निर्माण प्रक्रिया शुरू की जायेगी.

पानी की किल्लत से मिलेगी राहत

सभी चयनित क्षेत्रों में आबादी तेजी से बढ़ी है, जबकि मौजूदा जलमीनारों की क्षमता बेहद कम है. इसी वजह से लोगों को आये दिन पानी की समस्या झेलनी पड़ती है. नयी जलमीनारों के निर्माण से न सिर्फ भंडारण क्षमता बढ़ेगी, बल्कि जलापूर्ति नियमित और सुचारु होगी. डीएमएफटी की यह योजना पूरी होने के बाद जिले के हजारों लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है.

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