Deoghar news : उपभोक्ता फोरम ने डॉक्टर पर 12 लाख रुपये का लगाया हर्जाना

Edited by FALGUNI MARIK
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<P>विधि संवाददाता, देवघर . जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम ने उपभोक्ता वाद संख्या 4/2020 रश्मि बनाम डॉ मनीष कुमार व अन्य की सुनवाई पूरी की गयी, जिसके बाद विपक्षी संख्या एक

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विधि संवाददाता, देवघर . जिला उपभोक्ता संरक्षण फोरम ने उपभोक्ता वाद संख्या 4/2020 रश्मि बनाम डॉ मनीष कुमार व अन्य की सुनवाई पूरी की गयी, जिसके बाद विपक्षी संख्या एक डॉ मनीष कुमार की सेवा में त्रुटि पाकर 12 लाख रुपये का हर्जाना लगाया. यह राशि दो माह के अंदर विपक्षी की ओर से आवेदिका रश्मि उर्फ निक्कू को देनी होगी. अगर विपक्षी दो माह के अंदर आदेशित राशि का भुगतान नहीं कर पाते हैं, तो नौ प्रतिशत सूद की दर से कुल राशि देय होगी. इसमें क्षतिपूर्ति व मुकदमा में लगे खर्च की राशि शामिल है. यह फैसला फोरम के अध्यक्ष राजेश कुमार व सदस्य सुचित्रा झा की संयुक्त बेंच ने सुनाया.

आवेदिका कास्टर टाउन देवघर की रहने वाली है और इनके पति नीरज कुमार की मौत पांव के ऑपरेशन के दौरान हो गयी थी. मृतक की पत्नी ने चिकित्सक को पहले शिकायत की, लेकिन उन्होंने अनसुना कर दिया. बाध्य होकर न्याय के लिए उपभोक्ता अदालत में याचिका दाखिल की और क्षतिपूर्ति राशि का दावा की, जिसमें डॉ मनीष कुमार व सिविल सर्जन देवघर को विपक्षी बनाया गया था. मामले की सुनवाई के दौरान परिवादिनी की ओर से अधिवक्ता अरुण कुमार भैया व विपक्षी संख्या एक की ओर से अधिवक्ता विनोद कुमार सिन्हा व विपक्षी संख्या दो की ओर से अधिवक्ता देव नारायण मंडल ने पक्ष रखा. सभी पक्षों के अधिवक्ताओं की बहस सुनने और दस्तावेजी साक्ष्यों के अवलोकन के बाद सेवा में त्रुटि पायी गयी, जिसके बाद उक्त फैसला सुनाया गया.

कैसे घटी थी घटना

दाखिल वाद के अनुसार आवेदिका के पति नीरज कुमार मुंगेर से मोटरसाइकिल चलाकर देवघर आ रहे थे. आरके मिशन मोड़ के पास संतुलन खोने से गिर गये. जख्मी हालत में ईलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया, जहां पर घुटने में फ्रैक्चर बताया व ऑपरेशन की सलाह दी गयी. ऑपरेशन के समय आवश्यकता से अधिक बेहोशी की दवा दी गयी, जिससे उसके पति की हालत गंभीर हो गयी. आनन फानन में सदर अस्पताल देवघर के आइसीयू में भर्ती करा दिया गया, जहां पर मृत घोषित कर दिया गया. डॉक्टर की चिकित्सीय लापरवाही से मौत को लेकर मुकदमा किया गया, जिसमें दो लोगों की गवाही दी गयी और घटना के पक्ष में तथ्य रखे गये. सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद फैसला सुनाया. आवेदिका को चार साल के संघर्ष के बाद न्याय मिला.

॰दो माह के अंदर राशि का भुगतान करने का दिया आदेश

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