नवरात्र: मां कूष्मांडा की पूजा को बड़ी दुर्गा मंदिर में आरती में उमड़ा सैलाब

Updated at : 25 Sep 2025 6:26 PM (IST)
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नवरात्र: मां कूष्मांडा की पूजा को बड़ी दुर्गा मंदिर में आरती में उमड़ा सैलाब

नवरात्र: मां कूष्मांडा की पूजा को बड़ी दुर्गा मंदिर में आरती में उमड़ा सैलाब

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– शुक्रवार को पांचवें दिन भी मां कूष्मांडा की ही होगी पूजा, शनिवार को पांचवां पूजा मां स्कंदा माता की होगी कटिहार जिले के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में गुरुवार को नवरात्र के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा हुई. सुबह से ही विभिन्न मंदिरों एवं पूजा स्थलों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गयी. बड़ी तादाद में श्रद्धालु अपने-अपने घरों पर भी मां कूष्मांडा की पूजा की. बड़ी दुर्गा स्थान के आचार्य पंडित डॉ राघवेंद्र झा ने बताया कि नवरात्र के पांचवें दिन शुक्रवार को भी मां कूष्मांडा की ही पूजा होगी जबकि, शनिवार को पंचमी के दिन मां स्कंद माता की पूजा होगी. इस बीच दुर्गापूजा के नजदीक आते ही चारों तरफ चहल- पहल बढ़ गयी है. विभिन्न मार्केट में खरीदारी को लेकर भीड़ जुटने लगी है. खासकर कपड़े की दुकानों में अधिक भीड़ देखी जा रही है. दूसरी तरफ पूजा कमेटी व आयोजकों की ओर से मंदिर व पूजा स्थल को सजाने सवांरने के कार्य को भी अंतिम रुप दिया जा रहा है जबकि, शिल्पकार मां दुर्गा सहित अन्य प्रतिमा को अंतिम आकार देने में जुटे है. गुरुवार को भी दिन में ग्रामीण क्षेत्रों से लोग खरीदारी के लिए शहर के विभिन्न बाजारों में पहुंचे. जबकि शहरी क्षेत्र के लोग शाम में खरीदारी करते देखे गये. आज भी होगी मां कूष्मांडा की पूजा नवरात्र के पांचवें दिन शुक्रवार को भी मां कूष्मांडा की ही ही पूजा होगी. बड़ी दुर्गा स्थान के आचार्य पंडित डॉ राघवेंद्र झा ने कहा, चार व पांच पूजा दो दिन मां कूष्मांडा की पूजा हो रही है जबकि शनिवार को अब श्रद्धालु माता के पांचवें रूप मां स्कंदमाता की पूजा करेंगे. स्कंदमाता के बारे में भी कई तरह बातें प्रचलित है. मोक्ष के द्वार खोलने वाली स्कंदमाता परम सुखदायी है. पूरे निष्ठा से आराधना करने पर मां अपने भक्तों की समस्त इच्छाओं की पूर्ति करती है. भगवान स्कंद ””कुमार कार्तिकेय”” नाम से भी जाने जाते है. ये प्रसिद्ध देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे. पुराणों में इन्हें कुमार और शक्ति कहकर इनकी महिमा का वर्णन किया गया है. इन्हीं भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है. स्कंदमाता की चार भुजाएं है. इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है. उसमें कमल पुष्प है. बायीं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है. उसमें भी कमल पुष्प ली हुई है. इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है. ये कमल के आसन पर विराजमान रहती है. सिंह भी इनका वाहन है. श्रद्धालु का मन समस्त लौकिक, सांसारिक आदि बंधनों से मुक्त होकर पद्मासना मां स्कंदमाता के स्वरूप में लीन होता है. बाजार में लौटी रौनक इस बीच दुर्गापूजा को लेकर धीरे-धीरे बाजारों की रौनक लौटने लगी है. बाजारों में खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ जुटने लगी है. शहर के बड़ा बाजार, एमजी रोड, गर्ल्स स्कूल रोड, मंगल बाजार के कपड़ा दुकान व रेडीमेड वस्त्र के दुकानों पर अत्यधिक भीड़ देखी गयी. लोग अपने अपने पसंद के कपड़ा खरीदने में जुटे रहे.

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