Chaibasa News : ''सफलता के लिए निरंतरता जरूरी''

Published by : AKASH Updated At : 01 Sep 2025 11:14 PM

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मझगांव प्रखंड के मध्य विद्यालय देवधर स्थित हो जनजातीय जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय का आठवां स्थापना दिवस सोमवार को समारोहपूर्वक मनाया गया.

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चाईबासा.

मझगांव प्रखंड के मध्य विद्यालय देवधर स्थित हो जनजातीय जीवन दर्शन पर आधारित संग्रहालय का आठवां स्थापना दिवस सोमवार को समारोहपूर्वक मनाया गया. समारोह का उद्घाटन कोल्हान प्रमंडल के पूर्व शिक्षा उपनिदेशक अरविंद विजय बिलुंग ने किया. मौके पर अरविंद विजय बिलुंग ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए निरंतरता जरूरी है. यह बड़ी बात है कि हो जनजातीय जीवन दर्शन पर आधारित प्रथम संग्रहालय देवधर अपडेट है. इसका रख-रखाव बेहतर ढंग से किया जा रहा है. यही वजह है कि देश के विभिन्न हिस्सों समेत अंतर्राष्ट्रीय स्तर के शोधकर्ताओं के लिए यह संग्रहालय आकर्षण का केंद्र बना है. समाजसेवी नरेश देवगम ने कहा कि हमें मातृभाषा के साथ राजकीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषा को जानना जरूरी है. उन्होंने कहा कि अपनी भाषा को व्यवहार में लाना और संस्कृति को संजोकर रखना हमारा कर्तव्य है. हो साहित्यकार जवाहरलाल बांकिरा ने कहा कि हमें आदिवासी होने पर गर्व करना चाहिए. विश्व में जब-जब संकट आता है, सारा जनमानस आदिवासियों की जीवन शैली को याद करते हैं. रवींद्र बाल संस्कार केंद्र के निदेशक सिकंदर बुड़ीउली ने कहा कि हमें विकास की राह में आगे बढ़ना है, तो स्वरोजगार को अवसर बनाना आवश्यक है. ओडिशा से आए हो समाज के उत्थान के लिए कार्य कर रहे सेलाय पूर्ति ने अपनी रीति-रिवाज एवं दस्तूर को न भूलने का आह्वान किया. विद्यालय के प्रभारी जगदीश सावैयां ने कहा कि क्षेत्र में उच्च विद्यालय की कमी महसूस की जा रही है. कार्यक्रम को मझगांव प्रखंड के प्रमुख सरस्वती चातर, संजीव नेत्रालय के डॉ संजीव तिरिया व दंत चिकित्सक डॉ बासमती सामड ने भी संबोधित किया.

बच्चों ने प्रस्तुत किये पारंपरिक हो लोकनृत्य

इस अवसर पर मध्य विद्यालय देवधर और उमवि कुलावा बाइदा के विद्यार्थियों ने पारंपरिक हो लोक नृत्य के अलावा सुंदर झारखंड, जोहार आदिवासी, स्वर्ग लेकन दिसुम गीत एवं अन्य आधुनिक गीतों पर मनभावन नृत्य पेश कर समा बांध दिया. वहीं मनोज हेम्ब्रम ने नशा के दुष्परिणाम पर कविता सुनाया, जबकि आसमान हांसदा ने पारंपरिक हेरो लोकगीत प्रस्तुत किया. हो साहित्यकार जवाहरलाल बांकिरा ने श्री बिलुंग को स्वरचित कविता संकलन देशाउलि और इमली का पेड़ पुस्तक भेंट की.

कार्यक्रम में ये थे उपस्थित

इस मौके पर मोहन तिरिया, देवानंद तिरिया, प्रभात तिरिया, मेनंती पिंगुवा, सुभाष हेम्ब्रम, महाती पिंगुवा, कविता महतो, चंद्रशेखर तामसोय, जनक किशोर गोप, मार्शल पूर्ति, सरिता पूर्ति, अनीता सोय, बहुभाषी पुस्तक के लेखक मंगल सिंह मुंडा, दामु सुंडी, बलभद्र सावैयां, सानगी दोंगो, पेलोंग कांडेयांग, बासमती बिरुवा, तरतरिया के मुंडा नंदलाल तिरिया, मार्शल कोडांकेल आदि उपस्थित थे.

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