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मदर्स डे : अपने बच्चों की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं सिंगल मदर

पटना : पुरानी कहावत है कि भगवान हर जगह नहीं पहुंच सकते, इसलिए उसने मां को अपने रूप में भेजा है. मां और बच्चे का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक हैं. मां-बच्चे के रिश्ते को आदर देते हुए मदर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है. तो इस मदर्स डे पर शहर की […]

पटना : पुरानी कहावत है कि भगवान हर जगह नहीं पहुंच सकते, इसलिए उसने मां को अपने रूप में भेजा है. मां और बच्चे का रिश्ता दुनिया के सबसे खूबसूरत रिश्तों में से एक हैं. मां-बच्चे के रिश्ते को आदर देते हुए मदर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है. तो इस मदर्स डे पर शहर की उन मांओं के बारे में जानते हैं जो अपने बच्चों की परवरिश सिंगल मदर के तौर पर कर रही हैं.

बेटी को पढ़ाने के लिए खोली कोचिंग : स्मिता मुखर्जी

स्मिता मुखर्जी एक बेटी की मां है. लेकिन वह सिंगल हैं. अकेले दम पर बेटी को पढ़ाने का जज्बा कोई इनसे सीख सकता है. खुद माउंट कर्मेल हाइ स्कूल से पढ़ी स्मिता चौथी क्लास में ही गलत इलाज के कारण अपना दाहिना पैर गंवा चुकी हैं. लेकिन अपनी पढ़ाई जारी रखी. कहती हैं कि मेरी बेटी अनुष्का मेरी हिम्मत है. जब वह पांच साल की थी उसी समय अपने पति से अलग हो गयी. इसके बाद मां के पास आ कर रहने लगी. बेटी को पढ़ाने के लिए मैंने खुद कोचिंग क्लास खोली. 10वीं तक के बच्चे को साइंस विषय पढ़ाने लगी. बेटी को भी बेहतर शिक्षा देने का सिलसिला जारी है. बेटी 96 प्रतिशत अंक प्राप्त कर मेरे सपने को साकार करने की एक सीढ़ी पार कर गयी है.

जिस हालात से मैं गुजरी उनने कोई नहीं गुजरे : प्रशांति तिवारी

प्रशांति तिवारी एक सिंगल पैरेंट्स हैं. वह अपने पैरों पर खड़ी है. बेटा ध्रुव तिवारी (आर्यन) को पढ़ा-लिखा रही हैं. कहती हैं कि लव मैरिज होने के बाद भी संबंध सही नहीं था तो वह अलग हो गयी. तलाक में प्रशांति ने मेंटेनेंस के लिए आवेदन भी नहीं दिया था. वह कहती हैं मैं अपने पैरों पर खड़ी हूं. किसी भी व्यक्ति का एहसान नहीं चाहिए. मैं चाहती हूं कि जो मेरे साथ हुआ वह किसी और के साथ नहीं हो. इसके लिए वह घरेलू हिंसा पर काम करना शुरू कर दिया. वह कहती हैं कि मेरी सबसे बड़ी जीत तब होगी, जब मेरा बेटा किसी भी लड़की पर हो रही हिंसा के खिलाफ आवाज उठायेगा.

मां के सपोर्ट से मां की जिम्मेदारी निभा रही हूं : ऋचा वर्मा

काफी मुश्किल दौर में मुझे भी मां-पापा का सपोर्ट मिला. इसके बाद एक मां की भूमिका में भी अपनी जिम्मेदारी निभा रही हूं. शादी मुंबई में हुई. लेकिन दहेज उत्पीड़न की शिकार हो गयी. इस कारण अलग होना पड़ा. बेटी श्रेयशी अभी वन क्लास में पढ़ रही है. वहीं मेरी हिम्मत है. उसके हर सपने को पूरा करना है. मां हर मोड़ पर मेरे साथ थी. बच्ची को मैं गोद में लेकर महिला थाने का चक्कर लगाती थी. बच्ची जन्मी इसके लिए भी मेरे ससुराल वालों ने मुझसे मारपीट की थी. वहां के हॉस्पिटल में भी मारपीट हुई. स्टीच खुल गया था. मुंबई से लेकर पटना तक तमाशा हुआ. लेकिन मैं अपनी बच्ची के लिए जी रही हूं. वहीं मेरी शक्ति है.

मुश्किल दौर में भी नहीं मानी हार : मधु श्रीवास्तव

सिंगल पेरेंट्स को बच्चे की परवरिश में बड़ी जिम्मेदारी निभानी होती है. खास कर जब लड़की हो तब यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है. यह कहना है सिंगल पेरेंट्स मधु श्रीवास्तव का. वह लोगों के लिए अब मिसाल कायम कर रही है. पटना हाइकोर्ट में वकालत करते हुए उन्होंने अपनी बेटी के हर सपने को पूरा किया. जब बेटी छोटी थी तो काफी मुश्किलों का दौर था. स्कूलों के एडमिशन तक में सिंगल पेरेंट्स होने के कारण परेशानी हुई. अब बेटी प्रेरणा प्रिया पटना वीमेंस कॉलेज से ग्रेजुएशन फाइनल इयर की परीक्षा दे चुकी है. मधु कहती हैं कि जब प्रेरणा छोटी थी उसी समय से लॉ करने के बाद मैंने वकालत करनी शुरू कर दी.

बहुत मुश्किल है मां-बाप का रोल एक साथ निभाना: श्वेता सुरभि

आरजे श्वेता सुरभि कहती हैं कि 1999 में जब मेरी शादी हुई तब मेरे पास सबकुछ था. हर कदम पर साथ देने वाला पति, अच्छा खासा बिजनेस और खुशियां ही खुशियां. अचानक पति को कैंसर डाइग्नोस हुआ. एक पल के लिए लगा जैसे सबकुछ जड़वत हो गया. लेकिन हमने खुद को संभाला. करीब दो सालों तक इलाज हुआ. आखिर में वही हुआ जिसका डर था. मैंने सबसे पहले खुद को संभाला. बच्चों की स्टडी पर ध्यान दिया. घर से बाहर न निकलने वाली मुझ जैसी औरत ने पहली बार दहलीज को लांघा. क्योंकि मुझे बच्चों के भविष्य की फिक्र हो रही थी. घटना के बाद इंग्लिश से ग्रेजुएशन किया. मास कॉम भी पूरा किया और जॉब करने लगी. अपने बच्चों के लिए मां और पिता दोनों मैं ही हूं.

Prabhat Khabar Digital Desk
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