जलवायु संरक्षण के लिए शाकाहारी बनें, अध्ययन से हुआ खुलासा

पेरिस : जलवायु परिवर्तन की भयावहता को कम करने के लिये दुनिया को निश्चित रूप से मांस की खपत में काफी कमी लानी होगी. हम जो कुछ खाते हैं उसका हमारे पर्यावरण पर क्या असर होता है, इस विषय पर किये गये अब तक के सबसे गहन अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ये बात कही. वैज्ञानिकों […]
पेरिस : जलवायु परिवर्तन की भयावहता को कम करने के लिये दुनिया को निश्चित रूप से मांस की खपत में काफी कमी लानी होगी. हम जो कुछ खाते हैं उसका हमारे पर्यावरण पर क्या असर होता है, इस विषय पर किये गये अब तक के सबसे गहन अध्ययन में वैज्ञानिकों ने ये बात कही. वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी का तापमान तेजी से बढ़ने के मद्देनजर पृथ्वी को बचाने की जद्दोजहद में मानवता को सख्त चयन करना होगा .
अनुसंधानकर्ताओं ने सुझाव दिया है कि पश्चिमी देशों को अपनी मांस खपत में 90 फीसदी की कटौती करनी होगी ताकि पृथ्वी 2050 तक अपनी अनुमानित 10 अरब जनसंख्या को वहन कर सके . घटते वन और बेतहाशा मात्रा में पानी का इस्तेमाल जलवायु परिवर्तन के प्रमुख कारण हैं. यह अध्ययन बुधवार को ‘नेचर’ पत्रिका में प्रकाशित हुआ . इसमें बताया गया है कि किस तरह से गहन कृषि हमारे ग्रह की जलवायु के लिये खराब है.
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