शिशु के लिए जानलेवा भी हो सकता है क्लस्टर फीडिंग, जान लें ब्रेस्टफीडिंग से संबंधित ये प्रमुख बातें

Updated at : 26 Sep 2017 11:09 AM (IST)
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शिशु के लिए जानलेवा भी हो सकता है क्लस्टर फीडिंग, जान लें ब्रेस्टफीडिंग से संबंधित ये प्रमुख बातें

अंकिता जैन स्तंभकार ankita87jn@ gmail.com इंटरनेट पर एक खबर पढ़ी, क्लस्टर फीडिंग के कारण तीन दिन के बच्चे की मौत हो गयी. कुछ पल को मैं भी डर गयी कि क्या ब्रेस्टफीडिंग से भी किसी बच्चे की मौत हो सकती है! लेकिन फिर जब खबर को पूरा पढ़ा और उसके कारण जाने तब असल बात […]

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अंकिता जैन
स्तंभकार
ankita87jn@
gmail.com
इंटरनेट पर एक खबर पढ़ी, क्लस्टर फीडिंग के कारण तीन दिन के बच्चे की मौत हो गयी. कुछ पल को मैं भी डर गयी कि क्या ब्रेस्टफीडिंग से भी किसी बच्चे की मौत हो सकती है! लेकिन फिर जब खबर को पूरा पढ़ा और उसके कारण जाने तब असल बात समझ आयी. पहले यह जान लेते हैं कि क्लस्टर फीडिंग क्या होता है?
एक लंबी-चौड़ी परिभाषा की जगह मैं कम शब्दों में बताती हूं कि जब एक हाल का जन्मा या कुछ महीनों का बच्चा जो मां का दूध पीता हो, वह अपने रेगुलर अंतराल को छोड़ कर जल्दी-जल्दी दूध पीने लगे, मसलन कोई बच्चा 2 घंटे के अंतराल से दूध पीता हो और अचानक किसी दिन वह 15-15 मिनट में या एक-एक घंटे में दूध मांगने लगे, तो उसे ‘क्लस्टर फीडिंग’ कहेंगे.
हाल के जन्मे बच्चे का तो यूं कोई समय फिक्स नहीं होता, उसकी फीडिंग ऑन डिमांड होती है. कहते हैं बच्चे दो बार सूसू कर लें, तो पेट खाली हो जाता है और फिर उन्हें फीड करना होता है. लेकिन यदि बच्चा मां को छोड़ ही नरहा हो या हर दो मिनट में दूध की मांग कर रहा हो, कई मांओं को लगता है कि वह अपने बच्चे के लिए पर्याप्त दूध नहीं बना पा रही है?
ऐसा ही कुछ उस महिला के साथ हुआ, जिसका तीन दिन का बच्चा डिहाइड्रेशन और कार्डियक अरेस्ट की वजह से दुनिया से चला गया. असल में पैदा होने के एक घंटे बाद से उसे अपनी मां का दूध मिलना शुरू हुआ.
लेकिन वह बच्चा लगातार 9 घंटे तक दूध की मांग करता रहा और मां उसकी मांग को पूरी करती रही. वह अपने बच्चे को डॉक्टर के पास भी ले गयी, लेकिन डॉक्टर्स वहां से उसे कुछ खास मदद नहीं मिल पायी. तब चूक कहां हुई? चूक हुई यह देखने में कि बच्चा कितनी बार सूसू कर रहा है.
बच्चा सो क्यों नहीं रहा. मेरे पिछले लेख में भी बताया था कि जन्म के बाद बच्चे इतना फैट लेकर आते हैं कि यदि उन्हें 48 घंटों यानी दो दिनों तक भी मां का दूध न मिल पाये, तो भी वह आसानी से सर्वाइव कर सकें. जन्म के बाद के कुछ दिनों में बच्चों का सूसू और पॉटी काउंट अधिक होता है. वे पल-पल में अपना पेट ख़ाली करते हैं.
उनका सूसू काउंट ही हमें बताता है कि बच्चे के पेट में पर्याप्त खाना पहुंच रहा है. बच्चा अगर एक घंटे में तीन बार सूसू कर रहा है, तो मतलब उसका पेट ठीक से भर रहा है. यही उस महिला से चूक हुई. उसने यह जांचने की कोशिश नहीं की कि उसका बच्चा लगातार रो क्यों रहा है, वह अपने डायपर गंदे क्यों नहीं कर रहा.
असल में बच्चे को पर्याप्त दूध नहीं मिल पा रहा था, लेकिन दूध की चाहत में उसका मुंह लगातार मेहनत कर रहा था. उसके शरीर की उर्जा खर्च तो हो रही थी, लेकिन वापस उतनी ही उर्जा उसे नहीं मिल पा रही थी, जिससे उसे डिहाइड्रेशन हो गया और अंत में कार्डियक अरेस्ट ने बच्चे की जान ले ली. इस स्थिति में उस मां को लगता है कि उसे अपने बच्चे को अपना दूध पिलाने की जगह बोतल दे देनी चाहिए थी. लेकिन सही मायनों में यह अच्छा उपाय नहीं है.
यदि आपको शंका है कि आपका दूध बच्चे के लिए पर्याप्त नहीं, तो आप उसके सूसू की काउंटिंग शुरू करें. देखें कि उसके सूसू करने का अंतराल क्या है. इसे पम्पिंग के ज़रिये भी जांच सकती हैं कि आप एक बार में लगभग कितने ml दूध निकाल पा रही हैं. यदि आप पर्याप्त दूध दे पा रही हैं, तो भी यदि बच्चा लगातार दूध की मांग कर रहा है, तो उसके दो कारण हो सकते हैं- या तो बच्चा ठीक से दूध पीने के लिए अपनी पकड़ नहीं बना पा रहा है.
या फिर कई बार ऐसा बच्चे शाम की खुराक में करते हैं जब वे रात को एक लंबी पारी की नींद लेना चाहते हैं, तो उससे पहले वे थोड़ी-थोड़ी देर में दूध मांग कर अपने लिए रातभर का पेट भर लेते हैं. ऐसे में परेशान न हों, यदि आप सबसे अंतिम केटेगरी में हैं, तो आपका बच्चा एक-दो दिन में अपने रूटीन में वापस आ जायेगा यानी फिर से 2-3 घंटे के अंतराल पर और आप कुछ समय की तसल्ली वापस पा सकेंगी.
ब्रेस्टफीडिंग के संबंधित कुछ प्रमुख बातें जान लें :
1) आप जैसे पानी पियेंगी, वैसे ही आपका दूध निकलेगा. यदि आप शांति से बैठ कर धीरे-धीरे पानी पियेंगी, तो आपके दूध का फ्लो भी उतना ही अच्छे से आयेगा. वहीं यदि आप एक सांस में गटगट करके पानी पिएंगी, तो आपके दूध का फ्लो उतना ही तेज़ी से बनेगा जिससे बच्चे को दूध पीने में परेशानी होगी. इसलिए तसल्ली से पानी पिएं.
2) अक्सर बुजुर्ग महिलाएं ऐसा कहती हैं कि बाल धोकर तुरंत बच्चे के सामने मत आओ या गीले बालों में उसे दूध मत पिलाओ, बच्चा बीमार हो जायेगा, पर ऐसा नहीं है. हां, यह ध्यान रखें कि आपके बालों से पानी न टपक रहा हो, क्योंकि पानी यदि बच्चे के ऊपर गिरेगा तो उसे परेशानी होगी. लेकिन यदि आपके बाल पूरी तरह सूखे नहीं हैं और आपका बच्चा दूध की मांग कर रहा है, तो उसे बेफिक्र होकर दूध पिलाएं.
3) अक्सर डॉक्टर और बड़े लोग कहते हैं कि बच्चे को एक तय समय अंतराल पर ही दूध पिलाना चाहिए, लेकिन सही तरीका यही है कि बच्चे को ‘ऑन डिमांड’ फीडिंग देनी चाहिए. विज्ञान कहता है कि कोई भी बच्चा अपनी भूख से अधिक दूध नहीं पीता, यदि उसका पेट भर हो, तो वह आपको छोड़ देगा. इसलिए बिना घड़ी देखे बच्चे को उसकी भूख के हिसाब से दूध पिलाएं.
4) खाना हमेशा तसल्ली से खाएं, अच्छे से चबा-चबा कर. यदि आप जल्दी-जल्दी खाना खा रही हैं, तो वह आपकी आंतों से ज्यादा मेहनत करवायेगा और बच्चे के लिए कम फ़ूड बनेगा. पुराने लोग कहते हैं कि जल्दी-जल्दी खाना खाने से बच्चे को दूध पीते समय ठसका भी लगता है. यह कथन मुझ पर लागू हो चुका है.
5) अब आखिरी, लेकिन सबसे ज़रूरी पॉइंट, जैसे दो बार सूसू करने से बच्चे का पेट खाली होता है, वैसे ही दो बार दूध पिलाने पर मां का पेट भी खाली हो जाता है, इसलिए आप भी अपने भोजन में ज्यादा गैप न रखें. कोशिश करें कि दो घंटे के अंतराल पर कुछ खा लें, आप स्वस्थ रहेंगी. समय पर खायेंगी तभी तो बच्चे के लिए स्वस्थ और पर्याप्त दूध बना पायेंगी.
-क्रमश:
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