कमर को मजबूत बनायेगा त्रिकोणासन
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :21 Sep 2017 2:27 PM (IST)
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कुछ आसनों का अभ्यास खड़े होकर किया जाता है. इन्हें कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है. जिन लोगों को दिन भर बैठे-बैठे कार्य करना पड़ता है, उनके लिए त्रिकोणासन बेहद फायदेमंद हैं. इससे रक्त संचरण में वृद्धि होती है. पीठ व गर्दन आदि के दर्द से छुटकारा मिलता है. ‘त्री’ शब्द का अर्थ […]
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कुछ आसनों का अभ्यास खड़े होकर किया जाता है. इन्हें कभी भी, कहीं भी किया जा सकता है. जिन लोगों को दिन
भर बैठे-बैठे कार्य करना पड़ता है, उनके लिए त्रिकोणासन बेहद फायदेमंद हैं. इससे रक्त संचरण में वृद्धि होती है. पीठ व गर्दन आदि के दर्द से छुटकारा मिलता है.
‘त्री’ शब्द का अर्थ है तीन. यानी आसन करते समय शरीर में त्रिकोण का बनना. यह आसन में एक साथ तीन स्थानों पर खिंचाव पैदा करता है. इसकी कुल पांच विधियां हैं.
पहली विधि : दोनों पैरों के बीच एक मीटर की दूरी बना खड़े हो जाएं. दाहिने पंजे को दायीं तरफ घुमा कर रखें. अब भुजाओं को बगल में फैलाएं और उन्हें कंधों के बराबर उठा लें, जिससे कि वे एक सीध में हों. धीरे से दाहिनी ओर झुकें, पर शरीर को आगे की ओर न झुकाएं. दाहिने घुटने को थोड़ा मोड़ें.
दोनों हाथों को सीधी लाइन में रखते हुए दाहिने हाथ को दाहिने पंजे पर रखने का प्रयास करें. बायीं हथेली को सामने की ओर घुमाएं और अंतिम स्थिति में बायें हाथ की ओर देखें. अब दोनों हाथों को एक सीध में रखते हुए वापस खड़े हो जाएं. इस अभ्यास की पुनरावृत्ति दूसरी ओर भी करें. यह एक चक्र हुआ.
दूसरी विधि : पहले मूल अभ्यास को दुहराएं. अंतिम स्थिति में ऊपर उठे हाथ को सीधा खड़ा रखने के बजाय, नीचे लाकर कान से स्पर्श कराएं. अब बायें हाथ की ओर देखें और धीरे-धीरे प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं. बायीं तरफ से पुनरावृत्ति करें. हाथों को ऊपर उठाते समय सांस अंदर लें और झुकते समय बाहर छोड़ें.
तीसरी विधि : पैरों में दूरी बनाकर खड़े हो जाएं. दोनों हथेलियों को कमर पर रखें. चेहरा सामने की तरफ रखें. पैरों, भुजाओं, धड़ तथा सिर को सीधा रखने का प्रयास करें. दाहिने हाथ को नितंब व पैर के ऊपर से नीचे पैर के पंजों की ओर सरकाते हुए दाहिनी ओर झुकें. बायें हाथ को ऊपर कांख की ओर सरकाएं. दाहिने हाथ से दाहिने पांव को स्पर्श करने का प्रयास करें. यह अंतिम स्थिति है. अब इसी तरह शरीर को बायीं तरफ झुकाएं.
चौथी विधि : पैरों में दूरी बनाकर खड़े हो जाएं. दोनों हाथों को पीठ के पीछे ले जाएं. दायें हाथ की कलाई को बायीं हाथ से पकड़ें. अब नितंबों को दाहिनी ओर घुमाते हुए दाहिनी ओर झुकें और दाहिने घुटने से नाक को सटाने की कोशिश करें. यदि परेशानी हो, तो घुटने को थोड़ा-सा मोड़ लें. दो सेकेंड तक रुकें और वापस खड़े हो जाएं. यही क्रिया बायीं ओर भी दोहराएं. प्रारंभिक स्थिति में गहरी सांस लें और झुकते समय सांस छोड़ें.
पांचवीं विधि : दोनों पैरों को फैलाकर खड़े हो जाएं. हाथों को जमीन के समानांतर फैला लें. कमर से शरीर को झुकाने की कोशिश करें, जिससे सिर, धड़ व भुजाएं एक क्षैतिज धरातल में आ जायें. धड़ को दाहिनी ओर मोड़ें और दाहिनें पांव को बायें हाथ से छूने की कोशिश करें. दाहिना हाथ ऊपर की ओर हो, फिर सीधा हो जाएं और यही क्रिया दाहिने हाथ से बायें पैर को छूते हुए करें. यह एक चक्र होगा. ऐसे 4-5 पांच चक्र करें.
क्रम : त्रिकोणासन में पूर्ण वर्णित पांच शारीरिक गतिविधियों को पूर्व वर्णित क्रम में एक के बाद एक करना ज्यादा श्रेयस्कर है.
सीमाएं : पीठ की समस्या से ग्रस्त लोगों को यह अभ्यास नहीं करना चाहिए.
लाभ : त्रिकोणासन की समस्त गतिविधियों से कमर के ऊपरी हिस्से में विशेष प्रभाव पड़ता है. संपूर्ण स्नायु प्रणाली की दक्षता और स्वास्थ्य में वृद्धि होती है, विशेष रूप से मेरुदंड की. इसके अलावे यह शरीर के समस्त मांसपेशियों तथा जोड़ों को लचीला बनाता है. इससे शरीर पुन: शक्तिशाली बनता है.
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