Which Animal Meat To Eat Rain Season: बारिश के मौसम में किस जानवर का मांस खाना चाहिए? सुअर, बकरे या भैंस

Which Animal Meat To Eat Rain Season
Which Animal Meat To Eat Rain Season: बारिश के मौसम में किस प्रकार के मांस का सेवन करना चाहिए? आइए जानते हैं विस्तार से…
Which Animal Meat To Eat Rain Season: बारिश के मौसम में किस प्रकार का मांस खाना चाहिए? कौन सा मांस खाने से बारिश के मौसम में शरीर को फायदा मिलेगा? अगर आपके मन में ऐसे सवाल हैं तो ये खबर आपके लिए उपयोगी है. आयुर्वेद के प्रसिद्ध भारतीय ग्रंथ चरक संहिता, पाक दर्पणम, योग रत्नाकर और सुश्रुत संहिता में क्या बताया गया है? आइए जानते हैं.
बारिश में आदमी का शरीर कैसा हो जाता है? (Rain Season)
आदान-दुर्बले देहे पक्ता भवति दुर्बलः.
स वर्षास्वनिलादीनां दूषणैर्बोध्यते पुनः ॥33॥
भू-बाष्पान्मेघनिस्यन्दात् पाकादम्लाज्जलस्य च.
वर्षास्वग्निबले क्षीणे कुष्यन्ति पवनादयः ॥34॥
तस्मात् साधारणः सर्वो विधिर्वर्षासु शश्यते.
उदमन्थं दिवास्वप्नमवश्यायं नदीजलम् ॥35॥
व्यायाममातपं चैव व्यवायं चात्र वर्जयेत्.
पानभोजनसंस्कारान् प्रायः क्षौद्रान्वितान् भजेत् ॥36 ..
व्यक्ताम्ललवणस्नेहं वातवर्षाकुलेऽहनि.
विशेषशीते भोक्तव्यं वर्षास्वनिलशान्तये ॥37॥
अग्निसंरक्षणवता यवगोधूमशालयः.
पुराणा जांगलेर्मासेर्भोज्या यूपेश्च संस्कृतैः॥ 38 ॥
पिबेत् क्षौद्रान्वितं चाल्पं माध्वीकारिष्टमम्बु वा.
माहेन्द्रं तप्तशीतं वा कोपं सारसमेव वा ॥39॥
प्रघर्षोद्वर्तन-स्नान- गन्ध-माल्यपरो भवेत् .
लघुशुद्धाम्बरः स्थानं भजेदक्लेदि वार्षिकम् ||40||
आयुर्वेद के अनुसार बारिश के मौसम में शरीर की पाचन शक्ति, जिसे “अग्नि” कहा गया है, कमजोर हो जाती है. प्राचीन ग्रंथों के अनुसार भूमि की गर्मी, वर्षा का जल, बादलों की गड़गड़ाहट और वातावरण में भाप की वजह से वात, पित्त और कफ तीनों दोष कुपित हो जाते हैं. इसलिए संस्कृत श्लोक में कहा गया है
“भू-बाष्पान्मेघनिस्यन्दात् पाकादम्लाज्जलस्य च.
वर्षास्वग्निबले क्षीणे कुष्यन्ति पवनादयः॥”
यानी भूमि से निकली भाप, अम्लयुक्त बारिश यानी जल और कमजोर अग्नि के कारण तीनों दोष बिगड़ते हैं. इसलिए इस मौसम में साधारण जीवनशैली अपनाने की सलाह दी गई है.
बारिश के मौसम में कौन सा मांस खाएं? (Which Animal Meat To Eat Rain Season)
“लवणस्याब्धिजातानां मत्स्यानां कुक्कुटस्य च.
आमिषं परमं पथ्यं वर्षर्ती शीतवारणम्॥”
बारिश के मौसम में अगर मांसाहार की बात करें तो “नल चरित” में कहा गया है कि समुद्री मछली और मुर्गे का मांस लाभदायक होता है. बारिश के इस मौसम में पुराने चावल, गेहूं, जंगली जानवरों का मांस, यूष (सूप), शहद पीना चाहिए. खबर में दी गई जानकारी और संस्कृत के श्लोक मांसौषधि नामक किताब से ली गई है. इसके लेखक सत्येन्द्र पीएस हैं.
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लेखक के बारे में
By Aman Kumar Pandey
अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।
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