Patna News: वेलेंटाइन डे आज, पहले दोस्त फिर बने अच्छे हमसफर, जानते हैं कुछ ऐसे कपल्स की कहानी

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 14 Feb 2025 4:35 AM

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Patna News: आज वेलेंटाइन डे है. वेलेंटाइन डे यानी प्यार, विश्वास, सहयोग और समर्पण का खास दिन. प्यार किसी एक दिन का मोहताज नहीं होता है, लेकिन वेलेंटाइन डे का इंतजार हर कपल को रहता है.

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Patna News: जीवन में एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा, तो ज्यादातर कपल्स करते हैं लेकिन समाज में कुछ ऐसे भी उदाहरण हैं, जो अपने प्यार का इजहार अपने पार्टनर को करियर में सहयोग कर करते हैं. एक-दुसरे की हिम्मत बनते हैं और सपोर्ट करते हैं. इजहार-ए-इश्क के इस खास मौके पर पढ़िए ऐसे कपल्स की कहानी, जिन्होंने एक-दूसरे को सहयोग कर अपने करियर को नयी दिशा दी और खास मुकाम हासिल किया.

इश्क के जज्बात. एक-दूसरे को दिया करियर बनाने में साथ

प्रतिभा व रवि गुप्ता

हर परिस्थितियों में हमने दिया एक-दूसरे का साथ

प्रतिभा व रवि गुप्ता

जक्कनपुर के रहने वाले दंपति प्रतिभा कुमारी और रवि कुमार गुप्ता की शादी के तीन साल पूरे हो गये हैं. प्रतिभा कहती हैं, जब मेरी सगाई हुई थी, तब रवि जॉब की तैयारी कर रहे थे. सगाई के बाद हमारे बीच बात शुरू हो गयी थी. जॉब नहीं मिलने की वजह से रवि काफी परेशान थे और उन्हें लग रहा था कि शादी के बाद जिम्मेदारियां बढ़ेंगी और बिना नौकरी इन जिम्मेदारियों को संभालना आसान नहीं होगा. उस वक्त मैंने उनसे यह कहा था कि हर परिस्थिति में हम दोनों मिलकर काम करेंगे और परेशानियों को दूर करेंगे. हालांकि मैं लकी रही कि रवि की नौकरी हमारे शादी के तुरंत बाद हो गयी और उनका चयन झारखंड मिल्क फेडरेशन में एग्जीक्यूटिव के पद पर हुई. नौकरी के लिए उन्हें यहां से जाना पड़ा और मैं यहीं रही. परिवार के साथ. इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के पास आते-जाते रहे जब तक चीजे सेट नहीं हो गयीं.

डॉ शिप्रा सोनी व नीरज

जब परिवार सपोर्टिव हो, तो आप कुछ भी कर सकती हैं

डॉ शिप्रा सोनी व नीरज

कृष्णा अपार्टमेंट के रहने वाली डॉ शिप्रा सोनी व उनके पति नीरज की शादी के 21 साल पूरे हो चुके हैं. शिप्रा कहती हैं, मैं बहुत लकी हूं कि मेरे पति और उनके घरवाले काफी सपोर्टिव हैं. शादी के समय मैं ग्रेजुएट थी और पति दिल्ली में प्राइवेट जॉब में कार्यरत थे. एक साल तक तो मैं घर पर ही रही लेकिन इसके बाद पति ने कहा कि एकेडमिक में इतने अच्छे अंक है, तुम अपनी पढ़ाई जारी रखो. उन्होंने मुझे इसके लिए मोटिवेट किया और मैंने 2005 में पीजी में दाखिला ले लिया. सास ने भी पूरा सहयोग किया और किचन की जिम्मेदारी संभाल ली. सभी के सहयोग से मैंने सीटेट निकाला, पीएचडी पूरी की, अभी पोस्ट डॉक्टरल फैकल्टी के तौर पर पीयू में पढ़ा रही हूं. परिवार और करियर के बीच बैलेंस करना आसान नहीं होता है, लेकिन अगर आपको सपोर्ट करने वाला परिवार मिल जाये तो आप हर चुनौती को पार लेती हैं. आज मेरे बच्चे और मेरे पूरे परिवार को मुझ पर गर्व है.

सचिन व ऋचा

मेरी पत्नी की रेसिपी ने दिया बिजनेस का आइडिया

सचिन व ऋचा

पाटलिपुत्र कॉलोनी के रहने वाले सचिन कुमार और ऋचा की अरेंज मैरेज 2009 में हुई थी. सचिन कहते हैं, 2008 में मैं मुंबई से अपनी नौकरी छोड़कर अपने घर मधुबनी आ गया. पर, मेरे माता-पिता व रिश्तेदार इस निर्णय से खुश नहीं थे. उसी वक्त ऋचा से मेरी शादी की बात चल रही थी, तो मेरी उनसे एक छोटी से मुलाकात हुई थी. तब मैंने उन्हें बताया था कि मैं नौकरी छोड़ चुका हूं और खुद का बिजनेस सेट करना चाहता हूं, इसमें आपको कोई प्रॉब्लम तो नहीं है ? हालांकि उन्होंने मेरा साथ दिया और 2009 में मेरी शादी हो गयी. एक दिन एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस के सिलसिले में नेपाल जाना हुआ, तो जाने से पहले ऋचा ने खुद से बनाया सत्तू देते हुए कहा कि सिर्फ पानी मिलाकर पी लेना है. इससे मुझे आइडिया मिला और फिर हम दोनों ने मिलकर स्टार्टअप की नींव रखी. आज यह प्रोडक्ट उसकी मेहनत का नतीजा है. उसके साथ बिना यह सफर कभी पूरा नहीं हो पाता.

विक्रम राज व वीणा

हमने मिलकर परिवार की जिम्मेदारियों को निभाया

विक्रम राज व वीणा

शिवपुरी के रहने वाले विक्रम राज और वीणा पिछले 19 साल से एक-दूसरे की सफलता और असफलता के साक्षी रहे हैं. विक्रम कहते हैं, जब मैं एमबीए की पढ़ाई कर रहा था उसी दौरान मेरी शादी की बात वीणा से चल रही थी. उस वक्त वीणा प्राइवेट स्कूल में शिक्षिका थी. शादी के बाद वीणा ने लगातार मुझे प्रेरित किया और हर सहयोग दिया, जिससे मैंने अपनी पढ़ाई पूरी की नौकरी लिया. कुछ महीनों के बाद जब नौकरी लगी, तो इसका पैकेज बहुत अच्छा नहीं था. बावजूद इसके दोनों ने मिलकर घर संभाला. जॉब, घर और परिवार की जिम्मेदारियां वीणा से बखूबी निभायी. अगर हमारे बीच कभी कुछ मतभेद भी होता, तो वह तुरंत बात कर उसे सुलझाने लगती थी. दो साल के लंबे स्ट्रगल के बाद मुझे मेरी नौकरी में एक बेहतर मुकाम हासिल हुआ जिसके बाद वीणा ने नौकरी छोड़ कर बेबी का ख्याल रखना शुरू किया. हम दोनों एक-दूसरे के मोरल सपोर्ट बन कर हर चुनौती को पार की और इसकी वजह से पहले हम दोस्त और फिर अच्छे हमसफर बनें.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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