अगर देखना है हिमालय की बर्फ आच्छादित चोटियां, तो जरूर जाएं उत्तरकाशी में हिल स्टेशन बरकोट
Published by : Shaurya Punj Updated At : 07 Aug 2023 7:30 AM
बरकोट समुद्र तल से 1220 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां से हिमालय की बर्फ आच्छादित चोटियां दिखतीं हैं जिन पर जब सूर्य की किरणें पड़तीं हैं तो लगता है स्वर्ण जड़ित ताज पहन कर पर्वत अपनी शोभा बिखेर रहे हैं.
लेखिका-कविता विकास
बरकोट समुद्र तल से 1220 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां से हिमालय की बर्फ आच्छादित चोटियां दिखतीं हैं जिन पर जब सूर्य की किरणें पड़तीं हैं तो लगता है स्वर्ण जड़ित ताज पहन कर पर्वत अपनी शोभा बिखेर रहे हैं.
यात्रा का जुनून हो और साथ जाने वालों में बुजुर्ग और किशोर भी हों तो एक ऐसी मंजिल का चुनाव सही है, जिसमें प्राकृतिक सौंदर्य के साथ ज्यादा ऊंचाई न हो. ऐसा ही एक पर्वतीय स्थल है बरकोट. हमारे पांच सदस्यों के परिवार समूह ने उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के बरकोट हिल स्टेशन का जब चुनाव किया, तब हमें भी इसके बारे में बहुत पता नहीं था. बस इतना ही जानते थे, कि यमुनोत्री और गंगोत्री के लिए यहां से रास्ते अलग होते हैं.
जून के अंतिम सप्ताह में ऋषिकेश से हमने बरकोट की यात्रा की. रास्ते भर खूबसूरत पहाड़ी पेड़ बुरांश के जंगल मिलते गए. चीड़, देवदार और फर आदि के खूबसूरत जंगल तो थे ही. यह मौसम बारिश का था, रास्ते में उमड़ते-घुमड़ते बादल भी मिलते रहे और कभी-कभी हल्की फुहारें भी. यूं भी पहाड़ों में कब बारिश आ जाए, कहा नहीं जा सकता.
लेकिन यह नजारा तो अद्भुत था, बिलकुल हाथ से छू लेने वाली नजदीकी पहाड़ी पर काले-काले धुएं का फैल जाना फिर बरस कर संतृप्त हो जाना और तुरंत झिलमिलाती रोशनियों वाले सूर्य का उग जाना. हमें पता नहीं था कि ठंड कैसी होगी, लेकिन एक चाय के ढाबे पर चाय-पकौड़ियों के लिए रुकना पड़ा और तभी मोटे ऊनी कपड़े भी निकालने पड़े. थोड़ी देर रुकने के बाद फिर यात्रा आरंभ हुई. ड्राइवर ने बताया कि शाम तीन-चार बजे तक बरकोट पहुंच जाना है.
पहाड़ी रास्तों पर यूं भी अंधेरा घिरने के पहले गंतव्य तक पहुंचना ठीक रहता है. पहाड़ी रास्तों के फिसलन और भूस्खलन की तमाम वजहों के बावजूद ईश्वर की कृपा रही कि हम बरकोट पहुंच गए. बरकोट समुद्र तल से 1220 मीटर की ऊंचाई पर बसा है. यहां से हिमालय की बर्फ आच्छादित चोटियां दिखतीं हैं जिन पर जब सूर्य की किरणें पड़तीं हैं तो लगता है स्वर्ण जड़ित ताज पहन कर पर्वत अपनी शोभा बिखेर रहे हैं.
यहां से बंदरपूंछ श्रेणी सबसे निकट है. कहा जाता है कि महाभारत की लड़ाई के पहले जब भीम को अपने महाबलशाली होने पर घमंड हो गया था, तो हनुमान जी ने उनके इस घमंड को तोड़ने का एक उपाय किया. वह जब फूल ले कर लौट रहे थे, हनुमान जी ने अपनी पूंछ से उनका रास्ता रोक दिया. भीम ने साधारण पूंछ समझ कर उसे एक हाथ से हटाने की कोशिश की, लेकिन लाख प्रयास करके भी उस पूंछ को वह नहीं हटा पाए. उन्हें यह अहसास हो गया कि वह कोई साधारण पूंछ नहीं है, तब उनके आग्रह पर हनुमान जी ने अपने को प्रकट किया और भीम को अपने महाबलशाली होने का घमंड चूर होता है.
यह सुंदर छोटा-सा शहर उत्तरकाशी का एक रमणीक स्थल है, यमुना नदी के तट पर बसा हुआ. यहीं से यमुनोत्री और गंगोत्री के लिए सड़कें अलग होती हैं. हमें जिस होटल में ठहरना था, वहां से ठीक सामने बंदरपूंछ पर्वत था और नीचे वेगवती यमुना. गजब का आकर्षण था. तिकोने पत्ते वाले पेड़ों से घिरा यह रमणीक स्थल यमुनोत्री का मुख्य मार्ग होते हुए भी बहुत ज्यादा भीड़ से बचा हुआ है. इसी कारणवश यहां की सुंदरता अभी तक नैसर्गिक है. जनसंख्या भी कम है. दूसरे दिन हमने बारकोट के स्थानीय मंदिर जिनसे जुड़ी अनेक पौराणिक कहानियां हैं, उनका दर्शन किया. गांव के रास्ते से होकर यमुना जी के दर्शन किए. छू कर, नहा कर समीप बने शिव मंदिर में पूजा-अर्चना भी की. यह स्थान मुख्य यमुनोत्री धाम का छोटा रूप है.
यमुना को उसके अल्हड़ रूप में देखना जहां आह्लादित कर रहा था, वहीं उसका वेग डर भी पैदा कर रहा था. गांव वालों ने एक सीमा रेखा बना रखी थी, जिसके बाद पानी में जाना मना था. दोनों तरफ खड़ी पहाड़ियों के बीच से यमुना की धारा तेज आवाज करती डरावनी भी लग रही थी. हमने वहां ट्रेकिंग के लिए नामी स्थलों को भी देखा और अनेक पहाड़ी फलों का आस्वादन किया जिनमें खुबानी बहुत प्रसिद्ध है. यहां बहुत सैलानी आते हैं. कुछ तो स्वास्थ्य लाभ के लिए भी और कुछ चार धाम की यात्रा के बाद थकान मिटाने के लिए भी. यहां देहरादून या ऋषिकेश से सड़क के रास्ते आराम से पहुंचा जा सकता है.
कैसे पहुंचें
बरकोट का नजदीकी स्टेशन ऋषिकेश और देहरादून है. वहां से और उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से बस और टैक्सी चलती हैं.
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लेखक के बारे में
By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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