खुश रहना है? तो ओशो के इन 3 फार्मूले को जिंदगी में जरूर करें शामिल, टेंशन मुक्त रहेंगे हमेशा
Published by : Sameer Oraon Updated At : 12 Jul 2025 7:30 PM
Pic Credit- Freeoik
Osho Quotes: अगर आप सच्चे अर्थों में खुश रहना चाहते हैं तो ओशो के ये 3 नियम अपनाएं. जानें स्वीकृति, जागरूकता और प्रेम का जीवन में क्या महत्व है.
Osho Quotes: इस दुनिया में अगर इंसान किसी चीज की चाह में भाग रहा है तो वह है खुशहाल जीवन. क्योंकि बढ़ते मानसिक तनाव और तेज रफ्तार वाली जिंदगी में लोग इसी की तलाश भाग रहे हैं. लेकिन हर कुछ रहते हुए भी वह खुश नहीं है. क्योंकि उन्हें इसका फार्मूला नहीं पता है. लेकिन हजारों साल पहले आध्यात्मिक गुरु ओशो ने जीवन जीने का तरीका बता दिया था. अगर हम उनके बताए गये दिशा में से तीन चीजों को आत्मसात कर लिये तो उसे खुश रहने से कोई नहीं रोक सकता है. ओशो का मानना था कि खुशी किसी उद्देश्य या मंजिल में नहीं, बल्कि जीवन के हर पल को जागरूकता के साथ जीने में है. उनके अनुसार खुशहाल जीवन के लिए हमें केवल तीन मूल नियमों को अपनाने की जरूरत है. आइए जानते हैं वो क्या है.
स्वीकारना सीखें
जिंदगी में अपने आपको वैसा ही स्वीकार करना चाहिए जैसे वह है. क्योंकि ओशो का कहना था कि इंसान को जिंदगी बदलने से पहले उसे स्वीकारना सीखवा चाहिए. जब वह किसी चीज से संघर्ष करते है, तो और अधिक मजबूत बन जाता है. ओशो का कहना था कि कई बार हम जीवन की स्थितियों को बदलने की कोशिश में दुखी रहते हैं. लेकिन अगर हम लोगों, परिस्थितियों और खुद को जैसा हैं, वैसे ही स्वीकार करना सीख लें तो अंदर से तनाव कम होने लगता है. यही स्वीकृति अंत में परिवर्तन की राह भी खोलती है. इसलिए जैसा है, उसे बिना शर्त स्वीकार कर लेना ही आंतरिक शांति की शुरुआत है.
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हर पल को पूरी तरह जीने में ही खुशी है
ओशो ने इंसान को जागने के लिए कहा है. उनका तर्क था कि जो सुंदरता है, वह इसी क्षण में है.” उनका सपष्ट मत था कि पिछले कल का पछतावा और आने वाले कल की चिंता दोनों ही दुख का कारण हैं. जो व्यक्ति वर्तमान को पूरी जागरूकता के साथ जीता है, वही असली अर्थ में जीवित होता है. जब आप खाना खा रहे हों, तब केवल खाना खाइए. जब चल रहे हों, तब चलने में ही ध्यान दें.
बिना शर्त प्रेम करो, अपेक्षा नहीं
ओशो कहते हैं कि “प्रेम कोई व्यापार नहीं, बल्कि एक सौंदर्य है जो बिना शर्त बहता है.” हम अक्सर प्रेम में कुछ पाने की अपेक्षा करते हैं. लेकिन जहां अपेक्षा होती है, वहां स्वार्थ आता है और प्रेम समाप्त होने लगता है. उनका मानना था कि प्रेम त्याग नहीं, बल्कि पूर्णता की भावना है, जिसमें आप केवल देना जानते हैं. इसलिए सच्चा प्रेम वह है जो स्वतंत्रता देता है, न कि बंधन बनाता है.
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समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
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