किलकारी-आजादी के गुमनाम सिपाहियों की सुनायी गयीं कहानियां

शुक्रवार देश की आजादी के गुमनाम सिपाही और बच्चों की ओर से रचित मौलिक कहानियों की प्रस्तुति हुई.
संवाददाता, पटना किलकारी में चल रही सृजनात्मक लेखन कार्यशाला का चौथा दिन बच्चों की कल्पनाशीलता और ऐतिहासिक बोध के नाम रहा. शुक्रवार देश की आजादी के गुमनाम सिपाही और बच्चों की ओर से रचित मौलिक कहानियों की प्रस्तुति हुई. दिन के प्रथम सत्र में सुप्रसिद्ध लेखिका नासिरा शर्मा की पुस्तक आजादी के गुमनाम सिपाही का पाठ किया गया. बच्चों ने पीर अली और बतख मियां जैसे महान क्रांतिकारियों की वीरगाथाओं का वाचन कर उन्हें नमन किया. इस सत्र का मुख्य उद्देश्य नयी पीढ़ी को उन नायकों से परिचित कराना था, जिनका योगदान अतुलनीय होने के बावजूद इतिहास के मुख्य पन्नों में सीमित रहा. दूसरे सत्र में कहानी पाठ और समीक्षात्मक विमर्श का आयोजन हुआ. बच्चों ने अपनी स्वरचित कहानियों को प्रस्तुत किया, जिसमें जीव-जंतुओं के माध्यम से संवाद और कल्पनाशीलता का अनूठा संगम दिखा. विशेषज्ञों ने समीक्षा के दौरान पाया कि बच्चों के निजी अनुभवों पर आधारित कहानियों में संवेदना अधिक गहरी थी. कुछ बच्चों ने दास्तानगोई शैली में अपनी प्रस्तुति देकर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया. उनकी रचनाओं में बाल मनोविज्ञान और समाज के प्रति एक विशेष दृष्टि उभर कर सामने आयी.
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