डेंगू से बचना है तो अपनाएं सजगता और स्वच्छता, गुमला के लोगों से सीएस की अपील 

Edited by Sweta Vaidya
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जानकारी देते हुए डॉक्टर

Gumla News: बारिश के मौसम में डेंगू के बढ़ते खतरे को देखते हुए गुमला के सिविल सर्जन डॉ शंभूनाथ चौधरी ने जिलेवासियों से सतर्क रहने और स्वच्छता अपनाने की अपील की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें. 

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Gumla News: झारखंड के गुमला जिले के सिविल सर्जन डॉ शंभूनाथ चौधरी ने जिले के नागरिकों को डेंगू से सुरक्षित रहने और इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए मुख्य रूप से ‘सजगता और स्वच्छता’ की सलाह दी. बारिश के मौसम में डेंगू से बचाव जरूरी है. डॉ चौधरी ने कहा है कि डेंगू फैलाने वाला ‘एडीज’ मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में पनपता है और ज्यादातर दिन के समय काटता है. 

मच्छरों के काटने से बचाव जरूरी 

डॉ. चौधरी ने कहा कि मच्छरों के पनपने की जगहों को नष्ट करें, हर रविवार कूलर साफ करें, गमले, पुराने टायर, टूटे फूटे बर्तनों और छतों पर कबाड़ में पानी जमा न होने दें. पानी के बर्तनों को ढक कर रखें. गड्ढों और नालियों की सफाई करें और खुद को मच्छरों के काटने से बचाएं. डेंगू के मच्छर दिन के उजाले (विशेषकर सुबह और शाम को) में ज्यादा सक्रिय होते हैं. इसलिए शरीर को पूरी तरह से ढकने वाले हल्के रंग के कपड़े (फुल स्लीव शर्ट और फुल पैंट) पहनें. दिन में सोते समय भी मच्छरदानी का इस्तेमाल करें. घर से बाहर निकलते समय या घर के अंदर भी मच्छर भगाने वाली क्रीम, स्प्रे या लिक्विड का इस्तेमाल करें.

अस्पताल में डेंगू की जांच की व्यवस्था है

डॉ चौधरी ने कहा है कि डेंगू के लक्षणों को पहचानें. अगर आपको या परिवार में किसी को अचानक तेज बुखार, सिर में तेज दर्द और आंखों के पीछे दर्द होना, जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, जी मिचलाना या उल्टी होना, त्वचा पर लाल चकत्ते उभर आए तो उसे हल्के में ना लें. सीएस ने विशेष चेतावनी देते हुए बताया कि बुखार होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं बिल्कुल न लें. ये दवाएं शरीर में प्लेटलेट्स कम होने की स्थिति में ब्लीडिंग (रक्तस्राव) का खतरा बढ़ा सकती हैं. बुखार होने पर केवल पैरासिटामोल लें और तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या सदर अस्पताल गुमला में संपर्क करें. उन्होंने कहा है कि अगर मरीज में लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या सांस लेने में तकलीफ होना, मल का रंग काला होना गंभीर डेंगू के संकेत है. उन्होंने आम लोगों को कहा है कि घबराएं नहीं, बल्कि सतर्क रहें. सदर अस्पताल और स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच और इलाज की पूरी व्यवस्था मौजूद है.

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श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो. झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.

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