नालंदा में धान उत्पादन को बढ़ावा, कृषि विभाग की बड़ी तैयारी, खरीफ सीजन में रिकॉर्ड उत्पादन का लक्ष्य
प्रतीकात्मक तस्वीर
Bihar Sharif News : कृषि विभाग ने धान उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए खरीफ सीजन की व्यापक कार्ययोजना तैयार की है. सामान्य मानसून और समय पर कृषि इनपुट उपलब्ध होने पर जिले में खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद जताई गई है.
बिहारशरीफ से कंचन कुमार की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा कृषि विभाग ने खरीफ 2026 सीजन के लिए जिले में कुल 1,53,326.48 हेक्टेयर क्षेत्र में विभिन्न फसलों की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है. विभाग ने इस वर्ष धान उत्पादन को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए 1,47,072.96 हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य तय किया है. इसके अलावा मक्का, अरहर, मूंग, उड़द, ढैंचा, तिल, सूरजमुखी और अन्य दलहनी-तिलहनी फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की रणनीति तैयार की गई है. कृषि विभाग का मानना है कि सामान्य मानसून और समय पर कृषि इनपुट उपलब्ध होने पर जिले में खाद्यान्न उत्पादन का नया रिकॉर्ड बन सकता है.
इस्लामपुर, हरनौत और हिलसा में सबसे अधिक धान की खेती
धान उत्पादन के मामले में इस्लामपुर प्रखंड जिले में सबसे आगे रहेगा, जहां 15,040 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा गया है. इसके बाद हरनौत में 12,123 हेक्टेयर, हिलसा में 11,565 हेक्टेयर, बिहारशरीफ में 9,392 हेक्टेयर तथा नूरसराय में 9,354 हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती की योजना बनाई गई है. कृषि अधिकारियों का कहना है कि इन क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं बेहतर होने और किसानों की धान उत्पादन में रुचि के कारण बड़े पैमाने पर खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
मक्का उत्पादन में चंडी, रहुई और सिलाव आगे
जिले में मक्का की खेती के लिए 1,899.42 हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. रहुई में 283.5 हेक्टेयर, चंडी में 270 हेक्टेयर, सिलाव में 230 हेक्टेयर, अस्थावां में 193 हेक्टेयर तथा गिरियक में 167 हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती होगी. कृषि विभाग किसानों को उन्नत किस्म के बीज, तकनीकी मार्गदर्शन और आवश्यक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी कर रहा है ताकि उत्पादन और उत्पादकता दोनों में वृद्धि हो सके.
अरहर समेत दलहनी फसलों पर विशेष जोर
दलहनी फसलों के विस्तार को लेकर भी विभाग गंभीर है. जिले में अरहर की खेती के लिए 1,428.96 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा गया है. अस्थावां, बिहारशरीफ, रहुई, गिरियक और इस्लामपुर में अरहर का सर्वाधिक रकबा निर्धारित किया गया है. इसके अलावा मूंग की खेती 91.54 हेक्टेयर तथा उड़द की खेती 90.55 हेक्टेयर क्षेत्र में की जाएगी. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि दलहनी फसलें न केवल किसानों की आय बढ़ाती हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
ढैंचा की खेती से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता
हरित खाद और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जिले में 1,486.77 हेक्टेयर क्षेत्र में ढैंचा की खेती का लक्ष्य रखा गया है. नूरसराय में 285 हेक्टेयर, सिलाव में 225 हेक्टेयर, हिलसा में 141.5 हेक्टेयर और एकंगरसराय में 127.6 हेक्टेयर क्षेत्र में ढैंचा बोया जाएगा. कृषि विभाग का मानना है कि ढैंचा की खेती से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी और रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी.
तिलहनी फसलों को भी मिलेगा बढ़ावा
जिले में तिल की खेती के लिए 90.33 हेक्टेयर, सूरजमुखी के लिए 11.3 हेक्टेयर तथा सोयाबीन के लिए 6.16 हेक्टेयर क्षेत्र निर्धारित किया गया है. रहुई, सिलाव, गिरियक और अस्थावां में तिल की खेती को विशेष रूप से बढ़ावा दिया जाएगा. कृषि विभाग का लक्ष्य है कि तिलहनी फसलों का उत्पादन बढ़ाकर किसानों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर उपलब्ध कराए जाएं और खाद्य तेलों के स्थानीय उत्पादन में वृद्धि हो.
बीज, उर्वरक और तकनीकी सहायता की तैयारी पूरी
कृषि विभाग ने खरीफ सीजन को सफल बनाने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी हैं. किसानों को समय पर प्रमाणित बीज, उर्वरक और तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के लिए प्रखंड स्तर पर निगरानी रखी जा रही है. विभागीय अधिकारियों के अनुसार खेती के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किसान चौपाल, प्रशिक्षण कार्यक्रम और कृषि जागरूकता अभियान भी चलाए जाएंगे. विभाग को उम्मीद है कि बेहतर मौसम और आधुनिक कृषि तकनीकों के सहारे नालंदा जिला इस वर्ष कृषि उत्पादन में नई उपलब्धियां हासिल करेगा.
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