Mamta Child Factory Movie Review: सरोगेसी जैसे गंभीर विषय को सरल और असरदार अंदाज में दिखाती ‘ममता चाइल्ड फैक्ट्री’

ममता चाइल्ड फैक्ट्री का रिव्यू, फोटो- इंस्टाग्राम
‘ममता चाइल्ड फैक्ट्री’ एक छोटे शहर की कहानी है, जो सरोगेसी जैसे संवेदनशील विषय को आसान और मनोरंजक अंदाज में दिखाती है. दमदार अभिनय और सरल निर्देशन के साथ यह फिल्म बिना उपदेश दिए समाज की सच्चाई सामने रखती है और दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है.
कलाकार: प्रथमेश परब, अंकिता लांडे, पृथ्वीक प्रताप, गणेश यादव
निर्देशक: मोहसिन खान
निर्माता: डेविड नाडर
बैनर: लूसिया एंटरटेनमेंट
अवधि: 2 घंटे 5 मिनट
भाषा: हिंदी
ओटीटी प्लेटफॉर्म: अल्ट्रा प्ले
रेटिंग: ⭐⭐⭐ 1/2
सरोगेसी जैसे नाज़ुक और संवेदनशील मुद्दे पर निर्देशक मोहसिन खान की फिल्म ‘ममता चाइल्ड फैक्ट्री’ वाकई एक हिम्मत भरा कदम है. यह फिल्म समाज की एक सच्चाई को सामने लाती है और उसे सरल तरीके से दर्शकों तक पहुंचाती है. फिल्म की कहानी एक छोटे से शहर में बसती है. यहां दिगम्बर कानतोड़े उर्फ भाऊ (प्रथमेश परब) और उसका दोस्त चोख्या छोटे-मोटे प्रॉपर्टी के काम से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं. कहानी में नया मोड़ तब आता है, जब भाऊ की मुलाकात डॉक्टर अमृता देशमुख (अंकिता लांडे) से होती है. डॉक्टर अमृता शहर में एक सरोगेसी सेंटर खोलना चाहती हैं.
जानें फिल्म की कहानी
फिल्म की कहानी आम बोलचाल के संवादों और हालात से पैदा हुए हास्य के साथ आगे बढ़ती है. सरोगेसी को लेकर लोगों में जो गलतफहमियां हैं, उनसे कई मजेदार मौके बनते हैं. लेकिन फिल्म सिर्फ हंसी तक सीमित नहीं रहती. जैसे ही बाहुबली विधायक संजय भोसले (गणेश यादव) और उसकी पत्नी की कहानी सामने आती है, फिल्म का माहौल गंभीर और रोमांचक हो जाता है. इसके बाद एक सरोगेट मां का अचानक गायब हो जाना कहानी को तेजी से अंत की ओर ले जाता है. यहां सवाल सिर्फ बच्चे का नहीं रहता, बल्कि सही-गलत और इंसानियत का भी बन जाता है.
ओटीटी पर देखकर करें एंजॉय
फिल्म में प्रथमेश परब सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. अंकिता लांडे ने डॉक्टर अमृता की भूमिका को मजबूती और आत्मविश्वास के साथ निभाया है. गणेश यादव विधायक के रोल में दमदार और गंभीर नजर आते हैं. निर्देशक मोहसिन खान ने विषय को गंभीर होते हुए भी भारी नहीं बनने दिया. ‘ममता चाइल्ड फैक्ट्री’ एक ऐसी फिल्म है जो सोचने पर मजबूर करती है, लेकिन ज्ञान नहीं झाड़ती. अगर आप ओटीटी पर कुछ अलग, सामाजिक मुद्दों से जुड़ा और परिवार के साथ देखने लायक कंटेंट ढूंढ रहे हैं, तो इस फिल्म को अपनी वॉचलिस्ट में जरूर शामिल कर सकते हैं.
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By दिव्या केशरी
दिव्या केशरी एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की एंटरटेनमेंट टीम की लीड के रूप में कार्यरत हैं. वह 2020 से प्रभात खबर डिजिटल से जुड़ी हुई हैं और तब से लगातार फिल्म, टीवी और ओटीटी इंडस्ट्री की खबरों को कवर कर रही हैं. उनके पास लगभग 8 साल का जर्नलिज्म एक्सपीरियंस है. एंटरटेनमेंट पत्रकारिता में उनकी मजबूत पकड़ फिल्म, वेब सीरीज, टीवी शो, बॉक्स ऑफिस, सेलिब्रिटी इंटरव्यू, बीटीएस अपडेट्स, थ्रोबैक स्टोरी, गॉसिप और ट्रेंडिंग एंटरटेनमेंट न्यूज पर है. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर को आसान, भरोसेमंद और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाया जाए, ताकि पाठक सिर्फ जानकारी ही नहीं, बल्कि खबर से जुड़ाव भी महसूस करें.
शिक्षा और पत्रकारिता की शुरुआत
दिव्या केशरी ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से एडवरटाइजिंग एंड पब्लिक रिलेशंस में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी भारत से की, जहां उन्हें अलग-अलग बीट्स पर काम करने का मौका मिला. इस दौरान उन्होंने कई स्पेशल स्टोरी और न्यूज पैकेज तैयार किए. झारखंड से जुड़ी कई अहम खबरों पर काम करते हुए उन्होंने रिसर्च और आसान भाषा में खबर लिखने की अपनी क्षमता को और मजबूत किया.
खबरों को लेकर सोच
दिव्या केशरी का मानना है कि एंटरटेनमेंट पत्रकारिता सिर्फ मनोरंजन की खबरें देना नहीं, बल्कि पाठकों तक सटीक, भरोसेमंद और रोचक जानकारी पहुंचाने की जिम्मेदारी भी है. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ है, जिसकी मदद से वह किसी भी खबर की गहराई तक पहुंचती हैं. वह SEO-ऑप्टिमाइज्ड, Google Discover फ्रेंडली और सरल भाषा में कंटेंट तैयार करती हैं, ताकि पाठकों को सही जानकारी आसानी से मिले और उनका पढ़ने का अनुभव बेहतर हो.
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