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Exclusive: हम अभिनेत्रियों पर उम्र का प्रेशर रहता ही है,अभिनेताओं पर नहीं होता है-गायत्री भारद्वाज

Updated at : 14 Jun 2022 2:13 PM (IST)
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Exclusive: हम अभिनेत्रियों पर उम्र का प्रेशर रहता ही है,अभिनेताओं पर नहीं होता है-गायत्री भारद्वाज

बॉलीवुड अभिनेत्री गायत्री भारद्वाज की फिल्म इत्तु सी का ट्रेलर हाल ही में रिलीज हुआ था. एक्ट्रेस ने अपनी फिल्म को लेकर बात की है. एक्ट्रेस इस फिल्म का हिस्सा कैसे बनीं, इसपर उन्होंने बात की.

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Gayatri Bhardwaj interview: मिस इंडिया से बॉलीवुड अभिनेत्री बनने की फेहरिस्त में गायत्री भारद्वाज Gayatri Bhardwaj) का नाम फ़िल्म इत्तु सी बात से जल्द ही शुमार होने वाला है. गायत्री, इससे पहले म्यूजिक वीडियो,विज्ञापन फिल्मों और वेब शो ढिंढोरा का हिस्सा रह चुकी हैं,लेकिन यह उनकी पहली बॉलीवुड फिल्म होगी. उनके इस डेब्यू फिल्म और करियर पर उर्मिला कोरी की हुई.

इत्तु सी बात का हिस्सा कैसे बनीं?

2018 के दिसंबर में मेरा ब्यूटी पैजेंट खत्म हुआ था. 2019 से मैंने ऑडिशन देना शुरू किया था. बहुत सालों बाद यह मौका मिला है. 150 से ज़्यादा ऑडिशन दिए हैं,अब तो गिनती नहीं है. उसके बाद जब एक ऑडिशन क्लियर हो जाता है,तो लगता है कि फाइनली कुछ हुआ है. विज्ञापन फिल्में की हैं. म्यूजिक वीडियो भी किए हैं लेकिन यह पहला मेनस्ट्रीम प्रोजेक्ट है. ऑडिशन भी इसलिए दिया कि लक्ष्मण सर इसे बना रहे थे. लक्ष्मण सर ने पहले मिमी और लुका छिपी जैसी फिल्में बनायी है.

मिस इंडिया ब्यूटी पैजेंट का हिस्सा होना कितना आपके लिए फायदेमंद रहा?

मिस इंडिया जो पैजेंट है, वो इंटरनेशनली होता है,ऐसे में आपको बहुत एक्सपोजर मिलता है. जिस तरह की ग्रूमिंग हमें वहां मिलती है ,वो हमें बात करने से लेकर कैमरे के सामने आत्मविश्वास से नज़र आने का कॉन्फिडेंस भी देती है. आप ब्यूटी कॉन्टेस्ट जीतते हैं,तो इंस्टाग्राम पर आपको एक्स्ट्रा फॉलोवर्स भी मिल जाते हैं. सभी को लगता है कि ब्यूटी पैजेंट से एक्टिंग में जाने का रास्ता आसान होता है,लेकिन रास्ता आसान नहीं होता है. पैजेंट में हमें हमारे हेयर,मेकअप,बात करने के ढंग सभी में परफेक्ट होने को सिखाया जाता है जबकि आपको एक्टिंग करते हुए किरदार को निभाना पड़ता है. उसकी खूबी और खामी सबकुछ,तो एक्टिंग बहुत ही अलग चीज़ है. आपने मॉडलिंग में जो कुछ भी सीखा है,वो भूलकर आपको एक्टिंग सीखनी होती है.

क्या आपने एक्टिंग वर्कशॉप्स भी किए हैं?

हां,मैंने एक्टिंग के वर्कशॉप्स भी किए हैं,लेकिन असली एक्टिंग की ट्रेनिंग ऑन ग्राउंड ही होती है. मैंने ऑडिशन्स के दौरान बहुत सीखा,जितना आप ऑडिशन देते हो,एक्टिंग की प्रैक्टिस करते हो,उतना ही आप बेहतर होते जाते हो.

अपने किरदार को लेकर क्या खास तैयारी करनी पड़ी?

इस फ़िल्म की कहानी बनारस के पास एक छोटे से गांव चुनार की है. रियल लाइफ में मैं दिल्ली से हूं. पापा मेरे पायलट हैं,तो पूरी दुनिया घूमी हुई हूं,जिससे मेरा एक्सपोज़र लेवल बहुत हाई है,जबकि मेरा किरदार सपना इससे बिल्कुल उल्टा है,तो यही मेरे लिए चुनौती थी. मुझे अपने शहरी हाव-भाव और तौर तरीकों को भूलना पड़ा. कैसे वो मैं भूली और क्या याद किया,तो मैं बताना चाहुंगी कि जब हम 14 या 15 साल के होते हैं,तो जो बचपना और मासूमियत होती है,मुझे अपने किरदार में वही लाना पड़ा.

ट्रेलर में दिखाया गया है कि जो आपको आईफोन देगा,आप उससे ही प्यार करेंगी, किरदार के इस पहलू पर आपका क्या रिएक्शन था?

(हंसते हुए)मुझे पहली बार लगा कि लड़कीं तो बड़ी मैटेरियलिस्टिक है. मैंने फ़िल्म के निर्देशक अदनान को कहा कि मुझे आप समझाओ कि क्यों सपना को आईफोन चाहिए,अगर मैं ही किरदार से रिलेट नहीं करूंगी,तो मैं उसको परफॉर्म कैसे करूंगी. उन्होंने बताया कि सपना का यह बचपन का सपना है,क्योंकि वो जब भी बनारस शहर जाती है,तो हाइवे पर एक बड़ा सा पोस्टर जो लगा है,वो आईफोन का है. बड़े शहरों में यह नार्मल बात है. चुनार जैसे छोटे से गांव में यह बड़ी बात है. वो किसी लड़के को उसे लाने के लिए नहीं कह रही है,वो अपनी सहेली को बता रही और बिट्टू शुक्ला सुन लेते हैं और तय करते हैं कि मैं इसको आईफोन ही दूंगा तो मुझे लगा कि ये ठीक है.

आप 2019 से ऑडिशन्स दे रही हैं,बीच में पेंडेमिक भी आ गया था,उस दौरान क्या असुरक्षा की भावना महसूस हुई थी?

हां,मैं इनसिक्योर हुई थी. एक महिला अभिनेत्री पर उम्र का जितना प्रेशर आता है. उतना पुरुष एक्टर्स पर नहीं आता है. सबकी सोच बदलने में समय जाएगा. हम अभिनेत्रियों से हमेशा यंग दिखने की डिमांड होती है. स्थिति तब और मुश्किल हो जाती है,जब आपकी पहली फ़िल्म भी नहीं आयी होती है और साल निकल रहे होते हैं. उस वक़्त जेहन में बस यही चल रहा था कि काम ढूंढो. मैंने इस फ़िल्म से पहले भुवन बाम के साथ एक वेब शो किया था ढिंढोरा. उस वक़्त मेरे सितारे गर्दिश से निकलकर दिखना शुरू ही हुए थे और लॉक डाउन आ गया,लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी. मैं लगी रही और आखिरकार यह फ़िल्म मिल गयी.

आपकी यह फ़िल्म थिएटर में रिलीज हो रही है,मौजूदा जो हालात हैं क्या आपको प्रेशर दे रहे हैं?

17 जून को मेरा जन्मदिन भी है,जब यह फ़िल्म रिलीज हो रही हैं,जो बहुत खास बात मेरे लिए हैं,लेकिन हां प्रेशर भी है. थिएटर एक ऐसा जॉनर है, जहां आपको लगता है कि आपका परफॉरमेंस सभी के पास जज होने के लिए जा रहा है. ओटीटी पर आप एक घर की टीवी में दिखते हैं,जहां ज़्यादा से ज़्यादा 10 लोग एक साथ फ़िल्म देखते हैं,लेकिन थिएटर में कई सौ लोग एक साथ फ़िल्म देखते हैं. ये है कि हमने बहुत मेहनत से फ़िल्म बनायी है. इसके साथ ही ये भी कहूंगी किये पहली फ़िल्म है आगे और आएगी प्रेशर को मैनेज करना सीखना होगा.

आपके आनेवाले प्रोजेक्ट्स?

एक पैन इंडिया फ़िल्म रवि तेजा के साथ कर रही हूं.

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कोरी

लेखक के बारे में

By कोरी

कोरी is a contributor at Prabhat Khabar.

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