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Film Review ''फुकरे रिटर्न्‍स'': फिर भोली पंजाबन के चंगुल में फंस गये फुकरे

Updated at : 09 Dec 2017 9:55 AM (IST)
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Film Review ''फुकरे रिटर्न्‍स'': फिर भोली पंजाबन के चंगुल में फंस गये फुकरे

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म: फुकरे रिटर्न्सनिर्माता: एक्सेल एंटरटेनमेंटनिर्देशक: मृगदीप सिंह लांबाकलाकार: ऋचा चड्ढा, पुलकित सम्राट, मनजोत सिंह, वरुण शर्मा, पंकज त्रिपाठी, अली फ़ज़ल, विशाखा सिंह, प्रिया आनंदरेटिंग: ढाई सीक्वल के भुनाने की होड़ में ‘फुकरे रिटर्न्स’ का नाम भी जुड़ गया है. 2013 में रिलीज हुई फ़िल्म फुकरे का यह सीक्वल है. दोनों फिल्मों […]

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II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म: फुकरे रिटर्न्स
निर्माता: एक्सेल एंटरटेनमेंट
निर्देशक: मृगदीप सिंह लांबा
कलाकार: ऋचा चड्ढा, पुलकित सम्राट, मनजोत सिंह, वरुण शर्मा, पंकज त्रिपाठी, अली फ़ज़ल, विशाखा सिंह, प्रिया आनंद
रेटिंग: ढाई

सीक्वल के भुनाने की होड़ में ‘फुकरे रिटर्न्स’ का नाम भी जुड़ गया है. 2013 में रिलीज हुई फ़िल्म फुकरे का यह सीक्वल है. दोनों फिल्मों के बीच भले ही 4 साल का अंतर है लेकिन फ़िल्म में कहानी मात्र एक साल आगे बढ़ी है जिससे कहानी ज़्यादा बदलाव से महरूम रह गयी है. फ़िल्म की कहानी की बात करें तो पहली कहानी जहां से खत्म हुई है दूसरी वहीं से शुरू हुई है. जिन्होंने पहला भाग नहीं देखा है उनके लिए फ़िल्म के क्रेडिट में ही पहली फ़िल्म की कहानी को बयां कर दिया गया है.

भोली पंजाबन जेल में गए एक साल हो चुके हैं. हनी ,चूचा की जोड़ी अभी भी सपनों का जोड़-तोड़ कर कमा रही है. इसी बीच मंत्री की मदद से भोली पंजाबन जेल से छूट जाती है लेकिन इसके लिए उसे मंत्री को 10 करोड़ रुपये देने हैं. वह फिर फुकरे गैंग को पकड़ती है. फुकरे गैंग भोली पंजाबन का कर्ज चुकाते इससे पहले वो पूरी दिल्ली के कर्ज़दार हो जाते हैं.

इसी बीच चूचा के साथ नया पंगा हो जाता है उसे भविष्य दिखने लगता है जिससे कहानी खजाने और घोटाले तक पहुँच जाती हैं. फुकरे गैंग पर एक के बाद एक मुसीबत में फंसते हैं. फ़िल्म की कहानी में इस बार राजनीति को भी जोड़ा गया है. इन सबको जानने के लिए आपको फ़िल्म देखनी होगी. फुकरे रिटर्न्स कहानी के मामले में फुकरे से फिस्सडी रह गयी है. लेखक निर्देशक ने कुछ नए की कोशिश नहीं की है.

कहानी में पिछली फिल्म की तरह रोचकता और विविधता नहीं है. क्लाइमेक्स बहुत ज़्यादा घिसा पीटा है. घोटाले की कहानी अब तक कई फ़िल्म में देख चुके हैं. कॉमेडी के साथ साथ कहानी में थ्रिलर का जुड़ना इसे कमतर बना गया है. जिससे पहले जैसे बात नहीं बन पाई है. कहानी को जबरदस्ती खींचा गया है. फ़िल्म को देखते हुए यह बात शिद्दत से महसूस होती है.

अभिनय की बात करें तो फुकरों की इस गैंग में वरुण सबसे खास हैं. वरुण शर्मा का अभिनय इस फ़िल्म की यूएसपी कहा जाए तो गलत न होगा वह पर्दे पर जब भी आते हैं हंसी आती है. रिचा चड्ढा का अभिनय भी उम्दा है. दोनों सबसे ज़्यादा दर्शकों का ध्यान खींचते हैं. पंकज त्रिपाठी ने फिर साबित किया है कि वह मौजूदा दौर के बेहतरीन अभिनेताओं में से एक हैं जो हर किरदार में फिट हैं. पुलकित सम्राट औसत रहे हैं.

अली फ़ज़ल औऱ मनजोत सिंह को इस बार ज़्यादा मौके नहीं मिले हैं तो प्रियंका आनंद और विशाखा सिंह गिने चुने दृश्यों में दिखें हैं. मंत्रीजी के रोल में राजीव गुप्ता का काम बढ़िया है.

फ़िल्म के गीत संगीत की बात करें तो फ़िल्म के गाने को कहानी के साथ बखूबी पिरोया गया है लेकिन ये स्क्रीन पर ही देखने में अच्छे लगेंगे. हां ओ मेरी महबूबा गीत का रीमिक्स थोड़ा ठीक बना है.

फ़िल्म के संवाद अच्छे बन पड़े हैं. जिन्हें सभी का अभिनय और प्रभावी बना देता है. फ़िल्म में कॉमेडी की कमी नहीं है लेकिन पिछली फिल्म की तरह कॉमेडी में सरलता और सहजता नहीं है. फ़िल्म की सिनेमाटोग्राफी और दूसरे पहलू ठीक ठाक हैं.

कुलमिलाकर फुकरे रिटर्न्स पिछली फिल्म की तरह बेहतरीन कॉमेडी फिल्म न बनकर एक औसत टाइमपास फ़िल्म बनकर रह गयी है.

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