Amitabh Bachchan : जब मधुशाला की पंक्तियों के साथ इलाहाबाद की सड़कों पर यूं नजर आये थे अमिताभ बच्चन

Published by : Rajneesh Anand Updated At : 11 Oct 2022 2:00 PM

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Amitabh Bachchan Birthday : इलाहाबाद के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर होर्डिंग और फ्लैक्स लगे थे, जिनपर बच्चन जी की कविताएं अंकित थीं. हर छोटी गलियों ,सड़कों पर लगे बैनर पोस्टर में बच्चन जी की अमर कृति मधुशाला की पंक्तियां लिखी हुई थी.. ‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला’.

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Amitabh Bachchan Birthday : आज बाॅलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन अपना 80वां जन्मदिवस मना रहे हैं. इस मौके पर हमें इलाहाबाद से सीबीएसई ऑफिस में कार्यरत रजनी ‘सुभाष’ ने अपना संस्मरण भेजा है. इस संस्मरण में उन्होंने बताया कि अपने पिता डाॅ हरिवंश राय बच्चन के निधन के बाद महानायक अपने पैतृक शहर इलाहाबाद आये थे और उनका अस्थि विसर्जन संगम में किया था.

2003 में हुआ था हरिवंश राय बच्चन का निधन

रजनी बताती हैं कि बात जनवरी 2003 की है. कविवर हरिवंश राय बच्चन जी का अस्थि कलश संगम में विसर्जन करने के लिए उनके पुत्र महानायक अमिताभ बच्चन स्वयं साहित्यकारों की नगरी हां, हमारी संगम नगरी आ रहे थे. इलाहाबाद के बमरौली हवाई अड्डे से उतरकर उन्हें सीधा संगम जाना था. पूरा शहर एक दिन पहले से ही इंतजार में पलके बिछाए बैठा था कि वो अपने प्रिय कवि के अस्थि कलश को नमन कर सकें.

 राह पकड़ तू एक चला चल, पा जायेगा मधुशाला

मैं भी बेचैन थी अपने प्रिय महानायक के दर्शन और पूज्य कवि के अस्थि कलश को नमन करने के लिए . इलाहाबाद के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर होर्डिंग और फ्लैक्स लगे थे, जिनपर बच्चन जी की कविताएं अंकित थीं. हर छोटी गलियों ,सड़कों पर लगे बैनर पोस्टर में बच्चन जी की अमर कृति मधुशाला की पंक्तियां लिखी हुई थी.. ‘राह पकड़ तू एक चला चल, पा जाएगा मधुशाला’.

बमरौली हवाई अड्डे पर उतरा थे अमिताभ बच्चन

सुबह मैं रोज के अपेक्षा जल्दी ऑफिस के लिए निकल पड़ी. उन दिनों सीबीएसई का कार्यालय इलाहाबाद के नीमसराय में हुआ करता था. जीटी रोड से महज 300 मीटर की दूरी पर कार्यालय था. महानायक को इसी जीटी रोड से गुजरना था.

फूलों से सुसज्जित गाड़ी पर सवार थे अमिताभ और जया

ऑफिस में काम में मन नहीं लग रहा था. बार-बार जेहन में ख्याल आ रहा था कि कहीं मैं वंचित न रह जाऊं देखने से. सहसा ही मधुशाला की पंक्तियों की आवाज मुझे सुनाई पड़ी और मैं बिना कुछ सोचे समझे दौड़ती हुई सड़क पर जा पहुंची. ढेर सारे लोग एकत्र थे, कविवर को अंतिम विदाई देने को. मैंने देखा फूलों से सुसज्जित रथ समान गाड़ी पर गमगीन महानायक अमिताभ बच्चन अपनी पत्नी और पुत्र के साथ बैठे थे.

इलाहाबाद के मुट्ठीगंज में हुआ था अमिताभ बच्चन का जन्म

सफेद पायजामा कुर्ता में अमिताभ बच्चन हाथ जोड़ सबका अभिवादन कर रहे थे. मधुशाला की पंक्तियां गूंज रही थीं और मैं अपलक निहार रही थी अद्‌भुत व्यक्तित्व और अपने प्रिय हीरो को. गौरतलब है कि डाॅ हरिवंश राय बच्चन इलाहाबाद के मुट्ठीगंज इलाके में रहा करते थे. अमिताभ बच्चन का जन्म भी यहीं हुआ था. मुट्ठीगंज की गलियों में ही अमिताभ बच्चन का बचपन बीता था. अमिताभ बच्चन का अपने पैतृक शहर इलाहाबाद से गहरा नाता रहा है.

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Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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