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रीयलिटी शो से स्टार बन सकते हैं, लेकिन अच्छा कलाकार बनने के लिए रियाज जरूरी : आंबी सुब्रमणियम

Updated at : 24 Mar 2019 11:26 AM (IST)
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रीयलिटी शो से स्टार बन सकते हैं, लेकिन अच्छा कलाकार बनने के लिए रियाज जरूरी : आंबी सुब्रमणियम

नयी दिल्ली : टीवी पर आने वाले रीयलिटी कार्यक्रमों ने गीत, संगीत और नृत्य की दुनिया के कई सितारों को जन्म दिया है. हालांकि, युवा संगीतकार और वायलिन वादक आंबी सुब्रमणियम का मानना है कि रीयलिटी शो आपको ‘स्टार’ तो बना सकते हैं, लेकिन अच्छा कलाकार बनने के लिए ‘रियाज’ ज्यादा ज़रूरी है. सुब्रमणियम ने […]

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नयी दिल्ली : टीवी पर आने वाले रीयलिटी कार्यक्रमों ने गीत, संगीत और नृत्य की दुनिया के कई सितारों को जन्म दिया है. हालांकि, युवा संगीतकार और वायलिन वादक आंबी सुब्रमणियम का मानना है कि रीयलिटी शो आपको ‘स्टार’ तो बना सकते हैं, लेकिन अच्छा कलाकार बनने के लिए ‘रियाज’ ज्यादा ज़रूरी है.

सुब्रमणियम ने कहा, छोटे बच्चों के रीयलिटी शो थोड़ा परेशान करने वाले हैं. रीयलिटी शो में 12-13 साल की उम्र में बच्चे स्टार तो बन जाते हैं, लेकिन बहुत जल्द ही लोग उन्हें भूल भी जाते हैं, क्योंकि अगले साल नया स्टार आ जाता है.

उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि उनके पास क्षमताएं नहीं हैं, लेकिन जिस वक्त उन्हें ज्यादा से ज्यादा रियाज करना चाहिए, उस वक्त वह स्टार बन जाते हैं. अगर वह ज्यादा से ज्यादा रियाज करेंगे, तो 20-22 साल की उम्र में एक अच्छे कलाकार बनेंगे.

मशहूर वायलिन वादक डॉक्टर एल सुब्रमणियम के बेटे आंबी ने कहा, संगीत की पृष्ठभूमि वाले परिवार में पैदा होने से निश्चित रूप से लाभ मिलता है. बचपन से हमें संगीत की आदत होती है. हमें घर पर ही माहौल मिलता है. जिन कलाकारों की पृष्ठभूमि संगीत वाली नहीं है, उन कलाकारों के पास भी कई मौके होते हैं और वह बेहतर कलाकार बन सकते हैं.

आंबी ने अपनी बहन के साथ मिलकर कम उम्र में ही बच्चों को स्कूल के दौरान संगीत की समझ पैदा करने के लिए ‘सा-पा’ कार्यक्रम की शुरुआत की है. अभी वह स्कूलों के साथ मिलकर करीब 30,000 बच्चों को संगीत की जानकारी उपलब्ध कराते हैं.

एक सवाल के जवाब में आंबी ने कहा, नये उभरते कलाकारों को जहां रियाज पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है, वहीं उन्हें संगीत के माहौल में खुद को ढालना भी होगा. उन्हें संगीत प्रस्तुतियां सुननी चाहिए. कलाकारों से मंच के पीछे जाकर मिलना चाहिए और उन्हें मंच के पीछे अभ्यास करते हुए देखना चाहिए, ताकि वह यह जान सकें कि कलाकारों पर भी कितना और किस तरह का दबाव होता है.

पुराने दौर में दूरदर्शन, आकाशवाणी जैसे मंच नये उभरते कलाकारों को मदद करते थे. लेकिन, वर्तमान में इनकी पहुंच कम हुई है, तो नये विकल्प क्या हैं? इस पर आंबी ने कहा, ‘आजकल तो पहले से भी बेहतर स्थिति है. यूट्यूब और फेसबुक जैसे मंच हैं, जिनसे कई लोगों को अपनी पहचान मिली है.

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