दुनिया का सबसे कठिन एग्जाम! इसके आगे NEET भी पड़ जाए फीका

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Toughest Exam

स्टूडेंटस की AI जेनरेटेड तस्वीर

Toughest Exam: दुनिया में कई सारी टफ परीक्षाएं हैं. लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी और टफ परीक्षा चीन की गाओकाओ है. ये परीक्षा 2-3 दिन तक चलती है. इसमें शामिल होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या करोड़ों में होती है और परीक्षा में कड़ी निगरानी होती है.

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Toughest Exam: नीट परीक्षा पेपर लीक और परीक्षा कैंसल होने के बीच बार-बार ये कहा जा रहा है कि नीट भारत की टफ परीक्षाओं में से एक है. केवल सवाल ही नीट यूजी परीक्षा को टफ नहीं बनाते हैं बल्कि इसका कंप्टीशन, मार्किंग स्कीम, कटऑफ आदि भी इसे टफ बनाता है. साथ ही इस परीक्षा में हर साल 20 लाख से भी ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल होते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि इन सारे पैरामीटर को भी देखें अगर तो दुनिया में और भी कई सारी परीक्षाएं हैं, जो Toughest Exam की लिस्ट में नीट से ऊपर आती है. हम बात कर रहे हैं चीन और दुनिया की सबसे ज्यादा टफ परीक्षा गाओकाओ (Gaokao) की.

गाओकाओ से जुड़ी खास बातें

  • परीक्षा की अवधि: 2-3 दिनों तक चलती है, जिसमें करीब 9-10 घंटे तक परीक्षा होती है
  • विषय: चीनी लैंग्वेज, मैथ्स, फॉरेन लैंग्वेज
  • परीक्षा की कठिनाई का लेवल: इसे ‘दुनिया का सबसे कठिन’ माना जाता है क्योंकि इसमें टफ कंप्टीशन होता है. करीब 1 करोड़ के छात्र शामिल होते हैं.
  • सुरक्षा: परीक्षा की सुरक्षा बहुत सख्त होती है, ताकि पेपर लीक न हो.
  • प्रक्रिया: इसे 1952 में शुरू किया गया था और यह चीन के अलग-अलग यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने के लिए एक एंट्रेंस एग्जाम है.

Gaokao सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि चीन के छात्रों के भविष्य का सबसे बड़ा पड़ाव मानी जाती है. इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए छात्र कई सालों तक कड़ी तैयारी करते हैं.

2 से 3 दिन तक चलती है परीक्षा

Gaokao की सबसे खास बात इसकी लंबी परीक्षा प्रक्रिया है. यह एग्जाम आमतौर पर 2 से 3 दिनों तक चलता है और कुल मिलाकर लगभग 9 घंटे का टेस्ट लिया जाता है. अलग-अलग विषयों की परीक्षाएं कई शिफ्ट में आयोजित की जाती हैं.

क्यों मानी जाती है दुनिया की सबसे कठिन परीक्षा?

Gaokao को कठिन बनाने वाली सबसे बड़ी वजह इसकी प्रतिस्पर्धा (Competition) है. चीन की टॉप यूनिवर्सिटीज में सीमित सीटों के लिए करोड़ों छात्र आवेदन करते हैं. ऐसे में एक-एक मार्क्स बहुत जरूरी हो जाता है. कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परीक्षा का दबाव इतना ज्यादा होता है कि छात्र दिन-रात पढ़ाई करते हैं और परिवार भी इसे लेकर बेहद गंभीर रहते हैं.

सुरक्षा व्यवस्था होती है बेहद सख्त

पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा की सुरक्षा बेहद कड़ी रखी जाती है. परीक्षा केंद्रों पर हाई-टेक निगरानी, बायोमेट्रिक जांच और इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर सख्त प्रतिबंध जैसे कदम उठाए जाते हैं. यही वजह है कि इसे दुनिया की सबसे सुरक्षित परीक्षाओं में भी गिना जाता है.

1952 में हुई थी शुरुआत

Gaokao की शुरुआत वर्ष 1952 में हुई थी. तब से यह चीन की शिक्षा प्रणाली का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है. इस परीक्षा में प्रदर्शन के आधार पर ही छात्रों को देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में दाखिला मिलता है.

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया के साथ जुड़ी हुई हैं. उन्होंने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्था के साथ काम किया है. अभी प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ जुड़कर एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शाम्भवी यहां एग्जाम, नौकरी, सक्सेस स्टोरी की खबरें देखती हैं. इसके अलावा वे सिनेमा और साहित्य में भी रुचि रखती हैं.

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