Smart Class और Digital Learning के इस दौर में जरूरी है खेल-कूद, Sports Coach ने बताया खेल का महत्व
Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 04 Sep 2025 3:18 PM
शिक्षक संजय पाठक (फोटो क्रेडिट- फेसबुक)
Teachers Day Special Interview: शिक्षक दिवस के खास मौके पर हमने बिहार के सिवान जिले के स्पोर्ट्स कोच संजय पाठक से बातचीत की. वे स्पोर्ट्स अकैडमी चलाते हैं और गरीब परिवार से आने वाली बच्चियों को फुटबॉल खेलने की ट्रेनिंग देते हैं. पढ़ें संजय पाठक के साथ खास बातचीत आधारित रिपोर्ट.
Teachers Day Special Interview: 5 सितंबर को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है. शिक्षकों और गुरुओं का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है. बिना गुरु के जीवन अधूरा है. आज के इस खास मौके पर बिहार के रहने वाले स्पोर्ट्स अकैडमी के संस्थापक और शिक्षक संजय पाठक से विशेष बातचीत करेंगे. उनसे जानेंगे कि स्पोर्ट्स कोच के रूप में वे इस दिन को कैसे देखते हैं और लड़कियों के लिए शिक्षा या प्रशिक्षण हासिल करना कितना जरूरी है.
Sanjay Pathak: कौन हैं संजय पाठक?
संजय पाठक बिहार के सिवान जिले के रहने वाले हैं. वे सिवान स्थित मैरवा में रानी लक्ष्मीबाई अकैडमी चलाते हैं, जहां गरीब घर से आने वाली बच्चियों को स्पोर्ट्स ट्रेनिंग दी जाती है. इस अकैडमी की प्लेयर्स राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता में शामिल होती हैं और जीतती हैं.
संजय पाठक के बारे में जानने के लिए पढ़ें – संजय पाठक सक्सेस स्टोरी
सवाल: आपके लिए शिक्षक दिवस का क्या महत्व है, और एक स्पोर्ट्स कोच के तौर पर आप इसे कैसे देखते हैं?
जवाब: हमारे लिए शिक्षक दिवस का बहुत बड़ा महत्व है. कहते हैं गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देव महेश्वर: गुरु साक्षात परम ब्रह्म तस्मै श्री गुरुवे नमः. शिक्षक ही छात्रों को अक्षर ज्ञान कराते हैं. साथ ही उन्हें अंधकार के रास्ते से निकालकर कामयाब बनाते हैं. ऐसे में शिक्षक दिवस के दिन शिक्षकों का सम्मान करना उनके प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है. देश के सारे शिक्षकों को उनके नौनिहाल जिन पर वह दिन-रात एक करके जिनको रास्ता दिखाने का काम करते हैं, जिनको सीखाने का काम करते हैं, जिनको ज्ञान देने का काम करते हैं उन्हें अपने छात्र-छात्राओं का प्यार और सम्मान प्राप्त हो जाए इससे काफी सुकून मिलता है.
सवाल: गरीब घर की बच्चियों को ट्रेनिंग देने की प्रेरणा आपको कहां से मिली और इस सफर में सबसे बड़ी चुनौती क्या रही?
जवाब: गरीब घर की बच्चियों को ट्रेनिंग देने की प्रेरणा मुझे विद्यालय से ही मिली क्योंकि मैं एक सरकारी शिक्षक हूं. सरकारी स्कूलों में बड़ी संख्या में वंचित घर की बच्चियां पढ़ने जाती हैं. ऐसे में उन्हें देखकर ही प्रेरणा मिली. स्कूल में जब इन बच्चियों की प्रशिक्षण दिया और उन्होंने छोटे-मोटे प्रतियोगिता में जब जीत हासिल की तो हिम्मत और बढ़ी. गरीब परिवारों में भी प्रतिभाएं, बस जरूरत है उसे निखारने की. मैंने सिर्फ इन बच्चियों को प्लेटफॉर्म दिया है.
सवाल: आपके संस्थान की लड़कियां नेशनल और इंटरनेशनल स्तर पर खेल रही हैं. इस उपलब्धि को देखकर आपको कैसा लगता है?
जवाब: छात्राओं का प्रदर्शन, लगन एवं समर्पण हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत रहा है. निश्चित रूप से एक गुरु होने के नाते शिक्षक और प्रशिक्षक होने के नाते जब हमारी रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकादमी की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलती है पदक जीतती है तो मुझे काफी गर्व की अनुभूति होती है. मुझे लगता है कि मैंने जो मेहनत किया है वह मेहनत सार्थक है.
सवाल: आज स्मार्ट क्लास और डिजिटल लर्निंग का दौर है, ऐसे समय में खेल और मैदान की ट्रेनिंग कितनी जरूरी है?
जवाब: निश्चित रूप से स्मार्ट क्लास और डिजिटल लर्निंग ने बच्चों को शारीरिक रूप से कमजोर किया है. साथ ही यह मानसिक स्वास्थ्य पर भी काफी प्रभाव डालता है. मैदान में जब बच्चे जाते हैं, दौड़ते हैं, खेलते-कूदते हैं और जब प्रतियोगिता में भाग लेते हैं तो उन्हें रणनीति बनानी पड़ती है, गोल मारना होता है. ऐसे में बुद्धि तीव्र होती है खेल से बच्चे शारीरिक एवं मानसिक विकास होता है. स्मार्ट क्लास और डीजल लर्निंग से केवल किताबी ज्ञान पा सकते हैं शारीरिक मानसिक एवं भावनात्मक विकास प्रभावित होता है.
सवाल: भविष्य में आप अपने अकैडमी और बच्चियों को कहां देखते हैं?
जवाब: कहते हैं जब तक सपने देखे न जाएं, तब तक मंजिल हासिल नहीं की जा सकती. हमारे बच्चियां तो अच्छा कर रही हैं. ऐसे में मैं निश्चित रूप से इस अकैडमी और बच्चियों के लिए कई सपने देखता हूं. मैं ऐसी योजना बना रहा हूं कि हमारे रानी लक्ष्मीबाई स्पोर्ट्स अकादमी में कम से कम 500 बच्चियां आवासीय प्रशिक्षण शिविर में रहकर के विभिन्न खेलों का प्रशिक्षण ले सकें. इस अकैडमी में सभी बच्चियों को भोजन से लेकर के सारी सुविधा निशुल्क दे रहा हूं. मेरा सपना है कि 2033 तक कम-से-कम 500 लड़कियों को एक छत के नीचे रखकर के उन्हें पढ़ाई, खेल, डिजिटल एजुकेशन, जिवन कौशल, महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशिक्षण दे सकूं और सारी सुविधाएं दे सकूं.
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