जिस अस्पताल में मां सफाईकर्मी, बेटी बनेगी डॉक्टर, भावुक कर देगी इस Topper की कहानी 

Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 30 Sep 2025 11:15 AM

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नीट सक्सेस स्टोरी (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

Success Story: रांची स्थित रिम्स डेंटल कॉलेज में आशा देवी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं. वहीं अब उनकी बेटी डॉक्टर बनेगी. बेटी निशा ने NEET UG 2025 में सफलता हासिल कर, इस कॉलेज में दाखिला पाया है. मां बेटी की ये संघर्ष की कहानी आपको भावुक कर देगी.

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NEET Success Story: रांची की एक मां-बेटी की कहानी इन दिनों चर्चा में है, जिसने संघर्ष और मेहनत से नई मिसाल कायम की है. मां जिस अस्पताल में एक आम कर्मचारी थीं, वहीं अब उनकी बेटी डॉक्टर बनेगी. रांची स्थित रिम्स डेंटल कॉलेज (RIIMS Dental College) की चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी आशा देवी के लिए वो पल बेहद खुशी के थे, जब उनकी बेटी निशा को यहां दाखिला मिला. आशा अपनी बेटी के साथ सोमवार को डेंटल कॉलेज पहुंची थी. आशा देवी ने आर्थिक तंगी के बाद भी हमेशा बच्चों को पढ़ाने के लिए जद्दोजहद की है.  

Success Story: मां और बेटी की संघर्ष भरी दुनिया 

आशा देवी मूल रूप से झारखंड की हैं. वे रांची (Ranchi News) स्थित बरियातू के भरमटोली में रहती हैं. उनका जीवन संघर्ष और दर्द से भरा रहा है. लेकिन बेटी के डेंटल कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उन्होंने पहली बार जीवन में खुशी के पल देखे. आशा देवी ने बेटी को पढ़ाने के लिए बहुत संघर्ष किया है और उनकी बेटी ने रिजल्ट देकर, मां के संघर्षों को सार्थक कर दिया. 

Success Story: पति को खोने का दु:ख

आशा देवी के स्वर्गीय पति विजय शाह दवा दुकान में काम करते थे और समय मिलने पर टैम्पू चलाते थे. वर्ष 2008 में उनके निधन से पूरा परिवार कमजोर पड़ गया और आशा देवी और बच्चे बेसहारा हो गए. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.

Success Story: निशा की बड़ी बहन और भाई भी अपने अपने करियर में हैं सफल 

निशा तीन भाई बहन हैं, भाई सूरज और बहन नेहा, दोनों ही उनसे बड़े हैं. बड़ी बहन नेहा ने 10वीं में 90 प्रतिशत अंक हासिल किया था. इसके बाद रांची कॉलेज (Ranchi College) से बीए किया और टाटा मोटर में नौकरी की. वहीं उनके भाई सूरज ने 96% के साथ 10वीं की थी. वो अभी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे हैं. निशा ने नीट यूजी (NEET UG 2025) परीक्षा में सीएमएल रैंक 556 और कैटेगरी (BC II) रैंक 105 हासिल कर रिम्स डेंटल कॉलेज में दाखिला लिया. अब वह डॉक्टर बनेंगी. 

Success Story: बच्चों की पढ़ाई से नहीं किया समझौता

आशा देवी ने तीनों बच्चों का पालन पोषण अकेले ही किया. उन्होंने कहा कि उस वक्त लगा कि सब खत्म हो गया. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और घर चलाने के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाती भी रहीं. शुरुआत में वे लोगों के घरों में काम करती थीं. एक डॉक्टर के यहां काम करते हुए उन्हें वर्ष 2011 में चतुर्थश्रेणी की नौकरी मिली. आशा देवी ने भले ही कम खाना खाकर गुजारा किया हो लेकिन बच्चों की पढ़ाई में कोई कसर नहीं रहने दी. 

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Shambhavi Shivani

लेखक के बारे में

By Shambhavi Shivani

शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.

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