NEET Success Story: न स्कूल न इंटरनेट…फिर भी NEET में 261 रैंक, भावुक कर देगी इस आदिवासी लड़के की कहानी
Published by : Shambhavi Shivani Updated At : 31 Jul 2025 12:51 PM
NEET Success Story
NEET Success Story: नीट यूजी कांउसलिंग चल रही है. ऐसे में याद आती है ओडिशा के उस लड़के कि जिसने पिछले वर्ष NEET UG परीक्षा में 261वीं रैंक हासिल करके इतिहास रच दिया था. हम बात कर रहे हैं मंगला मुदुली की, जिन्होंने कम संसाधन और बहुत सारी मुसीबतों से पार पाते हुए अपने लिए राह बना ली. आइए, जानते हैं इस नीट टॉपर की सक्सेस स्टोरी
NEET Success Story: कहते हैं, “मेहनत वो चाबी है जिससे किस्मत के बंद दरवाजे भी खोले जा सकते हैं”, और ये बात ओडिशा के मंगला मुदुली (Mangala Muduli) पर फिट बैठती है, जिसने नीट यूजी परीक्षा पास करके इतिहास रच दिया. मंगला मुदुली ने NEET UG 2024 में 261वीं रैंक हासिल की है. महज 19 साल के इस लड़के ने अपने पहले ही प्रयास में कम संसाधन के साथ यह सफलता पाई. वे सभी आदिवासी बच्चों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. आइए, जानते हैं उनकी सक्सेस स्टोरी-
NEET UG Success Story: गांव में बीता बचपन
मुदुली ओडिशा के बोंडा जनजाति (Bonda Tribe Boy) से ताल्लुक रखते हैं. वे ओडिशा के मलकनगिरी जिले (Malkangiri District) के रहने वाले हैं. उनका परिवार बहुत साधारण है. मुदुली के परिवार में माता-पिता के अलावा एक भाई और एक बहन है. उनका परिवार मलकानगिरी जिले के गोविंदपल्ली ब्लॉक के मुदुलीपाड़ा पंचायत के अंतर्गत आने वाले बडबेल गांव में सीमित संसाधन में गुजर बसर करता है.
Bonda Tribe Boy Success Story: घर में उच्च शिक्षा का माहौल नहीं, भाई ने भी बीच में छोड़ी पढ़ाई
मंगला ने शुरुआती शिक्षा गांव के ही स्कूल से हासिल की. उनके बड़े भाई भी इसी स्कूल से पढ़ाई करते थे, लेकिन कुछ समय बाद स्कूल छोड़ दिया. मंगला जिस कम्युनिटी से आते हैं, उनमें स्कूल ड्रॉपआउट बच्चों की संख्या ज्यादा होती है. मंगला के घर में भी उच्च शिक्षा का माहौल नहीं था. ऐसे में मंगला के लिए मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने का सफर बहुत मुश्किल रहा.
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ओडिशा में बोंडा जनजाति की साक्षरता दर मात्र 36.61% थी, जो राज्य के अन्य प्रमुख विशेष रूप से कमजोर आदिवासी ग्रुपों की तुलना में कम है.
NEET UG Success Story: शिक्षक ने किया प्रेरित
लेकिन वो कहते हैं न, “जब जीवन में अंधेरा छा जाता है, तभी ईश्वर किसी न किसी रूप में आशा की एक नई रोशनी दिखा देता है”. मंगला के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. वो जब हायर सेकेंडरी स्कूल जाने लगे तो वहां उन्हें एक शिक्षक के रूप में आशा की किरण मिली, जिन्होंने उसे NEET UG परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया. साथ ही बालासोर के एक कोचिंग संस्थान में दाखिला दिला दिया. बस यहीं से मंगला की किस्मत ने पलटी मारी. 19 वर्षीय मुदुली कमजोर आदिवासी ग्रुप से NEET UG परीक्षा पास करने वाला पहला व्यक्ति बन गया है. मंगला MKCG मेडिकल कॉलेज और अस्पताल से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं.
NEET UG Success Story: भाषा को रुकावटन नहीं बनने दिया
अपने एक इंटरव्यू में मंगला (Mangala Muduli) ने बताया कि पहले अटेंप्ट में नीट यूजी पास करके उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार को गौरवान्वित किया है बल्कि पूरा बोंडा समाज उनकी इस उपलब्धि से खुश है. उनके इस तरह पढ़ाई करने से बाकी के बच्चे भी प्रेरित होंगे और उनके अभिभावक भी उन्हें उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए प्रोत्साहित करेंगे. उन्होंने कहा कि मेरे पास न इंटरनेट की सुविधा थी, न कोई स्मार्ट फोन और न कोई खास तकनीक तक मेरी पहुंच थी. हालांकि, मैंने किसी भी अभाव को अपने लिए असुविधा नहीं बनने दिया और रास्ते निकालता गया. NEET UG परीक्षा के लिए साइंस विषय को अंग्रेजी में पढ़ना जो मेरे लिए काफी कठिन था. शिक्षकों ने मेरे लिए अनुवाद किए. उन्होंने बाकी नीट अभ्यर्थियों को कहा कि कितनी भी मुश्किलें आए, मेहनत करना नहीं छोड़ें. बड़े सपनों के लिए बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ती है. साथ ही मोटिवेटेड रहें.
यह भी पढ़ें- NEET UG स्कोर से MBBS नहीं इन मेडिकल कोर्सेज में ले सकते हैं दाखिला, डॉक्टर जितनी होगी कमाई
यह भी पढ़ें- UP NEET UG Counselling 2025: 686 स्कोर पर यूपी के MBBS कॉलेज में दाखिला, मेरिट लिस्ट जारी, AIR-1 टॉपर का भी नाम
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Shambhavi Shivani
शाम्भवी शिवानी डिजिटल मीडिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर की डिजिटल टीम के साथ एजुकेशन बीट पर काम कर रही हैं. शिक्षा और रोजगार से जुड़ी खबरों की समझ रखने वाली शाम्भवी एग्जाम, सरकारी नौकरी, रिजल्ट, करियर, एडमिशन और सक्सेस स्टोरी जैसे विषयों पर रिपोर्टिंग और फीचर राइटिंग करती हैं. सरल भाषा और जानकारी को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करना उनकी लेखन शैली की खासियत है. डिजिटल मीडिया में अपने करियर के दौरान शाम्भवी ने न्यूज़ हाट और राजस्थान पत्रिका जैसी संस्थाओं के साथ काम किया है. यहां उन्होंने एजुकेशन, युवा मुद्दों और ट्रेंडिंग विषयों पर कंटेंट तैयार किया. वर्तमान में प्रभात खबर के साथ जुड़कर वे खास तौर पर बोर्ड परीक्षा, प्रतियोगी परीक्षा, सरकारी नौकरी, करियर ऑप्शंस और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज पर काम कर रही हैं. शाम्भवी की रुचि सिर्फ पत्रकारिता तक सीमित नहीं है. उन्हें सिनेमा और साहित्य में भी गहरी दिलचस्पी है, जिसका असर उनकी लेखन शैली में भी देखने को मिलता है. वे तथ्यों के साथ भावनात्मक जुड़ाव और मानवीय पहलुओं को भी अपनी स्टोरीज में जगह देने की कोशिश करती हैं. पटना में जन्मीं शाम्भवी ने Patna University से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. इसके बाद Indira Gandhi National Open University (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की. पत्रकारिता और जनसंचार की पढ़ाई ने उन्हें न्यूज राइटिंग, डिजिटल कंटेंट और ऑडियंस बिहेवियर की बेहतर समझ दी है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगातार बदलते ट्रेंड्स और रीडर्स की जरूरतों को समझते हुए शाम्भवी SEO-फ्रेंडली, इंफॉर्मेटिव और एंगेजिंग कंटेंट तैयार करने पर फोकस करती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों तक सही, उपयोगी और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाई जा सके.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










