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Google की जॉब नहीं आई रास, विदेश में लाखों का पैकेज छोड़कर लावन्या बनीं IAS

1 Nov, 2025 5:06 pm
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IAS Lavanya Gaur Success Story

IAS लावन्या गौर की Success Story

IAS Lavanya Gaur Success Story: कहते हैं, जब मन में ठान लो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता. ऐसी ही कहानी है दिल्ली की लावन्या गौर की, जिन्होंने UPSC सिविल सर्विस परीक्षा 2025 में ऑल इंडिया रैंक 57 हासिल कर IAS बनने का सपना पूरा किया. लेकिन उनकी ये सफलता रातों-रात नहीं आई, इसके पीछे हैं सालों की मेहनत, असफलताएं और खुद पर अटूट भरोसा.

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IAS Lavanya Gaur Success Story: कभी Google की चमकदार जॉब करती थीं, आज भारत सरकार की सेवा में IAS अधिकारी हैं. यह कहानी है दिल्ली की लावन्या गौर की, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि जिंदगी में अगर लक्ष्य साफ हो, तो राह कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, मंजिल मिलकर ही रहती है. आइए उनकी सफलता (Success Story) के पीछे के संघर्ष को करीब से देखते हैं.

IAS Lavanya Gaur Success Story: दिल्ली की रहने वाली

लावन्या गौर मूल रूप से दिल्ली की रहने वाली हैं. उनकी स्कूली पढ़ाई भी दिल्ली से ही हुई. बचपन से ही वे पढ़ाई में तेज थीं, लेकिन कभी नहीं सोचा था कि एक दिन वे सिविल सर्विस की परीक्षा देकर देश की सेवा करेंगी. स्कूल खत्म होने के बाद उन्होंने बीटेक (BTech) में एडमिशन लिया और पढ़ाई के दौरान भी शानदार प्रदर्शन किया.

Google में मिला इंटर्नशिप का मौका

बीटेक पूरा करने के बाद लावन्या को Google जैसी नामी कंपनी में इंटर्नशिप का मौका मिला. वहां उन्होंने अपनी मेहनत और टैलेंट से सबको प्रभावित किया. इसके बाद उन्होंने कुछ और मल्टीनेशनल कंपनियों (MNCs) में भी काम किया. अच्छी सैलरी, आरामदायक लाइफ और सुरक्षित करियर – सब कुछ था, लेकिन मन को सुकून नहीं था.

कॉर्पोरेट वर्ल्ड से सिविल सर्विस

लावन्या बताती हैं कि एक दिन उन्हें लगा कि वे सिर्फ खुद के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए कुछ बड़ा करना चाहती हैं. यही सोचकर उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और UPSC की तैयारी शुरू कर दी. शुरुआत में यह फैसला आसान नहीं था. परिवार और दोस्तों को भी लगा कि वे एक स्थिर करियर छोड़कर बहुत बड़ा रिस्क ले रही हैं. लेकिन लावन्या ने हार नहीं मानी.

पहले तीन प्रयासों में नाकामी मिली. हर बार कुछ अंक कम रह जाते या इंटरव्यू में चूक हो जाती. लेकिन उन्होंने कहा कि मैं रुकी तो सब खत्म हो जाएगा. उन्होंने गलतियों से सीखा, अपनी रणनीति बदली और चौथे प्रयास में कमाल कर दिखाया- रैंक 57 के साथ IAS बनकर अपना सपना पूरा किया.

आज लावन्या गौर देशभर के युवाओं के लिए एक मिसाल हैं. उन्होंने दिखा दिया कि सफलता की चाबी डिग्री या किस्मत नहीं, बल्कि मेहनत और धैर्य है. Google जैसी कंपनी की जॉब छोड़ IAS बनना आसान नहीं था, लेकिन लावन्या ने कर दिखाया.

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Ravi Mallick

लेखक के बारे में

By Ravi Mallick

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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