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मां को खोने का दर्द, सर पर UPSC Exam, हिम्मत से Rank 14 लाकर IAS बनीं अंकिता

Updated at : 18 Sep 2025 2:12 PM (IST)
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IAS Ankita Choudhary

IAS Ankita Choudhary (फोटो: सोशल मीडिया)

IAS Ankita Choudhary Success Story: कहते हैं अगर मेहनत सच्ची लगन से की जाए तो सफलता जरूर हासिल होती है. इस कथन की सबसे बड़ी उदाहरण आईएएस अंकिता चौधरी हैं. यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा सर पर हो और उसी वक्त मां को खोने का दर्द मिल जाना फिर भी उनसे उभरकर UPSC में इतिहास रचना आसान नहीं होता.

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IAS Ankita Choudhary Success Story: कहा जाता है कि यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को क्रैक करने के लिए आपको दिनभर में 12 से 14 घंटे पढ़ाई जरूरी है. ऐसे में एक नाम अंकिता चौधरी (IAS Ankita Choudhary) का सामने आता है जिनको परीक्षा से ठीक पहले मां को खोने का दुख मिल गया. इस दुख से उभरते हुए उन्होंने सिविल सर्विस परीक्षा को रैंक 14 लाकर क्रैक किया और अपना सपना पूरा किया. आइए उनकी सफलता के पीछे के संघर्ष को करीब से जानते हैंय

IAS Ankita Choudhary Success Story: कौन हैं अंकिता चौधरी?

हरियाणा की रहने वाली अंकिता चौधरी हमेशा से पढ़ाई में अव्वल रही हैं. उनकी स्कूली शिक्षा रोहतक के इंडस पब्लिक स्कूल से हुई. स्कूल टाइम से ही अंकिता को पढ़ाई में गहरी रुचि थी और उन्होंने हर परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन किया. यही कारण था कि आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने दिल्ली का रुख किया.

दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई

ग्रेजुएशन के लिए अंकिता ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित हिंदू कॉलेज में एडमिशन लिया और बीएससी की डिग्री हासिल की. इसके बाद उन्होंने आईआईटी दिल्ली से एमएससी की पढ़ाई की. MSc के दौरान ही उन्होंने ठान लिया था कि अब उन्हें सिविल सर्विसेज की तैयारी करनी है. इसी दौरान उन्होंने UPSC परीक्षा की तैयारी शुरू की और अपना पूरा ध्यान इस दिशा में केंद्रित कर दिया.

मां को खोने का दर्द

अंकिता के पिता शुगर मिल में एकाउंटेंट हैं जबकि उनकी मां टीचर थीं. मां हमेशा चाहती थीं कि अंकिता बड़ी होकर कुछ अलग करें और समाज की सेवा करें. लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. एक हादसे में अंकिता की मां का निधन हो गया. मां को खोने का दुख इतना गहरा था कि इसने उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया.

अपनी मां के जाने के बाद भी अंकिता ने हार नहीं मानी. उन्होंने मां के सपने को अपनी ताकत बनाया. आंसुओं के बीच भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और UPSC की परीक्षा में बैठीं. यह उनके लिए आसान नहीं था लेकिन मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत की बदौलत उन्होंने यह साबित किया कि हिम्मत से हर मुश्किल को जीता जा सकता है.

UPSC में शानदार रैंक

अंकिता ने UPSC 2018 की परीक्षा में हिस्सा लिया और पूरे देश में 14वीं रैंक हासिल की. यह न केवल उनके परिवार बल्कि हरियाणा के लिए भी गर्व का पल था. सेलेक्शन के बाद उन्हें हरियाणा कैडर मिला और वह IAS अफसर बनीं. आज अंकिता उन युवाओं के लिए प्रेरणा हैं जो कठिन हालात में भी हार नहीं मानते.

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Ravi Mallick

लेखक के बारे में

By Ravi Mallick

रवि मल्लिक पिछले 7 सालों से डिजिटल पत्रकारिता से जुड़े हैं. स्कूली शिक्षा से लेकर नौकरी तक की खबरों पर काम करना पसंद है. युवाओं को बेहतर करियर ऑप्शन, करंट अफेयर्स और नई वैकेंसी के बारे में बताना अच्छा लगता है. बोर्ड परीक्षा हो या UPSC, JEE और NEET एग्जाम टॉपर्स से बात करना और उनकी स्ट्रेटजी के बारे में जानना पसंद है. युवाओं को प्रेरित करने के लिए उनके बीच के मुद्दों को उठाना और सही व सटीक जानकारी देना ही उनकी प्राथमिकता है.

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