CBSE बदलने जा रहा है थ्री लैंग्वेज पॉलिसी, इस बार छात्रों को मिलेगी बड़ी राहत
स्टूडेंट की सांकेतिक तस्वीर
CBSE Three Language Policy 2026: 1 जुलाई 2026 से सभी स्कूल में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) लागू करने जा रहा है. लेकिन अब इसे लेकर एक बड़ा अपडेट सामने आया है.
CBSE Three Language Policy 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) को लेकर छात्रों को बड़ी राहत दी है. अब 7वीं, 8वीं और 9वीं के छात्रों को 10वीं कक्षा में अपने फॉरेन लैंग्वेज (Foreign Language) कॉम्बिनेशन को बदलने की जरूरत नहीं होगी. वे 10वीं भी सेम ही कॉम्बिनेशन पढ़ेंगे जो पिछली कक्षा से पढ़ते आए हैं.
कब आया CBSE से जुड़ा अपडेट?
1 जुलाई 2026 से सभी स्कूल में थ्री लैंग्वेज पॉलिसी (Three Language Policy) लागू करने जा रहा है. इसे लेकर कल यानी कि 26 जून 2026 को एक बड़ा अपडेट सामने आया है. अगर आप अब तक नहीं जानते तो बता दें कि थ्री लैंग्वेज पॉलिसी उन स्टूडेंट्स पर लागू होगी जो इस साल (2026) में 6ठीं कक्षा में एडमिशन लेंगे.
10वीं में भी सेम लैंग्वेज कॉम्बिनेशन पढ़ने की छूट
बोर्ड के अनुसार, भारतीय भाषाएं पढ़ने का नियम क्लास 6 से लागू होगी. लेकिन क्लास 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे स्टूडेंट्स पर इसे लागू नहीं किया जाएगा. इससे जुड़ा ऑफिशियल नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा.
थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर एक्सपर्ट ने क्या कहा?
CBSE थ्री लैंग्वेज पॉलिसी को लेकर रांची के डोरंडा स्थित St. Xavier’s school के प्रिंसिपल फूलदेव सोरेंग ने कहा कि भारत जैसे विविधता वाले देश में हर छात्र के लिए कम-से-कम दो इंडियन लैंग्वेज का ज्ञान होना जरूरी है. यह उनके विकास के लिए जरूरी है. मातृभाषा और भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की पहचान भी हैं. हालांकि, आज का समय प्रतिस्पर्धा का है. ऐसे में फॉरेन लैंग्वेज का ज्ञान भी जरूरी है. फ्रेंच, जर्मनी, जापानी या स्पेनिश भाषा से छात्रों के लिए करियर के नए रास्ते खुल रहे हैं. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि भारतीय भाषाओं को पूरी तरह हटाकर उनकी जगह केवल विदेशी भाषाओं को दे दी जाए.
कब जारी हुआ था थ्री लैंग्वेज पढ़ा जाने का फैसला?
CBSE के तहत स्कूलों में थ्री लैंग्वेज पढ़ाए जाने का फैसला 15 मई 2026 को एक सर्कुलर के तहत जारी किया गया था. जारी नोटिस के अनुसार, कक्षा 9 में तीन भाषाएं (R1, R2, R3) पढ़ने का फैसला लागू किया था, जिसमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए. इस नियम को 1 जुलाई से लागू किए जाने की बात भी कही गई थी.
विदेशी भाषा पढ़ने को लेकर CBSE ने क्या कहा था?
बोर्ड ने मई में जारी सर्कुलर में साफ कहा था कि छात्र अलग विदेशी भाषा (इंग्लिश के अलावा जैसे कि फ्रेंच, चाइनीज आदि) पढ़ना चाहते हैं तो वे चौथी या ऑप्शनल भाषा के रूप में इसे चुन सकते हैं.
कोर्ट में माता पिता ने उठाया मुद्दा
CBSE के इस नियम का लंबे वक्त से विरोध किया जा रहा है. कई राज्यों के माता-पिता और छात्रों का कहना है कि इससे छात्रों पर मैथ्स, साइंस और अन्य विषय के अतिरिक्त लैंग्वेज को लेकर भी प्रेशर बनेगा. साथ ही कुछ लोग इसलिए भी विरोध कर रहे थे कि उनके अनुसार, स्थानीय (यहां भारतीय) भाषा का बाद की पढ़ाई में कोई रोल नहीं है तो इससे आगे भी उन्हें कोई खास फायदा नहीं होगा. बोर्ड के इस फैसले के खिलाफ कई छात्रों और उनके माता-पिता ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अब CBSE बोर्ड नियमों में बदलाव करने जा रहा है.
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By शाम्भवी शिवानी
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