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स्पेशल एजुकेशन में है ट्रेंड शिक्षकों की मांग

Updated at : 05 Sep 2020 5:17 PM (IST)
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स्पेशल एजुकेशन में है ट्रेंड शिक्षकों की मांग

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की दरकार होती है. हमारे देश में बड़े पैमाने पर ट्रेंड स्पेशल एजुकेशन टीचर की मांग है. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में शारीरिक या मानसिक या विकासात्मक तौर पर दिव्यांग बच्चे शामिल हैं. ये बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नहीं पढ़ पाते. मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से सरकारी स्कूलों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेशन टीचर रखने के निर्देश हैं.

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विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष शिक्षकों की दरकार होती है. हमारे देश में बड़े पैमाने पर ट्रेंड स्पेशल एजुकेशन टीचर की मांग है. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों में शारीरिक या मानसिक या विकासात्मक तौर पर दिव्यांग बच्चे शामिल हैं. ये बच्चे सामान्य बच्चों के साथ नहीं पढ़ पाते. मानव संसाधन मंत्रालय की ओर से सरकारी स्कूलों में ऐसे बच्चों को पढ़ाने के लिए स्पेशल एजुकेशन टीचर रखने के निर्देश हैं.

चुनौतीपूर्ण, लेकिन संतोषजनक करियर

संवेदनशील बच्चों की शिक्षा और प्रशिक्षण के लिए एक अलग दृष्टिकोण की जरूरत होती है. विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षक ही इस काम को कर सकते हैं. विशेष जरूरतों वाले बच्चों को प्रशिक्षित कराना चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यह बेहद संतोषजनक भी है. आपमें अगर धैर्य के साथ दिव्यांग बच्चों को समझने, स्वीकारने और प्रशिक्षित करने की क्षमता है, तो 12वीं के बाद स्पेशल एजुकेशन टीचर के तौर पर करियर बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं.

ऐसे मिलता है स्पेशल एजुकेशन कोर्स में दाखिला

रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया (आरसीआइ) स्पेशल एजुकेशन में डिप्लोमा लेवल के कोर्स में प्रवेश के लिए हर वर्ष ऑल इंडिया ऑनलाइन एप्टीट्यूड टेस्ट (एआइओएटी) का आयोजन करता है. एआइओएटी के माध्यम से आरसीआइ से मान्यताप्राप्त विभिन्न संस्थानों/ विश्वविद्यालयों में स्पेशल एजुकेशन में डिप्लोमा लेवल के विभिन्न कोर्सेज में प्रवेश मिलता है.

जानें कौन-कौन से हैं कोर्स

आप स्पेशल एजुकेशन या उससे संबंधित विभिन्न विषयों में डिप्लोमा एवं डीएड कोर्स कर सकते हैं.

डिप्लोमा कोर्स : कम्युनिटी बेस्ड रिहैबिलिटेशन, अर्ली चाइल्डहुड स्पेशल एजुकेशन (हियरिंग इम्पेर्मेन्ट, मेंटल रिटार्डेशन), हियरिंग एड रिपेयर एंड ईयर मोड टेक्नोलॉजी, हियरिंग लैंग्वेज एंड स्पीच, इंडियन साइन लैंग्वेज इंटरप्रिटेंशन, प्रॉस्थेटिक एंड ऑर्थोटिक्स, रिहैबिलिटेशन थेरेपी, वोकेशनल रिहैबिलिटेशन (मेंटल रिटार्डेशन), कंप्यूटर एजुकेशन (विजुअल इम्पेर्मेन्ट) विषयों में डिप्लोमा कर सकते हैं.

डीएड : ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसॉर्डर, सेरेब्रल पाल्सी, डीफ ब्लांइड, हियरिंग इम्पैर्मेन्ट, मल्टीपल डिसएब, डिसेबिलिटी, मेंटल रिटार्डेशन, विजुअल इम्पेर्मेन्ट में डीएड स्पेशल एजुकेशन कर सकते हैं.

रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यताप्राप्त संस्थान, जो इन कोर्सेज को संचालित करते हैं, उनके बारे में जानने के लिए आरसीआइ की वेबसाइट देखें. टेस्ट का पाठ्यक्रम और पैटर्न की जानकारी भी वेबसाइट से प्राप्त कर सकते हैं

प्रवेश के लिए योग्यता

किसी भी मान्यताप्राप्त बोर्ड से न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों में 12वीं पास अभ्यर्थी अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित होनेवाले एआइओएटी के लिए आवेदन कर सकते हैं.

आरसीआइ की वेबसाइट देखें : http://www.rehabcouncil.nic.in/default.aspx

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दिल्ली ब्यूरो

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By दिल्ली ब्यूरो

दिल्ली ब्यूरो is a contributor at Prabhat Khabar.

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