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फॉरेंसिक साइंस : बारीक नजर तय करेगी सफलता का सफर

By दिल्ली ब्यूरो
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फॉरेंसिक साइंस में करियर
फॉरेंसिक साइंस में करियर
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दिल्ली : क्राइम शोज में किसी जुर्म की पड़ताल देखना हममे से कईयों को रोचक लगता है. हमारे बीच कुछ युवा ऐसे भी हैं, जो किसी घटना से जुड़े छोटे-छोटे सुराग के जरिये मुजरिम तक पहुंचने और उनसे संबंधित वैज्ञानिक पहलुओं को समझने के काम को पेशे रूप में अपनाना चाहते हैं. यदि आप भी ऐसे युवाओं में से एक हैं, तो फॉरेंसिक साइंस के माध्यम से अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं.

जानें इस विज्ञान के बारे में

फॉरेंसिक साइंस विज्ञान की वह शाखा है, जिसमें किसी अपराध की जांच करने एवं उसे अंजाम देनेवाले मुजरिम तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिक सिद्धांतों की मदद ली जाती है. फॉरेंसिक एक्सपर्ट नयी तकनीकों का उपयोग करते हुए घटना की तहकीकात करते हैं.

इसके लिए एक्सपर्ट ब्लड, बॉडी फ्लूड, हेयर, फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट, टिशू आदि की मदद लेते हैं. यदि आप भी साइंस बैकग्राउंड के छात्र हैं और जुर्म करनेवाले को किसी भी हाल में सामने लाने का जनून रखते हैं, तो फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं.

प्रवेश के लिए योग्यता

फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में प्रवेश के लिए आपका साइंस स्ट्रीम से बारहवीं पास होना आवश्यक है. साइंस स्ट्रीम से बारहवीं करने के बाद आप फॉरेंसिक साइंस के साथ स्नातक कर सकते हैं. वहीं साइंस स्ट्रीम से स्नातक करने के बाद आप फॉरेंसिक साइंस और क्रिमिनोलॉजी में एक वर्षीय डिप्लोमा कोर्स भी कर सकते हैं. मास्टर डिग्री करने के लिए आपको फिजिक्स, केमिस्ट्री, जूलोजी, बॉटनी, बायोकेमिस्ट्री, माइक्रोबायोलॉजी, बी फार्मा, बीडीएस और अप्लाइड साइंस में से किसी एक विषय के साथ न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों से स्नातक पास करना होगा.

यदि आप फॉरेंसिक स्पेशलिस्ट यानी वे साइंटिस्ट, जो घटना के दौरान किसी की मृत्यों के कारण जानने का प्रयास करते हैं, बनना चाहते हैं, तो आपको एमबीबीएस डिग्री प्राप्त करनी होगी और इसके बाद फॉरेंसिक साइंस में एमडी भी करना होगा.

कुछ गुणों का होना है आवश्यक

यह क्षेत्र उन युवाओं के लिए बेहतर है, जो जिज्ञासु और साहसिक कार्यों में दिलचस्पी रखते हैं. इस क्षेत्र में प्रवेश करनेवाले अभ्यर्थी के पास अच्छे ज्ञान के साथ कुछ विशेष गुणों का होना भी आवश्यक होता है. किसी भी क्रिमिनल को खोज पाना आसान नहीं होता. इसी के चलते इस क्षेत्र में प्रवेश करनेवाले युवा में चीजों को जानने की जिज्ञासा, सावधानीपूर्वक कार्य करने की क्षमता, बुद्घिमता, टीम वर्क, तार्किक और नियमपूर्वक कार्य करने की विशेषता का होना अत्यंत आवश्यक है.

हर कदम पर सामने आयेंगी नयी चुनौतियां

अपराधिक घटना को अंजाम देनेवाला हर शख्स सबूतों को मिटाने का हर मुमकिन प्रयास करता है. जाहिर है कि फॉरेंसिक प्रोफेशनल्स के लिए घटना स्थल से प्राप्त होनेवाले सबूतों को इकट्ठा करना और वैज्ञानिक प्रयोगों के आधार पर उनका विश्लेषण करना आसान नहीं होता.

एक फॉरेंसिक एक्सपर्ट के रूप में आपको घटना से संबंधित विभिन्न प्रकार के प्रूफ जैसे ब्लड सैंपल, सलाइवा, शरीर के दूसरे पदार्थ, बाल, फिंगर प्रिंट्स, पैरों के निशान, यूरीन में पाये जानेवाले अल्कोहल, स्पर्म, विस्फोटक पदार्थ आदि की फॉरेंसिक जांच करनी होती है. इन सबूतों के आधार पर रिपोर्ट तैयार कर पुलिस व कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करनी होती है.

कहां-कहां हैं काम के अवसर

फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए सरकारी और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों में जॉब की अच्छी संभावनाएं हैं. गवर्नमेंट एजेंसी की बात करें, तो फॉरेंसिक साइंटिस्ट के रूप में आप इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इनवेस्टिगेशन (सीबीआई), स्टेट पुलिस फोर्स के क्राइम सेल, गवर्नमेंट व स्टेट फॉरेंसिक लैब में काम कर सकते हैं. वहीं प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी आदि में भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट के लिए अच्छी संभावनाएं उपलब्ध हैं. इसके अलावा आप फॉरेंसिक टीचर के रूप में भी कैरियर बना सकते हैं.

कर सकते हैं स्पेशलाइजेशन

फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए आप इससे संबंधित क्षेत्रों में से किसी एक में स्पेशलाइजेशन भी कर सकते हैं. जैसे, क्राइम सीन इनवेस्टिगेशन में सुरक्षा, सबूत से संबंधित वस्तुओं को निर्धारित एवं एकत्र करना होता है, सबूतों की गहरायी से जांचना और चल रही घटनाक्रम का फिर से यथासंभव निर्माण करने की कोशिश करना शामिल है. फॉरेंसिक पैथोलॉजी/ मेडिसिन फॉरेंसिक पैथोलॉजिस्ट का कार्य हत्या या आत्महत्या के केस में मौत के कारण और समय का पता लगाना होता है.

फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजी के अंतर्गत मानव कंकाल का अध्ययन किया जाता है और उनकी पहचान की जाती है. किसी भी तरह के डिजास्टर्स जैसे, प्लेन क्रैश, विस्फोट, आग व अन्य कारणों से मृत्यु होने पर फॉरेंसिक एंथ्रोपोलॉजिस्ट को बुलाया जाता है. फॉरेंसिक साइकोलॉजी में क्राइम के समय दोषी की मानसिक स्थिति का पता करना और कोर्ट के कार्रवाई के समय व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ है या नहीं, इन सभी बातों का पता लगान होता है.

इन संस्थानों से कर सकते हैं पढ़ाई

- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी.

- उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद.

- गुरू गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यलाय, दिल्ली.

- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी.

- कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र, हरियाणा.

- मुंबई विश्वविद्यालय.

- बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ.

posted by : sameer oraon

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