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डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों से सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का किया आह्वान

Updated at : 06 Jul 2020 5:50 PM (IST)
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डॉ हर्षवर्धन ने वैज्ञानिकों से सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का किया आह्वान

Bengal news, Kolkata news : केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन (Dr Harshvardhan) ने कोविड-19 महामारी (Covid 19 Pandemic) के बीच देश के वैज्ञानिकों से सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया. डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी (Dr Shyamaprasad Mukherjee) की 119 वीं जयंती पर इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस (IACS) और विवेकानंद विज्ञान मिशन (Vivekananda Science Mission) के पश्चिम बंगाल चैप्टर (West Bengal Chapter) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार (Webinars) को संबोधित करते हुए डॉ हर्षवर्धन ने ये बातें कहीं.

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Bengal news, Kolkata news : कोलकाता : केंद्रीय विज्ञान व प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन (Dr Harshvardhan) ने कोविड-19 महामारी (Covid 19 Pandemic) के बीच देश के वैज्ञानिकों से सामाजिक प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आह्वान किया. डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी (Dr Shyamaprasad Mukherjee) की 119 वीं जयंती पर इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टिवेशन ऑफ साइंस (IACS) और विवेकानंद विज्ञान मिशन (Vivekananda Science Mission) के पश्चिम बंगाल चैप्टर (West Bengal Chapter) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित वेबिनार (Webinars) को संबोधित करते हुए डॉ हर्षवर्धन ने ये बातें कहीं.

उन्होंने डॉ मुखर्जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि वैज्ञानिक अनुसंधान पर दृष्टि और नये निर्माण में डॉ मुखर्जी का विचार आज प्रासंगिक है. इस अवसर पर उन्होंने ‘डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के भारतीय विज्ञान के विकास में योगदान पर’ ई-बुक (E-book) का अनावरण किया.

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उन्होंने वैज्ञानिकों से सर सीवी रमन (CV Raman) की विरासत को फिर से पुनर्जीवित करने का आग्रह किया. श्री रमन एकमात्र भारतीय हैं, जिन्हें आइएसीएस में काम करते हुए 1930 में विज्ञान का नोबेल पुरस्कार मिला था. उन्होंने कहा कि रमन ने अल्प सुविधाओं के साथ काम किया था, जबकि आज भारतीय वैज्ञानिक प्रतिष्ठान किसी भी अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के बराबर हैं.

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत को दुनिया में वैज्ञानिक रूप से उन्नत देशों में 2030 तक शामिल करने का लक्ष्य रखा है. वैज्ञानिकों को राष्ट्र की उम्मीदों को पूरा करने के लिए अपने प्रयासों को दोगुना करना होगा. भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी को नये सिरे से व्याख्या करने की जरूरत है. मौलिक अनुसंधान के साथ-साथ अनुप्रयोग अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है.

उन्होंने कहा कि हमें अब अपना दृष्टिकोण बदलने की जरूरत है. 72 वर्षों के बाद भी देश कई मूलभूत समस्याओं का सामना कर रहा है. मैं आश्वस्त हूं, विज्ञान उन मुद्दों का समाधान पा सकता है. वैज्ञानिकों को इसे संभव बनाने के लिए सामाजिक रूप से प्रतिबद्ध होने की जरूरत है. यह जब दुनिया भर में मानव जाति अभूतपूर्व कोविड-19 महामारी से लड़ रही है, तब सभी अधिक प्रासंगिक है.

आइएसीएस की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष प्रो एमएम शर्मा का संदेश का पाठ किया गया, जबकि आइएसीएस के निदेशक प्रोफेसर संतनु भट्टाचार्य ने डॉ मुखर्जी के आधुनिक विज्ञान और भारत को विकसित करने में डॉ मुखर्जी की भूमिका पर प्रकाश डाला. कार्यक्रम के आयोजन में विवेकानंद विज्ञान मिशन के अध्यक्ष प्रोफेसर पल्लव बनर्जी, विज्ञान भारती के राष्ट्रीय सांगठनिक सचिव जयंत सहस्त्रबुधे, विवेकानंद विज्ञान मंच के उपाध्यक्ष डॉ जिष्णु बसु और विवेकानंद विज्ञान मिशन के सचिव डॉ अयान दत्ता की महत्वपूर्ण भूमिका रही.

Posted By : Samir ranjan.

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