ओडिशा में फिर बांग्लाभाषी का शव मिला, संदिग्ध स्थिति में प्रवासी मजदूर की मौत

Author Ashish Jha
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ओडिशा में फिर बांग्लाभाषी का शव मिला, संदिग्ध स्थिति में प्रवासी मजदूर की मौत

सांकेतिक

Bengal News: बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के बनगाँव थाना अंतर्गत सुभाषपल्ली निवासी संजय दास के परिजनों ने आरोप लगाया है कि संजय की मौत सामान्य नहीं है, बल्कि ‘बंगाली विद्वेष’ के कारण उनकी हत्या की गई है.

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Bengal News: बनगांव. ओडिशा में काम करने गये उत्तर 24 परगना जिले के बनगांव निवासी एक प्रवासी मजदूर की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है. पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान संजय दास (40) के रूप में हुई है. वह बनगांव थाना क्षेत्र के सुभाषपल्ली का निवासी था. परिजनों ने आरोप लगाया कि बंगाली होने के कारण उसे वहां परेशान किया जाता था और उसकी हत्या की गयी है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है. पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है.

क्या है पूरा मामला?

संजय दास पिछले कुछ महीनों से ओडिशा के बलांगीर थाना क्षेत्र में एक कंपनी में सेंटिंग का काम कर रहे थे. जानकारी के मुताबिक, संजय दास कुछ महीने पहले ही ओडिशा गया था, जहां पानी में डूबने से उसकी मौत हो गयी. परिवार के अनुसार, 14 अप्रैल को खबर आई कि पानी में डूबने से उनकी मृत्यु हो गई है. संजय के साथ उनके साले स्वप्न घोष भी वहीं काम करते थे, जिन्होंने फोन पर मौत की सूचना दी थी. जब उनका पार्थिव शरीर बनगांव पहुंचा, तो कोहराम मच गया.

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परिजनों के गंभीर आरोप

  • संजय की रिश्तेदार शिवानी दास और बेटी संचिता दास का दावा है कि यह एक सुनियोजित हत्या है.
  • संजय कंपनी में एक अच्छे पद पर थे, जिससे उनके सहकर्मी उनसे ईर्ष्या करते थे.
  • संजय ने हाल ही में फोन पर बताया था कि ‘बंगाली’ होने के कारण उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित और परेशान किया जा रहा है.

निष्पक्ष जांच की मांग

परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने ओडिशा के स्थानीय थाने में शिकायत करने की कोशिश की, तो पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. मृतक के परिवार और पड़ोसियों का कहना है कि संजय की मौत पूरी तरह से संदिग्ध है. उसे मारा गया है. उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार और पुलिस प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके. बंगाल में अभी विधानसभा का चुनाव चल रहा है और प्रवासी मजदूरों की हत्या एक बड़ा मुद्दा बन चुका है.

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आशीष झा

लेखक के बारे में

By आशीष झा

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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