बंगाल में पहचान की लड़ाई, भाजपा के ‘घुसपैठिये’ से ममता की ‘बंगाली अस्मिता’ का मुकाबला

Author Ashish Jha
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ममता बनर्जी और अमित शाह

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Bengal Election : बंगाल में जैसे-जैसे चुनाव प्रचार गति पकड़ रहा है, वैसे वैसे पहचान पर आधारित लामबंदी तेज होती जा रही है. बंगाली अस्मिता एक बार फिर एक प्रमुख अंतर्धारा के रूप में उभरता दिख सकता है.

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Bengal Election : कोलकाता. बंगाल की चुनावी चर्चा धीरे-धीरे तृणमूल और भाजपा के बीच तीखे वैचारिक टकराव की ओर बढ़ रहा है. बंगाल, जहां ऐतिहासिक रूप से चुनावी चर्चा खुले तौर पर सांप्रदायिक राजनीति से अपेक्षाकृत अछूती रही है, धीरे-धीरे तृणमूल और भाजपा के बीच तीखे वैचारिक टकराव की ओर बढ़ रहा है. भाजपा जहां हिंदूत्व का नारा एक बार फिर जोरशोर से उठा रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस बंगाल अस्मिता को लेकर मुखर हो गयी है.

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हिंदी को लेकर तृणमूल ने भाजपा को घेरा

तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ लड़ाई में हमेशा ‘बंगाली-गैर-बंगाली’ का नारा इस्तेमाल किया है. इस विधानसभा चुनाव में भी तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ ‘बंगाल का वंचन-बंगाली का वंचन’ का नारा लेकर मैदान में उतरी है. यह नारा चुनाव प्रचार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भाजपा इस बार अपने उम्मीदवारों की सूची हिंदी में प्रकाशित की है. लोगों का मानना ​​है कि सूची हिंदी में प्रकाशित करके भाजपा ने पहले से आक्रामक तृणमूल कांग्रेस को एक और राजनीतिक ‘हथियार’ सौंप दिया है.

बांग्ला भाषी पर हमले को बनाया मुद्दा

बंगाल में एसआईआर कराने का मुद्दा सियासी खींचतान के केंद्र में है ही, भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी प्रवासियों पर हो रहे हमलों के खिलाफ भी तृणमूल नेता सड़कों पर हैं. संसद में आक्रामक रूप से अभियान चला रखे हैं. भाजपा के खिलाफ ‘बोहिरागोटो’(बाहरी) का मुद्दा तृणमूल के लिए पिछले कुछ चुनावों में कारगर साबित हुआ है. प्रवासी उत्पीड़न के संदर्भ में बंगाली उप-राष्ट्रवाद का मुद्दा इसबार उसका ही विस्तार है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा पर ‘बंगाली पहचान पर हमले’ का आरोप लगाया है.

विपक्षी दलों के पास टीएमसी के खिलाफ दो मुद्दे प्रमुख

भ्रष्टाचार और बेरोजगारी दो ऐसे मुद्दे हैं जो तृणमूल के खिलाफ विपक्षी दलों का धारदार हथियार हो सकता है. वैसे प्रधानमंत्री ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि भाजपा अपने चुनाव अभियान में ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को प्रमुखता से रखेगी. भाजपा ने ‘उद्योगों के पलायन’ का आरोप लगाते हुए राज्य को ‘उद्योगों का कब्रिस्तान’ करार दिया. पार्टी नेताओं का दावा है कि पिछले 14 वर्षों में 6,000 से अधिक कंपनियां बंगाल से बाहर चली गई हैं और उनकी दलील है कि राज्य व्यापार शिखर सम्मेलन से प्राप्त निवेश प्रस्तावों में से केवल लगभग तीन प्रतिशत ही जमीन पर उतर पाए हैं, जिससे राज्य ‘मजदूर निर्यात अर्थव्यवस्था’बन गया है.

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भाजपा बनायेगी घुसपैठ को चुनावी मुद्दा

भाजपा घुसपैठ को ममता के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा मान रही है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुस्लिम बहुल सीमावर्ती जिले मालदा में एक रैली के दौरान तृणमूल सरकार पर घुसपैठ के मुद्दे को लेकर निशाना भी साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर अवैध घुसपैठ से जनसांख्यिकी बदल गई है और दंगों को बढ़ावा मिला है. प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि तृणमूल के ‘संरक्षण और सिंडिकेट राज’ के कारण यह फल-फूल रहा है. इसी के साथ उन्होंने स्पष्ट संदेश दे दिया कि भाजपा अपने चुनाव अभियान में ‘घुसपैठियों’ के मुद्दे को प्रमुखता से रखेगी.

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