चुनाव आयोग पर भड़की ममता बनर्जी, नौरकशाहों के तबादले पर ज्ञानेश कुमार को लिखा पत्र

Author Ashish Jha
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ममता बनर्जी

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Mamata Banerjee: ममता बनर्जी ने पत्र में सवाल उठाया है कि प्रशासनिक अधिकारियों का तबादला कैसे हुआ. उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार से तीन अधिकारियों का एक पैनल बनाने को कहता था. उनमें से एक का चयन किया जाता था.

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Mamata Banerjee: कोलकाता: चुनाव से पहले प्रशासन और पुलिस के शीर्ष पदों पर अचानक फेरबदल पर बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भड़क गयी हैं. मुख्यमंत्री ने इस संबंध में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखा है. उन्होंने बिना राज्य सरकार से अधिकारियों के पैनल मांगे नए अधिकारियों की नियुक्ति पर सवाल उठाये हैं. पत्र में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को ‘प्रिय श्री ज्ञानेश कुमार’ कहकर संबोधित किया. पत्र में उन्होंने लिखा-मैं यह पत्र अत्यंत दबाव में लिख रही हूं. इस आदेश में राज्य प्रशासन के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है और कुछ की नियुक्ति मनमाने ढंग से की गई है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि मुख्य सचिव, सचिव (गृह एवं पर्वतीय मामलों के अधिकारी), पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक और राज्य प्रशासन के अन्य वरिष्ठ कर्मचारियों को उनके पदों से हटा दिया गया है.

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नौकरशाहों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा कि हटाए गए नौकरशाहों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं है. यह निर्णय क्यों लिया गया. उन्होंने लिखा, ये तबादले बिना किसी ठोस कारण के किए गए हैं और यह कदम चुनाव संचालन में कानून के उल्लंघन, कदाचार या लापरवाही के किसी भी आरोप के बिना उठाया गया है. देश के कानून का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी लिखा-भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 13सीसी और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 28ए के अनुसार, चुनाव संबंधी कार्यों में लगे प्रशासनिक अधिकारी चुनाव के दौरान चुनाव आयोग के अधीन कार्य करते हैं. वे चुनाव संबंधी कार्यों में लगे रहते हैं. इस दौरान उनके तबादले आयोग के अधिकार क्षेत्र में होते हैं. हालांकि, राज्य सरकार से चर्चा करने के बाद ही कोई भी निर्णय लिया जाता है.

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धर्मतला रैली में फूंटा गुस्सा

ममता बनर्जी ने याद दिलाया कि इस दौरान नए प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति कैसे हुई थी. उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार से तीन अधिकारियों का एक पैनल बनाने को कहता था. उनमें से एक का चयन किया जाता था. हालांकि, आयोग ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की. तृणमूल प्रमुख ने धर्मतला में एक रैली से आयोग के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया. वहां से उन्होंने कहा-नंदिनी सीएस. बंगाली महिलाएं. वे न केवल बंगाली विरोधी हैं, बल्कि हिंदू विरोधी भी हैं. हिंदी विरोधी. मैं इसे साबित कर रही हूँ. तुमने नंदिनी को बेरहमी से पीटा और आधी रात को उसे घर से बाहर निकाल दिया. क्या तुमने एक बार भी राज्य सरकार से पूछना जरूरी नहीं समझा. वो भी भाजपा से मध्यस्थता करते हुए. तुम्हारे साथ धिक्कार हो.

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