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Budget 2023 : 400 अतिरिक्त वंदे भारत ट्रेन और नई हाई स्पीड ट्रेनों को चला सकती है सरकार

Updated at : 01 Feb 2023 7:49 AM (IST)
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Budget 2023 : 400 अतिरिक्त वंदे भारत ट्रेन और नई हाई स्पीड ट्रेनों को चला सकती है सरकार

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले केंद्रीय बजट में अगले तीन साल में 400 सेमी हाईस्पीड और वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने का प्रावधान किया था. संभावना यह जाहिर की जा रही है कि इस साल के बजट में भी 400 अतिरिक्त सेमी हाईस्पीड और नई वंदे भारत ट्रेनों को चलाने की योजना का प्रावधान किया जा सकता है.

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नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी एक फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2023 पेश करेंगी. इसी केंद्रीय बजट के साथ रेल बजट भी पेश किया जाएगा. वर्ष 2017 में संसद में अलग से पेश होने वाले रेल बजट को समाप्त करके आम बजट में विलय कर दिया गया था. इस वजह से रेल बजट की चमक धीरे-धीरे फीकी पड़ने लगी है, लेकिन ट्रेनों से सफर करने वालों के उत्साह में कमी नहीं आई है. हर कोई यह जानने का प्रयास करता है कि केंद्रीय बजट में उनके राज्य और जिले में रेल लाइनों के विस्तार और नई ट्रेनों को चलाने के लिए सरकार की ओर से क्या प्रावधान किया गया है. खासकर, आज भी आम लोगों में बजट से नई ट्रेनों को चलाने, नए रेलवे रूट के निर्माण और नए किराए के बारे में जानने की उत्सुकता अधिक होती है.

नई ट्रेनों को चलाने की हो सकती है घोषणा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले वित्त वर्ष 2022-23 के लिए पेश केंद्रीय बजट में अगले तीन साल में 400 सेमी हाईस्पीड और अगली पीढ़ी की वंदे भारत ट्रेनों को शुरू करने का प्रावधान किया था. संभावना यह जाहिर की जा रही है कि पिछले साल के बजट में वित्त मंत्री ने सेमी हाईस्पीड और वंदे भारत ट्रेन चलाने की जो घोषणा की थी, इस साल के बजट में उसके अलावा 400 अतिरिक्त सेमी हाईस्पीड और नई वंदे भारत ट्रेनों को चलाने की योजना का प्रावधान किया जा सकता है.

हाईस्पीड और वंदे भारत चलाने के पीछे सरकार का तर्क

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सेमी हाईस्पीड और वंदे भारत ट्रेनों को चलाने के पीछे सरकार का दो तर्क है. पहला, यह देश में हाईस्पीड ट्रेनों के जरिए राजधानी और शताब्दी ट्रेनों की संख्या को धीरे-धीरे कम किया जा सके, ताकि प्रमुख रेल रूटों पर ट्रेनों की स्पीड बढ़ाकर 180 किलोमीटर प्रति घंटे किया जा सके. दूसरा तर्क यह है कि रेलवे वर्ष 2025-26 तक यूरोप, दक्षिण अमेरिका और पूर्वी एशिया के बाजारों में निर्यात के लिए ट्रेनों के निर्माण की योजना बना रहा है.

2026 तक वंदे भारत ट्रेनों का होगा निर्यात

रिपोर्ट के अनुसार, अभी हाल ही में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा था कि वित्त वर्ष 2026 तक भारत स्टैंडर्ड-गेज वंदे भारत ट्रेनों का निर्यात शुरू कर देगा. उन्होंने कहा कि अगर सरकार की योजना सफल हो गई, तो भारत उन आठ देशों में शामिल जाएगा, जिनके पास 180 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति वाली ट्रेनों का निर्माण करने की क्षमता है. बता दें कि सरकार वंदे भारत ट्रेन में स्लीपर क्लास जोड़ने की भी घोषणा कर सकती है, जिसे कथित तौर पर वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही में लॉन्च किया जा सकता है.

नई रेल पटरियां बिछाने का प्रस्ताव

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, एक फरवरी को पेश होने वाले बजट में सरकार अगले 25 वर्षों में 1,00,000 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाने का भी प्रस्ताव कर सकती है. इसका उद्देश्य देश में सेमी-हाई-स्पीड ट्रेनों की बढ़ती संख्या को बढ़ाने के लिए नेटवर्क का आधुनिकीकरण करना और ट्रेन की गति को बढ़ाना है. केंद्रीय बजट 2023-24 में वित्त वर्ष 2024 में 7,000 किलोमीटर ब्रॉड गेज रेलवे लाइनों के विद्युतीकरण और पूरे नेटवर्क के विद्युतीकरण को पूरा करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये अलग रखने की भी संभावना है.

Also Read: आम बजट से रेल बजट को अलग करने की उठी मांग, बोले नीतीश कुमार- जैसे पेश होता था उसी तरह से पेश हो
बुलेट ट्रेन चलाने का ऐलान

संभावना यह भी जाहिर की जा रही है कि केंद्रीय बजट 2023-24 में अहमदाबाद-मुंबई बुलेट ट्रेन परियोजना को पूरा करने के लिए बजटीय आवंटन में भी वृद्धि देखी जा सकती है. रेल मंत्री वैष्णव ने हाल ही में कहा था कि भारत को 2026 तक अपनी पहली बुलेट ट्रेन मिल जाएगी. मंत्री ने कहा कि 110 किमी का ट्रैक पहले ही बनाया जा चुका है, लेकिन डिजाइन की जटिलता के कारण विलंबित परियोजना के 2026 तक पूरा होने की संभावना है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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