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झमाझम बारिश में गरमागरम चाय-पकौड़े का मजा हो गया किरकिरा, क्योंकि कोरोना काल में...

Updated at : 23 Jul 2020 5:53 PM (IST)
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झमाझम बारिश में गरमागरम चाय-पकौड़े का मजा हो गया किरकिरा, क्योंकि कोरोना काल में...

अप्रैल और मई में कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से देश में लागू लॉकडाउन (Lockdown) और फिर उसके बाद असम (Assam) में भारी बारिश (Heavy rain) से आयी बाढ़ (Flood) से चाय की फसल (Tea crop) को काफी नुकसान (Loss) पहुंचा है. उद्योग विशेषज्ञों की अगर मानें, तो इन दोनों कारणों से इससे चाय के उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गयी है. इसके चलते घरेलू बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय के दाम करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से इजाफा हो गया है.

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Tea price hike in India : अगर आप झमाझम बारिश (Rain showers) में गरमागरम चाय-पकौड़े (Hot tea-fritters) का मजा लेने वाले हैं या फिर बिना बेड टी (Bed tea) के आपकी सुबह की शुरुआत नहीं होती, तब जरा सावधान हो जाएं. भरी बारिश में गरमागरम पकौड़े के साथ चाय का मजा किरकिरा हो गया है. इसके साथ ही, सुबह-सवेरे एक कप चाय की चुस्की लेना भी महंगा हो गया है.

इसका कारण यह है कि अप्रैल और मई में कोरोना वायरस (Coronavirus) की वजह से देश में लागू लॉकडाउन (Lockdown) और फिर उसके बाद असम (Assam) में भारी बारिश (Heavy rain) से आयी बाढ़ (Flood) से चाय की फसल (Tea crop) को काफी नुकसान (Loss) पहुंचा है. उद्योग विशेषज्ञों की अगर मानें, तो इन दोनों कारणों से इससे चाय के उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की गयी है. इसके चलते घरेलू बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय के दाम करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से इजाफा हो गया है.

भारतीय चाय संघ (आईटीए) के अनुमान के अनुसार, उत्तर भारत असम और उत्तरी बंगाल में इस साल जनवरी से जून के दौरान पिछले साल की समान अवधि की तुलना में चाय का उत्पादन 40 फीसदी घटा है. भारत चाय उत्पादन में दुनिया में दूसरे नंबर पर है. उधर, कई व्यापारिक सूत्रों का कहना है कि कि मूल्य वृद्धि भारतीय चाय उद्योग की मदद कर सकती है, क्योंकि चाय उद्योग पहले से काफी परेशानियों का सामना कर रहा है. हालांकि, भारतीय चाय की कीमतें बढ़ने से वैश्विक बाजार में केन्या और श्रीलंका की चाय को वरीयता मिल सकती है.

आईटीए के सचिव अरिजीत राहा ने कहा कि हम जुलाई के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं. ये अगले कुछ दिन में आएंगे. आईटीए ने कहा कि अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में श्रमबल की कमी की वजह से हरी पत्तियों की तुड़ाई काफी कम रही है, जिससे उत्पादन प्रभावित हुआ है. सीटीटीए के चेयरमैन विजय जगन्नाथ ने कहा कि पिछले साल की तुलना में नीलामी में चाय के दाम मजबूत और ऊंचे हैं. उन्होंने कहा कि उद्योग को करीब 20 करोड़ किलोग्राम फसल नुकसान का अनुमान है. उन्होंने कहा कि घरेलू बाजार में अच्छी गुणवत्ता वाली चाय के दाम में करीब 100 रुपये प्रति किलोग्राम इजाफा हुआ है.

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Posted By : Vishwat Sen

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