सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम बंद, जानिए अब कैसे करें गोल्ड में निवेश

आरबीआई ने सरकार की सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम को बंद कर दिया.
SGB Scheme: एसजीबी स्कीम के बंद होने के बाद अब निवेशकों के पास गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड दो प्रमुख विकल्प हैं. दोनों ही डिजिटल गोल्ड निवेश के सुरक्षित और प्रभावी तरीके हैं, जो निवेशकों को गोल्ड में निवेश का फायदा देते हैं.
SGB Scheme: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) स्कीम को बंद कर दिया है. सोने की बढ़ती कीमतों और सरकार की उधारी लागत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया. अब निवेशकों के लिए गोल्ड ईटीएफ और गोल्ड म्यूचुअल फंड निवेश के प्रमुख विकल्प रह गए हैं.
एसजीबी स्कीम बंद होने की वजह
सरकार ने 2015 में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम की शुरुआत की थी, जिसमें निवेशकों को 2.5% का फिक्स्ड ब्याज और 8 साल की मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स फ्री लाभ मिलता था. हालांकि, अब इस योजना के तहत कोई नई किस्त जारी नहीं होगी. आर्थिक मामलों के सचिव अजय सेठ के अनुसार, यह फैसला सरकार की बजट फाइनेंसिंग और उधारी लागत को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी बजट के बाद इस फैसले की पुष्टि की है.
गोल्ड में निवेश के विकल्प
गोल्ड ईटीएफ
गोल्ड ईटीएफ (गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड) फिजिकल गोल्ड की कीमतों को ट्रैक करता है. इसे शेयर बाजार में स्टॉक की तरह खरीदा और बेचा जा सकता है.
- असली और नकली सोने की चिंता नहीं
- सेकेंडरी मार्केट में लिक्विडिटी
- एक यूनिट = 1 ग्राम गोल्ड
गोल्ड म्यूचुअल फंड
गोल्ड म्यूचुअल फंड गोल्ड ETF की यूनिट्स में निवेश करते हैं. इसमें एक फंड मैनेजर निवेश से जुड़े फैसले लेता है.
- छोटे निवेशकों के लिए बेहतरीन विकल्प
- SIP के जरिए निवेश संभव
- NAV आधारित निवेश
गोल्ड की कीमतों में तेजी जारी
ग्लोबल मार्केट में सोने का भाव 2,800 डॉलर प्रति औंस से ऊपर जा चुका है, जबकि भारत में गोल्ड की कीमत 84,900 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रंप के टैरिफ फैसले के कारण गोल्ड की कीमतों में और तेजी आ सकती है.
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लेखक के बारे में
By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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