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रिजर्व बैंक ने 7 अप्रैल से ऋण और मुद्रा बाजार के कारोबारी घंटे घटाए, 17 अप्रैल तक रहेगा जारी

Updated at : 03 Apr 2020 10:29 PM (IST)
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रिजर्व बैंक ने 7 अप्रैल से ऋण और मुद्रा बाजार के कारोबारी घंटे घटाए, 17 अप्रैल तक रहेगा जारी

कोरोना वायरस की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन (बंद) को देखते हुए रिजर्व बैंक ने मंगलवार से ऋण और मुद्रा बाजार के कारोबारी घंटे को कम करने का फैसला किया है.

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मुंबई : कोरोना वायरस की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन (बंद) को देखते हुए रिजर्व बैंक ने मंगलवार से ऋण और मुद्रा बाजार के कारोबारी घंटे को कम करने का फैसला किया है. रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को एक सर्कुलर जारी कर कहा कि सात से 17 अप्रैल 2020 तक इन बदले हुए कारोबारी घंटो में काम होगा.

रिजर्व बैंक की नयी व्यवस्था के अनुसार, बाजार सुबह नौ बजे के बजाय 10 बजे खुलेगा. वहीं, बंद होने का समय दो बजे कर दिया गया है. सर्कुलर के मुताबिक, केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों, राज्यों के विकास ऋण और ट्रेजरी बिलों सहित सरकारी प्रतिभूतियों, विदेशी मुद्रा विनिमय, रुपये और फॉरेक्स डेरिवेटिव बाजार इत्यादि सभी श्रेणियों के लिये भी कारोबार का समय नौ से पांच के बजाय बदलकर दस से दो बजे कर दिया गया है.

देशभर में लॉकडाउन की वजह से इन बाजारों के कर्मचारियों, सूचना प्रौद्योगिकी संसाधनों के साथ ही दफ्तर पहुंचने में कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, ग्राहकों के लिए आरटीजीएस, एनईएफटी, ई-कुबेर और अन्य खुदरा भुगतान प्रणालियां जैसी अन्य नियमित बैंकिंग सेवाएं पहले की ही तरह बढ़े समय में उपलब्ध रहेंगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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