मकान मालिक अब नहीं मांग सकेंगे भारी डिपॉजिट, जानें क्या कहता है नया रेंट फ्रेमवर्क
Published by : Soumya Shahdeo Updated At : 20 Mar 2026 1:31 PM
रेंट रूल्स (Photo: Freepik)
Rent Rules 2026: क्या किराएदारों के लिए बदल गए हैं नियम? जानें सिक्योरिटी डिपॉजिट और रेंट हाइक पर क्या कहता है नया सरकारी ब्लूप्रिंट और आपके राज्य में इसके लागू होने की क्या स्थिति है.
Rent Rules 2026: आजकल सोशल मीडिया पर ‘Rent Rules 2026’ को लेकर काफी चर्चा है. लोग दावा कर रहे हैं कि सरकार ने किराएदारों के लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. लेकिन सच यह है कि ये कोई नए नियम नहीं हैं, बल्कि 2021 के ‘मॉडल टेनेंसी एक्ट’ (MTA) का हिस्सा हैं. केंद्र सरकार ने इसे केवल एक ब्लूप्रिंट के तौर पर पेश किया है, जिसे मानना या न मानना पूरी तरह राज्य सरकारों की मर्जी पर है.
डिपॉजिट के नाम पर अब कितनी होगी लूट?
अक्सर बेंगलुरु जैसे शहरों में मकान मालिक 6 से 10 महीने का रेंट सिक्योरिटी के तौर पर मांगते हैं. नए फ्रेमवर्क के मुताबिक, रेजिडेंशियल घर के लिए सिक्योरिटी डिपॉजिट ज्यादा से ज्यादा 2 महीने का किराया ही हो सकता है. कमर्शियल प्रॉपर्टी के लिए इसे 6 महीने तक रखा गया है. लेकिन याद रहे, यह नियम तभी लागू होगा जब आपका राज्य इसे कानूनी रूप से अपनाएगा.
क्या मकान मालिक जब चाहे किराया बढ़ा देगा?
नहीं, नए नियमों के तहत मकान मालिक मनमर्जी से किराया नहीं बढ़ा पाएंगे. किराया कितना और कब बढ़ेगा, यह रेंट एग्रीमेंट में साफ-साफ लिखा होना चाहिए. अगर मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है, तो उसे 3 महीने पहले नोटिस देना होगा. बिना लिखित एग्रीमेंट के अब कोई भी किरायेदारी मान्य नहीं मानी जाएगी.
बिना बताए घर में घुसना क्या अब मुमकिन है?
किरायेदारों की प्राइवेसी का ख्याल रखते हुए यह प्रावधान है कि मकान मालिक बिना बताए घर नहीं आ सकता. उसे कम से कम 24 घंटे पहले सूचना देनी होगी. इसके अलावा, अगर कोई किरायेदार एग्रीमेंट खत्म होने के बाद भी घर खाली नहीं करता, तो मकान मालिक को उससे दोगुना या चार गुना जुर्माना वसूलने का अधिकार भी दिया गया है.
विवाद होने पर अब कहां जाएंगे आप?
अभी तक रेंट के मामलों में कोर्ट के चक्कर काटते सालों बीत जाते थे. इस नए फ्रेमवर्क में ‘रेंट अथॉरिटी’ और ‘रेंट कोर्ट’ बनाने का सुझाव है, ताकि विवादों का निपटारा जल्दी हो सके. उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों ने इसे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं, लेकिन दिल्ली या महाराष्ट्र जैसे राज्यों में अभी भी पुराने नियम प्रभावी हो सकते हैं.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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