RBI का आदेश, अब बैंक नहीं बांट पाएंगे मनमाना मुनाफा, जानें क्या है नया नियम

Updated at : 11 Mar 2026 11:12 AM (IST)
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RBI Dividend Payout Norms

RBI की लोगो (ANI)

RBI Dividend Payout Norms: RBI ने बैंकों के डिविडेंड पर 75% की लिमिट लगाई है. अब मुनाफा बांटने से पहले बैंकों को अपनी फाइनेंसियल हेल्थ और रेगुलेटरी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. जानिए क्या है ये नया नियम.

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RBI Dividend Payout Norms: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा दिए जाने वाले डिविडेंड (लाभांश) को लेकर नए और कड़े नियम जारी किए हैं. ये नियम 10 मार्च 2026 को घोषित किए गए हैं और फाइनेंशियल ईयर 2026-27 से लागू होंगे. सीधा मतलब यह है कि अब बैंक अपनी मर्जी से पूरा मुनाफा शेयरधारकों को नहीं बांट सकेंगे, बल्कि उन्हें अपनी फाइनेंसियल हेल्थ का खास ख्याल रखना होगा.

डिविडेंड पर 75% की कैप क्यों लगाई गई?

ANI की रिपोर्ट में कहा गया है कि RBI के नए नियमों के अनुसार, ज्यादातर कमर्शियल बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंक अब अपने कुल मुनाफे (PAT) का अधिकतम 75% हिस्सा ही डिविडेंड के रूप में दे सकते हैं. लोकल एरिया बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के लिए यह सीमा 80% तय की गई है. ऐसा इसलिए किया गया है ताकि बैंक सारा पैसा बांटने के बजाय कुछ हिस्सा सुरक्षित रखें, जिससे भविष्य में किसी भी आर्थिक संकट से निपटा जा सके.

क्या बैंक कभी भी मुनाफा बांट सकते हैं?

नहीं, इसके लिए RBI ने कुछ सख्त शर्तें रखी हैं. बैंक तभी डिविडेंड दे पाएंगे जब:

  • पिछले और वर्तमान वित्तीय वर्ष में उनका कैपिटल (पूंजी) रेगुलेटरी नियमों के अनुसार सही हो.
  • डिविडेंड देने के बाद भी बैंक के पास पर्याप्त पूंजी बची रहे.
  • बैंक का नेट प्रॉफिट (Adjusted PAT) पॉजिटिव होना चाहिए.
  • बैंक पर RBI की तरफ से कोई पाबंदी न लगी हो.

विदेशी बैंकों के लिए क्या नियम बदले हैं?

भारत में ब्रांच के रूप में काम करने वाले विदेशी बैंकों को भी अपने हेड ऑफिस में मुनाफा भेजने के लिए इन नियमों का पालन करना होगा. साथ ही, विदेशी बैंकों की ‘Wholly Owned Subsidiaries’ (पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनियां) को अब भारतीय बैंकों के बराबर ही माना जाएगा और उन पर भी वही 75% वाली लिमिट लागू होगी.

अब बैंक बोर्ड की जिम्मेदारी कितनी बढ़ेगी?

RBI ने साफ कर दिया है कि इन नियमों का पालन करवाने की पूरी जिम्मेदारी बैंक के बोर्ड की होगी. बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे डिविडेंड देने से पहले बैंक की वित्तीय मजबूती और भविष्य की जरूरतों का सही आकलन करें. नियमों का उल्लंघन करने पर बैंकों को भारी जुर्माना या सख्त कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है.

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Soumya Shahdeo

लेखक के बारे में

By Soumya Shahdeo

सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.

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