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कमाल के चमत्कारी हैं रतन टाटा के छोटे भाई, 1 साल में कमाई दोगुनी करने की रखते हैं ताकत

Updated at : 14 Oct 2024 2:23 PM (IST)
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कमाल के चमत्कारी हैं रतन टाटा के छोटे भाई, 1 साल में कमाई दोगुनी करने की रखते हैं ताकत

टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा

Noel Tata: नोएल टाटा ने ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 1999 में जब नोएल ट्रेंट के एमडी बने, तब इस कंपनी के पास केवल एक स्टोर था. आज इसकी संख्या बढ़ कर 890 से अधिक हो गई. ट्रेंट अभी टीसीएस, टाइटन और टाटा मोटर्स के बाद टाटा समूह की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है.

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Noel Tata: देश के सबसे बड़े परोपकारी दिवंगत उद्योगपति और टाटा संस के पूर्व मानद चेयरमैन रतन टाटा के छोटे भाई नोएल टाटा भी कमाल के उद्योगपति हैं. उनके हाथ ऐसा हुनर है कि वे कंपनी की कमाई दोगुनी करने के साथ-साथ निवेशकों की कमाई में भी चार चांद लगाने की ताकत रखते हैं. फिलहाल, रतन टाटा के सौतेले छोटे भाई टाटा ट्रस्ट्स के चेयनमैन नियुक्त किए गए हैं. वे टाटा ग्रुप के करीब 165 अरब डॉलर के कारोबारी साम्राज्य का नेतृत्व करेंगे. हालांकि, एन चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन के रूप में अपना काम जारी रखेंगे. आइए, रतन टाटा के छोटे भाई नोएल टाटा के चमत्कारी कामों के बारे में जानते हैं.

कमाई को दोगुनी-तिगुनी करने की कुव्वत रखते हैं नोएल टाटा

रतन टाटा के सौतेले छोटे भाई नोएल टाटा के पास आयरिश नागरिकता है, लेकिन उनकी पहचान और काम भारत से जुड़े हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, नोएल टाटा की संपत्ति करीब 12,455 करोड़ रुपये है. टाटा ग्रुप के साथ नोएल की यात्रा वर्ष 1999 में शुरू हुई थी. अभी वह ट्रेंट, वोल्टास और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन के चेयरमैन हैं. इसके साथ ही, टाटा स्टील और टाइटन के वाइस चेयरमैन भी हैं. नोएल जिन कंपनियों में चेयरमैन हैं, उनके शेयर ने निवेशकों को एक साल में दोगुनी से भी ज्यादा रिटर्न दिया है. वे एक साल में ही कमाई दोगुनी-तिगुनी करने की कुव्वत रखते हैं.

नोएल टाटा ने टाटा इंटरनेशनल का किया नेतृत्व

नोएल टाटा ने 2010 से 2021 तक टाटा इंटरनेशनल का नेतृत्व किया. इस दौरान कंपनी का रेवेन्यू 50 करोड़ डॉलर से बढ़ कर 300 करोड़ डॉलर हो गया. नवल एच टाटा और सिमोन एन टाटा के पुत्र नोएल टाटा ने ससेक्स विश्वविद्यालय (ब्रिटेन) से स्नातक किया है. उन्होंने 1994 में इनसीड से अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी कार्यक्रम की भी पढ़ाई पूरी की थी. नोएल की शादी आलू मिस्त्री से हुई है, जो दिवंगत साइरस मिस्त्री की बहन हैं. उनके तीन बच्चे हैं. इनमें दो बेटी ली टाटा और माया टाटा हैं और एक बेटा नेविल टाटा हैं.

ट्रेंट के शेयरों ने निवेशकों को दिया 292% रिटर्न

रतन टाटा के छोटे भाई नोएल टाटा के चमत्कारों का आलम यह है कि वे फिलहाल टाटा ग्रुप की जिस ट्रेंट कंपनी का नेतृत्व कर रहे हैं, उसने निवेशकों की कमाई में चार चांद लगा दिया. कंपनी ने निवेशकों की रकम को एक साल में चार गुना कर दिया. ट्रेंट के शेयर ने एक साल में निवेशकों को करीब 292% तक का बंपर रिटर्न दिया है. इसके शेयर की कीमत 2100 रुपये से बढ़कर 8231 रुपये प्रति शेयर हो गई है.

वोल्टास ने एक साल में दिया 108% तक रिटर्न

इसके अलावा, फ्रिज और वाशिंग मशीन के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाने वाली कंपनी वोल्टास ने भी निवेशकों को तगड़ा रिटर्न दिया है. इसके शेयर ने निवेशकों को एक साल में करीब 108% रिटर्न दिया है. अभी इसके शेयर की कीमत 1791 रुपये है. वहीं, टाटा ग्रुप की एक और कंपनी टाटा इन्वेस्टमेंट ने एक साल में निवेशकों को करीब 118% रिटर्न दिया है. इसके शेयर की कीमत 3233 रुपये से बढ़कर 7040 रुपये हो गई है.

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1999 में ट्रेंट के एमडी बने थे नोएल टाटा

नोएल टाटा ने ग्रुप की रिटेल कंपनी ट्रेंट के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. 1999 में जब नोएल ट्रेंट के एमडी बने, तब इस कंपनी के पास केवल एक स्टोर था. आज इसकी संख्या बढ़ कर 890 से अधिक हो गई. ट्रेंट अभी टीसीएस, टाइटन और टाटा मोटर्स के बाद टाटा समूह की चौथी सबसे बड़ी कंपनी है. अब वह जारा और मासिमो जैसे वैश्विक ब्रांडों के अलावा वेस्टसाइड, स्टार बाजार और जूडियो सहित कई ब्रांडों को मैनेज कर रही है. पिछले पांच साल में कंपनी की कमाई पांच गुना बढ़ी है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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