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पीएम किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने पर कितना लगेगा ब्याज, क्या आवेदन की प्रक्रिया

Updated at : 25 Jul 2024 12:53 PM (IST)
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पीएम किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने पर कितना लगेगा ब्याज, क्या आवेदन की प्रक्रिया

PM Kisan Credit Card

PM KCC: प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड को संक्षेप में पीएम किसान क्रेडिट कार्ड या पीएम केसीसी या फिर केसीसी भी कहते हैं. प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर लोन मुहैया कराया जाता है.

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PM KCC: मानसून के सीजन में किसान खेती-बाड़ी के काम में जुटे हुए हैं. इस समय उन्हें पैसों की सख्त जरूरत होगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले जून के महीने में पीएम किसान योजना के तहत किसानों के खातों में 2000 रुपये की किस्त भेज दी है, लेकिन उनका काम इससे ही नहीं चल जाएगा. खरीफ फसलों की खेती के लिए उन्हें और पैसों की जरूरत पड़ती है. इन जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने पीएम किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध कराई है. खेती करने के लिए किसान इस क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन भी ले सकते हैं. आइए, जानते हैं कि पीएम किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन लेने की प्रक्रिया क्या है? लोन पर ब्याज कितना लगता है और इसके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया क्या है?

पीएम किसान क्रेडिट कार्ड क्या है?

प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड को संक्षेप में पीएम किसान क्रेडिट कार्ड या पीएम केसीसी या फिर केसीसी भी कहते हैं. प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर लोन मुहैया कराया जाता है. सही मायने में देखा जाए, तो प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) एक विशेष लोन योजना है, जो किसानों को कृषि संबंधी कामों के लिए सस्ती ब्याज दरों पर लोन मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई है. इस योजना के तहत किसानों को विभिन्न कृषि कार्यों जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और कृषि उपकरणों की खरीद के लिए लोन उपलब्ध कराया जाता है. इसके अलावा, इस योजना के तहत किसानों को व्यक्तिगत जरूरतों और अप्रत्याशित खर्चों को पूरा करने के लिए भी आर्थिक सहायता दी जाती है.

पीएम किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेने पर कितना ब्याज लगता है?

खेती-बाड़ी के लिए कोई किसान प्रधानमंत्री किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत लोन लेता है, तो इस पर सालाना करीब 7 फीसदी ब्याज लगता है. सरकार की इस योजना की खासियत यह है कि किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए लोन लेने वाले किसान अगर समय पर कर्ज का भुगतान कर देते हैं, तो सरकार की ओर से उन्हें 3% की सब्सिडी दी जाती है. सरकार की ओर से सब्सिडी दिए जाने के बाद समय पर भुगतान करने वाले किसानों के लिए ब्याज दर घटकर 4% सालाना हो जाती है.

पीएम किसान क्रेडिट कार्ड से लोन कितना मिलता है?

कोई किसान खेती-बाड़ी के लिए पीएम किसान क्रेडिट कार्ड से लोन लेता है, तो उसे लोन के तौर पर कम से कम 3 लाख रुपये दिए जाएंगे. अगर लोन की रकम इससे अधिक होती है, तो फिर ब्याज दर बैंक निर्धारित करेंगे. विभिन्न बैंकों की ब्याज दरें अलग-अलग हो सकती हैं. हालांकि, सरकार भी समय-समय पर ब्याज दरों में बदलाव करती रहती है.

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पीएम किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कैसे करें?

  • किसी भी नजदीकी बैंक शाखा से आवेदन पत्र प्राप्त करें और इसे भरें.
  • इसके लिए आवश्यक दस्तावेजों में पहचान प्रत्र, भूमि के दस्तावेज और पासपोर्ट साइज फोटो के साथ आवेदन पत्र जमा करें.
  • पीएम किसान क्रेडिट कार्ड जारी करने से पहले बैंक की ओर से आपके आवेदन और दस्तावेजों की जांच की जाएगी.
  • आवेदन का सत्यापन करने के बाद आपको किसान क्रेडिट कार्ड जारी किया जाएगा.

पीएम किसान क्रेडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?

  • देश के कई बैंक पीएम किसान क्रेडिट कार्ड पाने के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी प्रदान करते हैं. बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. अधिक जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी बैंक शाखा से संपर्क कर सकते हैं.
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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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