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आधा भारत नहीं जानता है Pink Tax, जान जाएगा तो समझदारी से खरीदारी करेगा

Updated at : 04 Mar 2026 10:10 AM (IST)
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Pink Tax

Pink Tax

Pink Tax: पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है जिसे सरकार वसूलती हो. दरअसल, यह कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक कीमत निर्धारण रणनीति (Pricing Strategy) है.

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Pink Tax: क्या आपने कभी गौर किया है कि बाजार में एक ही तरह के सामान के लिए महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कीमत चुकानी पड़ती है? चाहे वह शेविंग रेजर हो, परफ्यूम हो या फिर ड्राई क्लीनिंग की सर्विस. अक्सर ‘पिंक’ यानी गुलाबी रंग या महिलाओं के लिए बनी पैकेजिंग वाली चीजों के दाम ज्यादा होते हैं. अर्थशास्त्र की भाषा में इसे ही ‘पिंक टैक्स’ (Pink Tax) कहा जाता है.

पिंक टैक्स असल में क्या है ?

पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है जिसे सरकार वसूलती हो. दरअसल, यह कंपनियों द्वारा अपनाई जाने वाली एक कीमत निर्धारण रणनीति (Pricing Strategy) है. इसके तहत कंपनियां एक जैसे उत्पादों और सेवाओं के लिए महिलाओं से पुरुषों के मुकाबले 7% से लेकर 15% तक ज्यादा पैसे वसूलती हैं. बस फर्क इतना होता है कि महिलाओं के उत्पाद अक्सर गुलाबी रंग के होते हैं या उनकी खुशबू और मार्केटिंग थोड़ी अलग होती है.

पिंक टैक्स हमारे रोजमर्रा के जीवन में हर जगह मौजूद है.

  • पर्सनल केयर प्रोडक्ट : एक ही कंपनी का पुरुषों वाला ‘ब्लू रेजर’ सस्ता होता है, जबकि वही रेजर गुलाबी रंग में ‘महिलाओं के लिए’ टैग के साथ महंगा बिकता है. यही हाल शैम्पू, साबुन और डियोड्रेंट का भी है.
  • कपड़े और एक्सेसरीज: महिलाओं के कपड़ों की सिलाई, कपड़े की बनावट और स्टाइल के नाम पर अक्सर पुरुषों के साधारण कपड़ों से ज्यादा पैसे लिए जाते हैं.
  • सेवाएं (Services): सैलून में महिलाओं के ‘हेयरकट’ की कीमत पुरुषों के मुकाबले कहीं ज्यादा होती है, भले ही बाल छोटे ही क्यों न हों. इसके अलावा, महिलाओं के कपड़ों की ड्राई क्लीनिंग भी अक्सर महंगी होती है.
  • बच्चों के खिलौने: रिसर्च में पाया गया है कि लड़कियों के लिए बने गुलाबी खिलौने, लड़कों के लिए बने वैसे ही समान खिलौनों से महंगे होते हैं.

यह क्यों गलत है ?

पिंक टैक्स भेदभावपूर्ण है क्योंकि यह सीधे तौर पर महिलाओं की आर्थिक स्थिति पर प्रहार करता है. इसे ‘जेंडर-बेस्ड प्राइसिंग’ भी कहते हैं. विडंबना यह है कि दुनिया भर में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम वेतन मिलता है (Gender Pay Gap), लेकिन उन्हें बुनियादी जरूरतों के लिए अधिक भुगतान करना पड़ता है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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