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15 मार्च से विदेश भेजा जायेगा 'आंखों से आंसू' निकालने वाला प्याज, सरकार जल्द देगी निर्यात की मंजूरी

Updated at : 02 Mar 2020 9:44 PM (IST)
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15 मार्च से विदेश भेजा जायेगा 'आंखों से आंसू' निकालने वाला प्याज, सरकार जल्द देगी निर्यात की मंजूरी

देश के आम आदमी की 'आंखों से आंसू' निकालने वाला प्याज अब 15 मार्च, 2020 से विदेश भेजा जायेगा. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर इस बाबत जानकारी दी है.

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नयी दिल्ली : आंखों से आंसू निकालने वाला प्याज अब आगामी 15 मार्च से निर्यात किया जा सकेगा. इसके लिए सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि सरकार किसानों के हित में 15 मार्च से प्याज निर्यात की अनुमति देगी. मंत्री ने ट्विटर पर लिखा है कि इस फैसले से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. सरकार ने पिछले सप्ताह करीब छह महीने से प्याज के निर्यात पर जारी पाबंदी को हटाने का निर्णय किया. इसका कारण रबी फसल अच्छी रहने से कीमतों में तीव्र गिरावट की आशंका है.

सब्जी की कीमत में तीव्र वृद्धि को देखते हुए निर्यात पर पाबंदी लगायी गयी थी. अब प्याज का दाम स्थिर हो गया है और फसल भी अच्छी होने की उम्मीद है. खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने बुधवार को ट्विटर पर लिखा था कि मार्च में फसल की आवक 40 लाख टन से अधिक रह सकती है, जो पिछले साल 28.4 लाख टन थी.

सरकार ने सितंबर 2019 में प्याज के निर्यात पर पाबंदी लगायी थी और 850 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (एमईपी) भी लगाया था. आपूर्ति और मांग में अंतर के कारण प्याज की कीमत आसमान को छूने के बीच यह कदम उठाया गया था. देश में भारी बारिश तथा महाराष्ट्र समेत प्रमुख उत्पादक राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ के कारण खरीफ मौसम में प्याज की किल्लत हो गयी थी. फिलहाल, रबी फसल की आवक शुरू हो गया है और मार्च के मध्य से इसमें तेजी आने की उम्मीद है. प्याज के निर्यात से घरेलू कीमतों में तीव्र गिरावट को थामने में मदद मिलेगी.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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