जब क्रूड था सबसे सस्ता, तब कंपनियों ने बनाया ₹1.37 लाख करोड़ का मुनाफा; अब घाटे का दावा कितना सच?
सांकेतिक तस्वीर (फोटो/ANI)
Oil Companies Profit: एक तरफ तेल कंपनियां भारी घाटे का दावा कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने रोजाना ₹116 करोड़ का मुनाफा कमाया है। आखिर क्या है तेल के खेल का असली गणित ?
Oil Companies Profit: पिछले कुछ दिनों से देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर घमासान मचा है. तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतों का हवाला देकर रेट बढ़ाने का दबाव बना रही हैं. लेकिन अगर हम वित्तीय वर्ष 2025-26 के सरकारी आंकड़ों को खंगालें, तो एक बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आती है.
रोज की कमाई ₹116 करोड़
सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, देश की चार दिग्गज तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 9 महीनों में ही 1.37 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ (Net Profit) कमाया. अगर इसे दिनों में बांटें, तो इन कंपनियों ने हर रोज ₹116 करोड़ की कमाई की है. यह आंकड़ा तब का है जब बाजार में कोई बड़ी हलचल नहीं थी और कंपनियां शांति से मुनाफा बटोर रही थीं.
कोरोना काल के बाद सबसे सस्ता था कच्चा तेल
कंपनियों के लिए पिछले साल ‘हनीमून पीरियड’ जैसा था. वित्त वर्ष 2025-26 में कच्चे तेल के औसत दाम महज 71 डॉलर प्रति बैरल रहे. यह कीमत 2020-21 के कोरोना काल के बाद का सबसे निचला स्तर है. जब कच्चा तेल सस्ता था, तब भी आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उतनी राहत नहीं मिली, जितनी कंपनियों ने अपनी बैलेंस शीट सुधारने में इस्तेमाल की.
क्या वाकई कंपनियां डूब रही हैं?
28 फरवरी 2026 को ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद कच्चा तेल उछलकर 126 डॉलर तक पहुंच गया. अब कंपनियां दावा कर रही हैं कि उन्हें हर दिन ₹2,400 करोड़ का नुकसान हो रहा है. पेट्रोल पर ₹14 और डीजल पर ₹18 प्रति लीटर का ‘अंडर-रिकवरी’ (घाटा) हो रहा है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंपनियों ने जो 9 महीनों में ₹1.37 लाख करोड़ कमाए हैं, वह इस 2 महीने के युद्ध वाले घाटे को झेलने के लिए काफी है. फिर भी, कंपनियां जनता पर बोझ डालने की तैयारी में हैं.
सरकार का ‘विंडफाल टैक्स’ बना सुरक्षा कवच
सरकार जानती है कि कंपनियां निर्यात (Export) से मोटा पैसा कमा रही हैं. इसीलिए जब कंपनियां देश के बाहर डीजल बेचकर मुनाफा कमा रही थीं, तो सरकार ने विंडफाल टैक्स को ₹21.50 से बढ़ाकर ₹55.5 प्रति लीटर कर दिया.
अकेले डीजल एक्सपोर्ट से सरकार को महीने में ₹10,500 करोड़ मिल रहे हैं. यह पैसा उस घाटे की भरपाई करता है जो सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर (₹12,000 करोड़ महीना) सहा था. मुनाफा कम न हो, इसके लिए कंपनियों ने अब ‘राशनिंग’ शुरू कर दी है. पंपों पर डीजल की बिक्री सीमित कर दी गई है और एक बार में 200 लीटर से ज्यादा तेल नहीं दिया जा रहा. यह कदम इंडस्ट्री को होने वाली सप्लाई रोकने के लिए है, ताकि कंपनियां रिटेल घाटे से बच सकें.
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By अभिषेक पाण्डेय
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