अब NSE भी होगा लिस्टेड! IPO को लेकर इन्वेस्टर्स में जबरदस्त क्रेज
NSE कैंपस (Photo: ANI)
NSE IPO: NSE इस हफ्ते अपना DRHP दाखिल कर सकता है. 5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा वैल्यूएशन के साथ यह भारत के सबसे बड़े और चर्चित IPOs में शामिल हो सकता है.
NSE IPO: भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. सूत्रों के अनुसार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) इस हफ्ते अपना ड्राफ्ट प्रोस्पेक्टस (DRHP) जमा कर सकता है. NSE का IPO भारत के इतिहास के सबसे बड़े और मच-अवेइटेड इवेंट्स में से एक है. इसकी कीमत 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी जा रही है, जो इसे भारत की टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल कर सकता है.
कौन हैं NSE के बड़े हिस्सेदार?
NSE के शेयर अभी अनलिस्टेड मार्केट में 2,000 रुपये से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं. फिलहाल इसमें कुछ बड़े संस्थानों का दबदबा है:
- LIC: 10% से अधिक की हिस्सेदारी.
- SBI और SBI कैपिटल मार्केट्स: कुल मिलाकर करीब 7% से ज्यादा.
- SHCIL: 4.4% हिस्सा.
- ट्रेडिंग मेंबर्स: करीब 35% हिस्सेदारी इनके पास है.
क्या खराब मार्केट में IPO सही फैसला है?
फिलहाल भारतीय बाजार दबाव में है. विदेशी इन्वेस्टर्स (FPI) लगातार पैसा निकाल रहे हैं, जिसका बड़ा कारण जियोपॉलिटिकल तनाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी (95 के करीब) है. इसके अलावा, ग्लोबल इन्वेस्टर्स अपना पैसा AI और टेक्नोलॉजी वाली एशियाई मार्केट्स में शिफ्ट कर रहे हैं. हालांकि, घरेलू इन्वेस्टर्स की SIP और म्यूचुअल फंड्स की ताकत ने बाजार को अभी तक एक बड़े क्रैश से बचा रखा है. बर्नस्टीन जैसी ब्रोकरेज फर्मों ने चेतावनी दी है कि अगर बाजार लंबे समय तक कमजोर रहता है, तो इन्वेस्टर्स का धैर्य जवाब दे सकता है.
क्या इतिहास खुद को दोहराएगा?
दुनिया भर में जब भी शेयर एक्सचेंजों (जैसे Nasdaq, HKEx, या NYSE) ने खुद को लिस्ट किया है, उसके बाद का दशक अक्सर उनके शेयर सूचकांकों के लिए बहुत अच्छा रहा है. इन लिस्टिंग्स से पारदर्शिता बढ़ी और इन्वेस्टर्स का भरोसा मजबूत हुआ. NSE के MD और CEO आशीष चौहान के मुताबिक, भारत में डीमैट अकाउंट्स 20 करोड़ का आंकड़ा पार कर चुके हैं और अब देश के 99.85% पिन कोड्स तक मार्केट की पहुंच है. पिछले 30 सालों में निफ्टी ने लगभग 12.7% का सालाना रिटर्न दिया है.
आगे क्या हो सकता है?
NSE ने अपनी गवर्नेंस और कामकाज को पहले ही काफी बेहतर कर लिया है, जो कि लिस्टिंग के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है. अगर दुनिया भर के बाकी एक्सचेंजों का इतिहास देखें, तो लिस्टिंग के बाद का दशक बेहतर रहा है. अगर निफ्टी अपने पुराने रिकॉर्ड के हिसाब से 11–13% की ग्रोथ बरकरार रखता है, तो जानकारों का मानना है कि 2035 तक निफ्टी 38,000 से 42,000 के स्तर तक पहुंच सकता है.
यह लिस्टिंग केवल एक कंपनी का शेयर बाजार में आना नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत का एक नया अध्याय है.
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By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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