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Mehbooba Mufti: कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाने के प्रस्ताव पर महबूबा मुफ्ती भड़कीं, बोलीं- खत्म हो जाएगा शिल्प उद्योग

Updated at : 21 Dec 2024 6:34 PM (IST)
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Mehbooba Mufti

मीडियाकर्मियों को संबोधित करतीं महबूबा मुफ्ती.

Mehbooba Mufti: राजस्थान के जैसलमेर में शनिवार 21 दिसंबर 2024 को जीएसटी परिषद की बैठक में कश्मीरी शॉल समेत रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी दर बढ़ाने के प्रस्ताव पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती भड़क गईं. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को राज्य के हस्तशिल्प उद्योग को बचाने की नसीहत देने के साथ केंद्र सरकार पर दनादन आरोप लगाए. खबर विस्तार पढ़ें...

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Mehbooba Mufti: रेडीमेड कपड़ों समेत कश्मीरी शॉल जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) बढ़ाने के प्रस्ताव पर जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ्ती भड़क गईं. शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाने के बाद राज्य का यह हस्तशिल्प उद्योग पूरी तरह खत्म हो जाएगा. महबूबा मुफ्ती ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से इस मुद्दे पर ध्यान देने की अपील की.

कश्मीरी शॉल पर जीएसटी दर बढ़ाने का प्रस्ताव

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती का यह बयान तब सामने आया है, जब शनिवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राजस्थान के जैसलमेर में जीएसटी परिषद की 55वीं बैठक में कश्मीरी शॉल समेत रेडीमेड कपड़ों पर जीएसटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया. जीएसटी दरों को तय करने के लिए गठित मंत्री समूह ने रेडीमेड कपड़ों पर टैक्स रेट को उचित बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ ही, मंत्री समूह ने 1,500 रुपये तक की लागत वाले रेडीमेड कपड़ों पर 5% जीएसटी और 1,500 रुपये से 10,000 रुपये तक की लागत वाले कपड़ों पर 18% जीएसट का प्रस्ताव रखा है. 10,000 रुपये से अधिक कीमत वाले कपड़ों पर 28% कर लगेगा.

महबूबा ने सरकार पर लगाया आरोप

महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया है कि कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के लोगों को पूरी तरह टूरिज्म पर निर्भर बनाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, ”कश्मीरी शॉल हमारे लिए सिर्फ आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि जम्मू-कश्मीर की पहचान है. यह पूरी दुनिया में मशहूर है. नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने शाहतूश पर प्रतिबंध लगा दिया, जो हमारी विरासत थी. इससे आर्थिक नुकसान भी हुआ.”

महबूबा ने उमर अब्दुल्ला से पूछे सवाल

पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने कहा, ”आज जब आप कश्मीरी शॉल पर जीएसटी बढ़ाकर 28% कर देंगे, तो हमारी कला अपने आप खत्म हो जाएगी.” उन्होंने आरोप लगाया कि बागवानी वाली जमीन पर विकास कार्य करके और हस्तशिल्प क्षेत्र पर जीएसटी लगाकर जम्मू-कश्मीर को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने पूछा, ”इनकी वजह से जम्मू-कश्मीर अपने कठिन समय में बचा रहा. मैं उमर अब्दुल्ला से अनुरोध करती हूं कि ये हमारी संपत्ति हैं. आपके पास 50 विधायक हैं, 3 सांसद हैं और भगवान के लिए हमें बताएं कि आप हमारी संपत्ति को बचाने के लिए क्या कर रहे हैं? जीएसटी को 28% करने के मुद्दे पर आप क्या कर रहे हैं.”

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जम्मू-कश्मीर को पर्यटन क्षेत्र बनाना चाहती है केंद्र सरकार: महबूबा

पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने अपने आरोप कहा, ”अगर हमारी बागवानी और हस्तशिल्प खत्म हो गए, तो हम केवल पर्यटन पर निर्भर रहेंगे. शायद, केंद्र सरकार बागवानी और हस्तशिल्प क्षेत्रों को खत्म करना चाहती है, ताकि जम्मू-कश्मीर के लोग केवल पर्यटन पर निर्भर रहें और वे जब चाहें पर्यटकों को यहां भेज सकें.”

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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