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Mahakumbha Mela: प्रयागराज महाकुंभ में 2.8 लाख करोड़ रुपये का कारोबार, बन गया आर्थिक महाशक्ति

Updated at : 01 Apr 2025 11:07 PM (IST)
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Simhastha Kumbh

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Mahakumbha Mela: प्रयागराज महाकुंभ 2025 ने न केवल आध्यात्मिक, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी इतिहास रचा. परिवहन, पर्यटन और स्थानीय व्यापार के जरिए यह मेला उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित हुआ.

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Mahakumbha Mela: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ 2025 न सिर्फ धार्मिक आयोजन था, बल्कि एक आर्थिक महाकुंभ भी साबित हुआ. वैश्विक कंपनी ‘डन एंड ब्रैडस्ट्रीट’ की रिपोर्ट के अनुसार, इस मेले में 2.8 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां हुईं, जो इसे भारत के सबसे बड़े आर्थिक इवेंट्स में से एक बनाती है.

आर्थिक प्रभाव का विश्लेषण

रिपोर्ट में बताया गया है कि महाकुंभ से प्रत्यक्ष खर्च 90,000 करोड़ रुपये रहा, जिसमें परिवहन, आवास, भोजन और पर्यटन शामिल हैं. अप्रत्यक्ष प्रभाव 80,000 करोड़ रुपये का रहा, जो सप्लाई चेन की बढ़ती मांग से आया. वहीं, प्रेरित प्रभाव 1.1 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित है, जो स्थानीय श्रमिकों द्वारा आवास, शिक्षा और स्वास्थ्य पर पुनर्निवेश से पैदा हुआ.

कहां कितना हुआ खर्च

महाकुंभ के कुल खर्च में 2.3 लाख करोड़ रुपये उपभोग व्यय और 50,000 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे पर पूंजीगत व्यय के रूप में दर्ज किए गए. परिवहन ने अकेले 37,000 करोड़ रुपये का योगदान दिया, जिसमें रेलवे ने 17,700 करोड़ रुपये कमाए. तीर्थयात्रियों ने हेलिकॉप्टर राइड, हॉट एयर बैलून, और एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी मनोरंजक गतिविधियों पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए.

स्थानीय कारोबार को बढ़ावा

लगभग दो लाख खुदरा विक्रेताओं ने 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि खाद्य सेवाओं से 6,500 करोड़ रुपये की कमाई हुई. चाय की दुकानों ने प्रतिदिन 30,000 रुपये तक कमाए, और पूड़ी की दुकानों की औसत आय 1,500 रुपये प्रतिदिन रही.

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डेटा आधारित अनुमान

‘डन एंड ब्रैडस्ट्रीट’ ने मालिकाना आर्थिक मॉडलिंग और डेस्क रिसर्च के जरिए यह आंकड़ा तैयार किया. पहले के अनुमानों में 2 लाख करोड़ रुपये की बात थी, लेकिन नई रिपोर्ट ने इसे 2.8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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