Desi Liquor: शराबबंदी वाले इस राज्य में बीयर बेचेगी सरकार, चावल और फलों से बनेगी शराब

Updated at : 05 Mar 2025 7:13 PM (IST)
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Mizoram Desi Liquor sale policy

Mizoram Desi Liquor sale policy

Desi Liquor: पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में साल 1987 से शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है. इससे पहले 1984 में राज्य सरकार ने आंशिक प्रतिबंध लगाया था. मिजोरम में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए जाने के बाद राज्य में इसकी अवैध बिक्री की जा रही है, जो सरकार के लिए चिंता का विषय बना हुआ है. राज्य सरकार स्थानीय स्तर पर पारंपरिक तरीके से देसी शराब और बीयर का उत्पादन करके एक तीर से दो निशाना साधना चाहती है.

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Desi Liquor: शराबबंदी वाले राज्य में भले ही सरकार ने कानूनी तौर पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया हो, लेकिन तथाकथित तौर पर ऐसे राज्यों में अवैध तरीके से शराब की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है. पूर्वोत्तर के राज्य मिजोरम में शराबबंदी के बावजूद राज्य सरकार बीयर और देसी शराब की बिक्री की अनुमति देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए मिजोरम शराब (प्रतिबंध) अधिनियम, 2019 में संशोधन को लेकर विधानसभा में एक विधेयक पेश किया जाएगा. इस संशोधित विधेयक के तहत राज्य में चावल और फलों से बनी बीयर और शराब को नियंत्रित तरीके से लाइसेंसधारी दुकानों पर बेचा जा सकेगा.

क्या है विधेयक का उद्देश्य?

राज्य सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य मिजोरम में पारंपरिक तरीके से बनने वाली शराब के उत्पादन और बिक्री को विनियमित करना है. हालांकि, मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्पष्ट किया है कि शराबबंदी की मौजूदा नीति को पूरी तरह से हटाने का कोई इरादा नहीं है. सरकार केवल स्थानीय रूप से निर्मित शराब और बीयर की बिक्री को नियंत्रित करेगी.

बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?

  • चावल और फलों से बनी बीयर और शराब की बिक्री की अनुमति केवल लाइसेंसधारी विक्रेताओं को दी जाएगी.
  • मिजो पारंपरिक शराब को भी कानूनी रूप से बेचे जाने की अनुमति होगी.
  • शराब की दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं होगी, लेकिन स्थानीय उत्पादकों को नियंत्रित बिक्री की छूट मिलेगी.
  • इस फैसले पर काफी मंथन के बाद नियमों को मंजूरी देने की बात कही जा रही है.

मिजोरम में शराबबंदी का इतिहास

मिजोरम में शराबबंदी को लेकर समय-समय पर कई बदलाव हुए हैं.

  • 1984: शराब की बिक्री पर आंशिक प्रतिबंध लगाया गया.
  • 1987: शराब की दुकानें पूरी तरह बंद कर दी गईं.
  • 1995: मिजोरम पूर्ण शराबबंदी अधिनियम लागू हुआ, जिससे 1997 में पूरी तरह शराब पर प्रतिबंध लगा दिया गया.
  • 2015: नए कानून के तहत शराब की बिक्री की अनुमति दी गई, जिससे राज्य में शराब की दुकानों की वापसी हुई.
  • 2019: मिजोरम ने फिर से शराबबंदी लागू कर दी.
  • 2024: सरकार ने शराबबंदी कानून की समीक्षा करने की घोषणा की.

शराब की अवैध बिक्री पर लगेगी रोक

सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर निर्मित शराब और बीयर की बिक्री से राजस्व बढ़ेगा और गैर-कानूनी शराब बिक्री पर रोक लगाई जा सकेगी. इसके साथ ही, इससे स्थानीय उत्पादकों को भी आर्थिक लाभ होगा. हालांकि, शराबबंदी समर्थक इस फैसले पर असहमति जता सकते हैं, क्योंकि वे इसे प्रतिबंध नीति के खिलाफ मानते हैं.

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संतुलित समाधान निकालेगी सरकार

मिजोरम सरकार का यह कदम शराबबंदी नीति को पूरी तरह समाप्त किए बिना एक संतुलित समाधान निकालने की कोशिश है. इससे राज्य के आर्थिक विकास को बल मिल सकता है और अवैध तरीके से शराब की बिक्री पर नियंत्रण लगाया जा सकता है. हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि जनता और विपक्षी दल इस निर्णय पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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